हिन्दी मे सुविचार

जरा सी बात से मतलब बदल जाते हैं,उंगली उठे तो बेइज्जती, और अंगूठा उठे तो तारीफ मतलबी नहीं मैं बस दूर हो गयी हूँ..उन लोगों से जिन्हे मेरी कदर नहीं. ‘रिश्ते’ और रास्ते’ के बीच,एक अजीब रिश्ता होता हैकभी ‘रिश्तों‘ से ‘रास्ते’ मिल जाते है और कभी ‘रास्तों’में ‘रिश्ते’ बन जाते हैं! इसीलिएचलते रहिये और … Read more

हिन्दी मे सुविचार

जीतने का सबसे ज्यादा मजा तब आता है जब सारे आपके हारने का इन्तजार कर रहे हो। दुनिया में सबसे वजनदार खाली जेब होती है, चलनामुशिकल हो जाता है. जिनके दिल अच्छे होते हैं उनकी किस्मत खराब होती है रात भारी चाँद फ़ीका सितारे खट्टे जुगनूं नुकीले सारी रंगीनियां बेरंग है मेरे हमदम तेरे बगौर … Read more

राजा साहब (भाग 1 ) – रश्मि प्रकाश

“अरे बाबू आपको क्या ज़रूरत पड़ी थी इस गाँव में आकर अपना बुढ़ापा काटने की…. पैदल चलते चलते हम सब थक गए हैं पर आप में अभी भी जोश है जाने कितने कोस की दूरी और तय कर लेंगे ।” हरिया ने राजा साहब से कहा शहर से साथ आए परिवार के सदस्य भी थक … Read more

राजा साहब (भाग 2 ) – रश्मि प्रकाश

दूसरे दिन तड़के हरिया उस गाँव की ओर निकल गया। दो गाँव पार कर के उसके गाँव पहुँच गया। क्या कह कर घर के अंदर जाए इसी असमंजस में था कि उसपर एक आदमी की नज़र पड़ गई ,“ क्यों भाई किसको खोज रहे हो… तुम्हें पहले तो कभी नहीं देखा है… चौधरी साहब के … Read more

राजा साहब (भाग 3 ) – रश्मि प्रकाश

दस दिन किसी तरह बीत गए बच्चों को भी गाँव में मन लगने लगा था…हर दिन खेतों पर जाना.. ताजी ताजी सब्ज़ियाँ तोड़ कर लाना… नए नए अनुभव लेकर अब उनके जाने का दिन आ गया था। राजा साहब चाहकर भी बच्चों को रोक नहीं सकते थे क्योंकि सोहम और सोहा के स्कूल जो खुलने … Read more

राजा साहब (भाग 4 ) – रश्मि प्रकाश

सोना ने बहुत अच्छी तरह से रज्जु की देखभाल की ज़िम्मेदारी उठा ली थी। सोहम और सोहा शाहर जाने के इंतज़ार में बस अब दिन गिन रहें थे क्योंकि उनकी पढ़ाई का नुक़सान हो रहा था.. संग लाई किताबें पढ़ तो रहे थे पर स्कूल के दोस्तों को याद करते रहते थे गाँव में जो … Read more

राजा साहब (भाग 5) – रश्मि प्रकाश

सोना ने बहुत अच्छी तरह से रज्जु की देखभाल की ज़िम्मेदारी उठा ली थी। सोहम और सोहा शाहर जाने के इंतज़ार में बस अब दिन गिन रहें थे क्योंकि उनकी पढ़ाई का नुक़सान हो रहा था.. संग लाई किताबें पढ़ तो रहे थे पर स्कूल के दोस्तों को याद करते रहते थे गाँव में जो … Read more

राजा साहब (भाग 6 ) – रश्मि प्रकाश

राजा साहब भागे भागे रज्जु की कोठी पर पहुँचे उनके पीछे पीछे हरिया भी सोना, सोहम और सोहा को ले आया था। “ ये क्या बात हुई रज्जु एक दिन में ही तुमने जाने की बात कह दी.. ना पहले कुछ सुनने को तैयार हुई ना अब बस तुम्हें भागने की आदत है..!” राजा साहब … Read more

राजा साहब (भाग 7 ) – रश्मि प्रकाश

ऐसे ही महीने बीतने लगे रज्जु ने स्कूल आना बंद कर दिया कजली भी अब कभी आती कभी नहीं आती । राजा साहब से रहा नहीं गया तो हरिया को ले रज्जु के घर पहुँच गए। घर पहुँचे तो रज्जु के माता पिता घबरा गए। वो लोग रज्जु से मिलने नही दे रहे थे। राजा … Read more

राजा साहब (भाग 8 ) – रश्मि प्रकाश

राजा साहब अब सब छोड़ कर पिता के कारोबार में लग गए जो शहर जाकर सामान लाते और अपनी एक छोटी सी परचून की दुकान पर बेचा करते। गाँव में कम उम्र में ही ब्याह कर दिया जाता है बस राजा साहब के लिए भी रिश्ते की बात चलने लगी।राजा साहब हर रिश्ते में कमी … Read more

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