फरिश्ता – कमलेश राणा

बात 1947 की है,,हमारे दादाजी सेंट्रल बैंक में जॉब करते थे,, उस समय उनकी पोस्टिंग पंजाब के लायलपुर में थी,,यह स्थान बंटवारे के बाद वर्तमान समय में  पाकिस्तान का हिस्सा है,, हमारी दादीजी गोरी चिट्टी बहुत खूबसूरत महिला थीं,,,वह अक्सर वहाँ के मजेदार किस्से सुनाया करतीं थीं,, वहां वह कंपनी बाग में घूमने जातीं थीं,,इसमें … Read more

रील V/S सिनेमा –  अरुण कुमार अविनाश

सिनेमा देखने क्यों जाऊँ ? उन बूढ़ी – बासी – बेनूर चेहरों का दीदार भी क्यों करुँ ? जिनका कहना है कि क्यों आते हो देखने ? हम तो तुम्हें बुलाते नहीं है। सेंसर हो चुकें दृश्यों का अवलोकन ! मैं क्यों करुँ ? अपने गाढ़े पसीने की कमाई क्यों बर्बाद करुँ ? सबसे बड़ी … Read more

मिनी – मीना माहेश्वरी

 बात 19_20 साल पुरानी है,   मेरे पास ट्यूशन पढ़ने एक बच्ची आती थी, ,,,,,,,,मिनी हां,यही तो नाम था उस बच्ची का, ,,,,,,,,एकदम अपने नाम की तरह नन्ही_ सी। पतली _दुबली,  सांवला रंग, मनमोहक मुस्कान, हमेशा तितली सी चहकती, फुदकती रहती ,,,,यहां ,,,,,से ,,,,,वहां।    नाम ही बस मिनी था उसका, थी एकदम “पॉवर हाउस” … Read more

मृग मरीचिका – मधुसूदन शर्मा

उत्तर भारत में जून माह के मध्य की दोपहरियां सूरज की रोशनी के सैलाब के साथ साथ उसका सारा ताप भी ले आती हैं। कस्बे से शहर को जाती सूनी और तपती सड़कें  प्यास से व्याकुल  मुसाफिर को मृग मरीचिका का भ्रम देती हैं । शहरों का हाल तो और भी बेहाल है। तेज गर्मी … Read more

अहं के घेरे – विजय शर्मा

शाम को पांच बज रहे थे। ऊंघते हुए चपरासी ने घड़ी की और उनींदी नजरों  से देखा और एकदम मुस्तैद हो गया,  टन टन टन….. जोर से घंटी की आवाज स्कूल परिसर में गूंजने लगी। स्कूल की सभी कक्षों में से झुण्ड के झुण्ड बालिकाएँ बन्दूक की गोली की तरह बाहर निकल रही थी। खनखनाती … Read more

दूसरा मायका – रीटा मक्कड़

“अरे वाहः रीना आज तो बड़ी प्यारी लग रही हो”  रक्षाबंधन वाले दिन मैं अपने मायके से वापिस आयी ही थी कि रीना मुझे बाहर ही मिल गयी। चटक हरे रंग के लहंगा चोली और मांग टीका लगाए सजीधजी आज तो वो बिल्कुल अलग और बहुत सुंदर दिख रही थी। ‘हांजी आंटी मैं भी अभी … Read more

लहरों के मानिंद… – संगीता त्रिपाठी

कुछ रिश्ते ऐसे होते जिन्हे हम कोई नाम ही नहीं दे पाते। कभी लगता अच्छे दोस्त हैं, तो कभी कुछ और.. पर दिल संतुष्ट नहीं होता, ना ही उस रिश्ते को छोड़ना चाहता, यानि दिल का रिश्ता, जो किसी नाम, उम्र और जगह या बंधन का मोहताज नहीं होता। सुहानी और जतिन का रिश्ता भी … Read more

“तो फिर वकील साहब को बुलाया जाये ?” – अनुज सारस्वत

5 साल बाद अंकिता और उसकी सहेलियां एक पार्टी में मिली, सब एक दूसरे से मिलकर खुश हुई ,फिर वही हुआ जो लेडीस गैंग के मिलने पर होता है, दो परसेंट अच्छाई की बातें फिर  98% निंदा रस से भरी खीर सब चाव से खाते हैं, निष्कर्ष कुछ नहीं होता है , सबने अपने-अपने पतियों … Read more

जूही – डॉ पारुल अग्रवाल

आज अविनाश आखों के बहुत ही सफल डॉक्टर बन चुका है, देश-विदेश में बहुत ही प्रसिद्ध है। बहुत सारे लोगों को उसने इस खूबसूरत दुनिया दिखाने में सफलता प्राप्त की है। आज वो अपने केबिन में थोड़ा आराम से बैठा ही क्योंकि आज मरीजों की संख्या काफी कम थी। इतने में उसे रिसेप्शन से कुछ … Read more

चौकीदार दादा – गुरविंदर टूटेजा

   रिया अपने आठ वर्ष के बेटे अंश को गुस्सा कर रही थी…पैसे कहाँ है अंश जो तुम्हें पापा ने खर्चे के लिये दिये थें…??      अंश बोला…मम्मा खर्चें के थे खर्च हो गये…!!    कहाँ किये तुमने खर्च…दिख तो नहीं रहा कि तुमने कुछ लिया हो…!!    रिया ने बहस नहीं की और नमन से बात करने का … Read more

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