राखी – डॉ.अनुपमा श्रीवास्तवा
“माँ…सुबह-सुबह क्या खटर -पटर कर कर रही हो किचेन में?” “अरे बेटा कुछ नहीं, तू बहन के घर जा रहा है…सोचा कुछ अच्छा बना देती हूं ले जाने के लिए। दो-दो खुशियां हैं इसीलिए। “दो दो खुशियां?” “हाँ और नहीं तो क्या! एक तो राखी का दिन और दूसरा एक साल बाद तू बहन के … Read more