कंजूस पापा* – गोपेश दशोरा
ऐसी बात नहीं कि पापा कुछ नहीं दिलाते थे, पर जब भी कुछ दिलाते थे… हे भगवान्! इतनी दुकानों के चक्कर और इतना मोल भाव कि कभी-कभी तो हमें लगता था, कि हमने कुछ मांग कर ही गलती कर दी। छोटी-मोटी दुकानों तक तो ठीक वो तो शॉपिंग मॉल और कम्पनी आउटलेट पर भी भाव … Read more