दतिया का  डरावना  घर – सुषमा यादव

इनकी पहली पोस्टिंग दतिया जिले में हुई थी,, इन्होंने एक अच्छा सा मकान लिया और मुझे बुलाने आ गये,उस समय मैं म . प्र. के एक और जिले में नौकरी कर रही थी,, मैं बहुत खुश होकर मेडिकल अवकाश पर इनके साथ दतिया में उस नये मकान में रहने पहुंची,,घर बहुत अच्छा था, मुझे बहुत … Read more

“अनोखा रक्षाबंधन ” – अनुज सारस्वत 

“दादी दादी यह रक्षाबंधन क्या होता है मम्मी कह रही थी मामा आएंगे हम मिठाई खाएंगे”  6 साल के हर्ष ने अपनी दादी से कौतूहल वश पूछा ,हर्ष इकलौता बेटा था  फिर दादी बोली “बेटा भाई बहन का त्यौहार होता है यह, भाई अपनी बहन की रक्षा करने का वचन देता है जब बहन राखी … Read more

कड़क चाय: – मुकेश कुमार (अनजान लेखक)

शायद ही कोई चाय का शौक़ीन होगा जो कभी ना बोला हो की चाय थोडी कड़क लाना या बनाना। आप किसी भी हाल में हों: ख़ुश, नाराज़, दुखी, गमगीन या मस्तमौला, किसी के सताए हों, किसी से दग़ाबाज़ी मिली हो या किसी ने परेशान कर के थका दिया हो। चाय हर हाल में आपको वही … Read more

रखवाला – गीतांजलि गुप्ता

<p><span style=”font-weight: 400;”>”ओ छोरे ठीक से काम कर वर्ना निकाल दूंगा नौकरी से। आलसी कहीं का जल्दी जल्दी हाथ चला कर मेजे साफ़ कर फिर बर्तन भी धो पोंछ कर लगा सारे।” रोज डयूटी पर आते ही लाला की यही आवाज़ बारह वर्ष के कांशी के कानों को चीरती और बेचारा भूखा बच्चा जल्दी जल्दी … Read more

खुशी – सुधा शर्मा

   शाम के साथ ही जैसे डूबते सूरज के साथ ही मन भी डूबने लगा था , रात की गहराती स्याही उतरने लगती थी चेतना में ।बरामदे में गौरी पिछले कुछ समय में घटी घटनाओं की त्रासदी में डूबने लगी थी।         कितना प्यारा भरा पूरा परिवार ।बेटा , बहू, सात वर्ष की चहचहाती पोती।बेटा कनाडा में … Read more

रास्ता बहुत सुनसान था!  – मनीषा भरतीया

रास्ता बहुत सुनसान था. आज रागिनी को ऑफिस से निकलने में कुछ ज्यादा ही देर हो गई थी. जहां वह 5:00 बजे ऑफिस में निकलती थी, आज बॉस के कहने पर एक जरूरी असाइनमेंट पूरा करने में उसे 3 घंटे लग गए क्योंकि उसे आज ही पूरा करना था.  एक तो ठंड के कारण 5:00 … Read more

  दोस्ती हो तो ऐसी – मनीषा भरतीया

दोस्तों दोस्ती का रिश्ता ही ऐसा होता है …जो इंसान अपनी मर्जी से बनाता है…..बाकी सारे रिश्ते जैसे माता-पिता ,भाई-बहन, दादा-दादी यह सब तो हमें विरासत में मिलते हैं…जिसे हम चुन नहीं सकते… दोस्ती इंसान की कहीं भी किसी से भी कभी भी हो सकती है…. यह अमीरी गरीबी ,छोटा बड़ा ,ऊंच -नीच के भेद … Read more

दोस्ती : एक विश्वास   –  आरती झा”आद्या”

मोहित गाड़ी से उतर यंत्रचालित सा चलता हुआ एयरपोर्ट के अंदर आकर बैठ गया। होनहार प्रतिभावान मोहित के लिए एमबीए खत्म होने से पहले ही लंदन की एक नामी गिरामी कंपनी से लंदन या भारत कहीं भी जॉइन करने के लिए जॉब ऑफर आ गया था। मोहित जो कि पहले मन ही मन भारत में … Read more

बच्चे मन के सच्चे – मनी शर्मा

बच्चे कितने सरल होते हैं। ऊँच नीच जात पात किसी का भेद नहीं समझते बस अपनी सच्ची नज़र से दुनिया देखते हैं। उस दिन हमारे घर काम करने वाली सोनी के साथ उसकी पाँच वर्ष की बेटी आई। एक बार तो मैं देखती रह गई। गोरा रंग, बड़ी बड़ी आँखों में मोटा मोटा काजल ,गोल … Read more

रूधिरा एक छलावा ” – रीमा महेंद्र ठाकुर

“समन्दर की लहरें उफान पर थी”  छोटे छोटे पत्थरो के ऊपर से गुजरते हुए एक बच्चा तेजी लहरों की ओर बढ रहा था “ बेटा, ज्यादा तेज मत भागो “कंक्रीट है चुभ जाऐगी” पीछ से मां आवाज लगा रही थी!  नो मम्मा “” सूज है न, बच्चा रुककर “पैर ऊपर उठाकर माँ को” दिखाते हुए … Read more

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