और फूल खिल गए! – ज्योति व्यास

अरे लल्ला ! यहाँ अकेले काहे बैठे हो ? वो भी इतने उदास ! क्या हो  गया? कुछ नहीं भाभी माँ !बस यूं ही। हमसे न छुपाओ। हमारे सामने नेकर पहनना भी नहीं आती थी। कल तुम्हारा ब्याह हुआ है ,आज यहाँ उदास बैठे हो और कहते  हो कुछ नहीं हुआ ! भाभी एक ही … Read more

जो जस करहिं तस फल चाखा – प्रीति आनंद

*********************** “श्रद्धा! कहाँ व्यस्त हो? कब से बोला हुआ है आँगन की धुलाई कर दो, मुझे पूजा करनी है?” “जी माँजी, प्रतीक का टिफ़िन पैक कर रही थी, उन्हें आज जल्दी निकलना है।” “तो जल्दी उठना था न? मेरे काम में ही तेरी सारी कामचोरी निकलती है!” प्रतीक दरवाज़े पर खड़ा टिफ़िन का इंतज़ार कर … Read more

हाऊस वाइफ – रचना कंडवाल 

अरे भई रीमा नाश्ता तैयार हो गया क्या? मुझे ऑफिस के लिए देर हो रही है।अमर ने बेडरूम से आवाज दी।रीमा बाबू जी को दलिया उनके रुम में दे कर बाहर आई। तो अमर ने उसे गुस्से से घूरा जल्दी से हाथ नहीं चला सकती हो। रीमा ने उसी शांत भाव से कहा अभी लाती … Read more

जीवन की शाम – नीरजा कृष्णा

मीता सुबह चाय लेकर आई…जगत बाबू आँखों पर बाँह फैलाऐ चुपचाप लेटे थे…आँखें नम थीं…वो चिंतित होकर पुकार बैठी,”पापा चाय…क्या बात है…अभी तक लेटे हैं…आप तो बहुत जल्दी उठ जाते हैं।” वो चौंक कर उठ बैठे और नज़रें चुराते हुए चाय का कप थाम लिया… वो वहीं कुर्सी खींच कर बैठ गई,” पापा, जब से … Read more

वापिसी.. -रीटा मक्कड़

आज अनिता का मन सुबह से बहुत ज्यादा ही उदास था। बार बार आंखें छलक रही थी। सुबह से रात होने को आई थी लेकिन उसकी ज़िन्दगी का सूनापन और अकेलापन तो हर उगते सूरज और हर ढलती शाम के साथ बढ़ता ही जा रहा था। आज उसके पतिदेव मनोहर लाल  का जन्मदिन था। कहाँ … Read more

सच्चा उपहार – अनुपमा

  कितना भी रोक ले , पानी से मुंह धो ले बार बार पर जब तक पापा आते , दोनो की दोनो सो चुकी होती ,इंतजार करते करते निढाल सी हो जाती बेचारी दोनो की दोनो । गोपाल जैसे ही घर पहुंचा उसने अपनी दोनों बेटियों को आवाज लगाई … जल्दी आओ रानू गोलू देखो … Read more

आखिर वह कौन थी – कविता भड़ाना

रिमझिम हो रही तेज बारिश देख कर आज मन में हलचल मची हुई थी मन ही मन बहुत खुश होकर अपना पसंदीदा गाना गुनगुना रही थी बारिश का मौसम वैसे भी मेरा फेवरेट मौसम है बहुत दिनों के बाद आज घर में अकेले रहने का मौका मिला था एक संयुक्त परिवार में रहने वाली मैं … Read more

ज़िंदगी के ताने बाने –  के कामेश्वरी

   सुबह के आठ बजकर तीस मिनिट हो गये थे । विनय घड़ी की तरफ़ नज़र घुमाता है और जल्दी – जल्दी तैयार होते हुए मन ही मन अपने आपको कोस रहा था कि अलार्म के बजने पर उसे बंद कर फिर क्यों सो गया । तभी माँ ने कमरे में प्रवेश किया । विनय उन्हें … Read more

  संदेह का घेरा –    मुकुन्द लाल

  जयंत ने बेवजह अच्छी खासी बनी हुई मूर्तियों को डंडे के वार से तोड़ दिया। उसकी पत्नी पुष्पा पहले हैरत से देखती रह गई, फिर वह सहन नहीं कर पाई, वह उबल पड़ी, ” पागल हो गये हो? दिमाग खराब हो गया है, क्यों तुमने मूर्ति तोड़ दिया?”   “हांँ!… मैं तोड़ दूँगा!… मेरा कोई दिल … Read more

” लता ” – गोमती सिंह

       *********   ———नीता ने अपने पति के सामने जैसे ही भोजन की थाली रखी , उसे देखकर उसके पति गुस्से से भड़क गए चिल्लाते हुए कहा-तुम्हें पता है न कि खाना खाने के तुरंत बाद मैं मिठाई खाता हूँ  , तो तुम मिठाई क्यों नहीं रखी हो थाली में।   जी…..जी…..नीता कुछ बोल पाती … Read more

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