सम्पति का मोह – लतिका पल्लवी : Moral Stories in Hindi

चाची जी, आप! आप गाँव से कब आईं? मैं तो कब से आपसे मिलने गाँव जाने का सोच रही थी, पर जाना नहीं हो पा रहा था। समय ही नहीं मिल रहा था। कभी मुझे छुट्टी मिल रही थी तो आपके बेटे को नहीं, और आपके बेटे को छुट्टी मिलती तो मुझे नहीं। आप तो … Read more

संस्कार विरासत में नहीं मिलते – प्रतिभा भारद्वाज ‘प्रभा’ : Moral Stories in Hindi

“बेटा खाना तो खा जाता….इतनी सुबह सुबह कहां जा रहा है….”राजीव को सुबह 6 बजे जाता देख अनीता ने टोका। “क्या मां कितनी बार कहा है कि जब कहीं जाया करूं तो टोका मत करो….अरे खाना होगा तो खा लूंगा, कोई बच्चा तो नहीं हूं मैं….अच्छा खासा मूड खराब कर दिया….”गुस्से में कहते हुए राजीव … Read more

इंतजाम – बीना शर्मा : Moral Stories in Hindi

“क्या है राघव बेटा? मुझे सोने दो ना” क्यों नींद में परेशान कर रहे हो मुझे ? मीरा सुबह के समय नींद में बडबडाते हुए बोली दरअसल मीरा गहरी नींद में सोई हुई थी तब उसे ऐसे लग रहा था जैसे कोई उसे नींद से जगाने के लिए उसके बालों को प्यार से सुलझा रहा … Read more

बुजुर्गो के खिलाफ आखिर साजिश क्यों – कमलेश आहूजा : Moral Stories in Hindi

“आपने मेरे लिए क्या किया है?” बेटे रोहन के मुंह से ऐसे कठोर शब्द सुनकर सरिता की आंखों में आसूं आ गए।जिस बेटे को इतने नाजों से पाला अपनी रातों की नीद कुर्बान की वही आज उसकी परवरिश पे सवाल कर रहा था वो भी बहु प्रिया के सामने जिसने आते ही पूरी तरह से … Read more

अपना ही सिक्का खोटा – शुभ्रा बैनर्जी : Moral Stories in Hindi

सुमित्रा जी को सभी रिश्तेदारों ने समझाया था,कि पहले बेटी के हांथ पीले कर दें।बेटे की शादी हो ही जाएगी। सुमित्रा जी को यह मंजूर नहीं था।बड़ी बेटी के लिए अच्छा वर मिलते ही सात  साल पहले शादी कर चुकी थीं वे।अब इकलौते बेटे की बहू आने पर ही छोटी बेटी ब्याहेंगी,ऐसी  उनकी जिद थी। … Read more

घर की रौनघर की – अर्चना सिंह : Moral Stories in Hindi

रुपाली बिल्कुल जड़वत सी हो गयी, मानो शरीर की अंदरूनी ताकत समाप्त हो गयी जैसे ही उसने अपने छब्बीस वर्षीय बेटे के मुँह से सुना कि शादी तो मैं जरूर करूँगा , आपके कहने का मुझ पर कोई फर्क न होगा । आप शादी के बारे में कहती हैं दुनिया की सबसे खराब चीज है … Read more

खूबसूरत साज़िश – विभा गुप्ता

   ” नहीं रश्मि…मैं उस मराठन के साथ बिल्कुल भी नहीं जाने वाली है..।अरे तू नहीं जानती…वो मुझे…।” गायत्री जी अपनी बात पूरी कर पाती, उससे पहले ही उनकी बेटी ने उन्हें बीच में ही टोक दिया,” बस माँ..अब फिर से शुरु मत हो जाओ..।भाभी तो तुम्हारी ही इच्छा पूरी..।खैर, मैं उन्हें बता देती हूँ कि … Read more

विधवा

एक बहुत बड़े होटल में शादी का फंक्शन चल रहा था। बारात दरवाजे पर आ चुकी थी। द्वार पर एक बहुत ही खूबसूरत लड़की सुर्ख लाल रंग के गाउन में बहुत ही अच्छा डांस कर रही थी। हर कोई उसे देखकर बस उसकी तारीफ़ कर रहा था। तभी वह ठककर साइड हो गई। बारात ने … Read more

अधिकार

आदित्य की कार दरवाज़े पर रुकी ही थी कि भीतर से ऊँची आवाज़ें बाहर तक आ रही थीं। वह ठिठक गया—पहचान लिया, यह तो उसकी माँ सरोज जी की आवाज़ है। मन में खटका हुआ, “शायद काव्या से कोई चूक हो गई होगी… पर ऐसे चिल्लाने की क्या ज़रूरत?” वह तेज क़दमों से अंदर पहुँचा। … Read more

नखरे

“माँ, देख लिया भाभी को? फिर घर पर ही खाना बना लिया। यह भी नहीं सोचा कि ननद कौन-सा रोज़-रोज़ आती है, तो आज खाना किसी होटल में ही खा लेते। त्यौहार कौन-सा रोज़ आते हैं, लेकिन इन्हें तो मेरे आने की खुशी ही नहीं होती।” श्रद्धा रक्षा बंधन पर मायके आई थी। राखी बाँधने … Read more

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