जीने की राह – अर्चना कोहली “अर्चि”

हर किसी की ज़िंदगी में कुछ पल अवश्य ऐसे आते हैं जब वह आत्मविश्वास की राह पर चलकर एक विशेष मुकाम हासिल कर लेते हैं। यह कहानी भी है- श्यामा नाम की एक ऐसी लड़की की, जिसने अपने हौसले और आत्मविश्वास के बल पर इच्छित मुकाम हासिल कर लिया। श्यामा को आज जब समाजसेवा के … Read more

*भगोड़ा* – सरला मेहता

चन्दन सेठजी व माधुरी की सर्वगुण सम्पन्न बेटी सुष्मिता की अपने घर में खूब चलती है। चले भी क्यूँ ना, छोटा भाई श्रवण ठहरा सीधा सा व शांत प्रकृति वाला। कोई भी उसे बुद्धू बना सकता है।  लोगों ने दबी ज़ुबान में उसे गोबर गणेश ही नाम दे दिया। सेठ जी अक्सर सेठानी को ताना … Read more

ईशानी” – दीपा साहू “प्रकृति”

वाह री किस्मत प्यार भी हुआ तो कोसो दूर बैठे उस लड़के से जिसे “ईशा” रत्ती भर नहीं जानती।कोरोना महामारी में जब सब काम काज़ ऑनलाइन हो चुका था,इस कंपनी से उस कंपनी मीटिंग मेलजोल आदि  ऑनलाइन माध्यम से हो रहे थे “ईशा” “शिवांशु” की मुलाकात भी हुई ऑनलाइन मीटिंग्स में।एक राज्य से दूसरे राज्य … Read more

जन्माष्टमी – विजय शर्मा “विजयेश”

गोपाल मिल का सायरन ऊँची आवाज में बजते ही गेट लोगो का सैलाब बाहर आता नजर आ रहा था। बाहर निकलने वालों में होड़ लगी हुई थी कौन जल्द से जल्द पहले निकले। यह इस शहर की सबसे बड़ी कपड़ा मिल है। यहाँ हजारों कामगार सुबह शाम और रात तीनों पालियों में काम करते हैं। … Read more

वादा – कमलेश राणा

अरे छाया तुम,,कितना सुखद आश्चर्य है न,,कभी सोचा ही नहीं था कि जीवन में कभी मिल पायेंगे,,   हाँ मीता,मुझे भी लग रहा था कि तुम हो,,लेकिन आँखों पर विश्वास नहीं हो रहा था,,तुझे छू के देखूँ,,कहीं सपना तो नहीं,,   आ गले लग जा यार,,इन पलों को सेलिब्रेट करते हैं,,   मिलन की खुशी … Read more

बाकी सब ठीक है* – नम्रता सरन”सोना

“चिट्ठी…”अचानक पोस्टममेन की आवाज़ से दरवाज़े की तरफ दौड़ पड़ी शालिनी, एक अजीब सा चुंबकीय बुलावा था जैसे, लिफाफा उठाकर देखा, इंश्योरेंस कंपनी का अपडेट था, भारी मन से शालिनी भीतर आ गई, लेकिन आंखों के सामने बीते कुछ चित्र तैर गए। “चिट्ठी…” शालिनी बेतहाशा दौड़ती हुई दरवाजे पर पहूंची। “ये ले बिटिया, तेरी चिट्ठी, … Read more

 मेरा आसमान – नम्रता सरन”सोना

“छोड.. छोड़… छोड़ दे ना प्लीज़, देख , किसी की डायरी पढ़ना अच्छी बात नहीं है, चल दे अब, मेरी डायरी” साधिका ने बेटे आराध्य से अपनी डायरी झपटने का प्रयास किया। “वाह.. वाह… वाह हह, मॉम यू आर एन अमेजिंग राइटर, कितना सुंदर लिखतीं हैं आप, आपकी इन पोयम्स की तो बुक पब्लिश होना … Read more

उम्र कोई भी हो,,आत्मसम्मान के लिए स्वयं कदम बढ़ाना होता है –    नीतिका गुप्ता

आंटी जी, कुछ मदद कर दूं आपकी.. आंटी का दरवाजा खुला था और वह अपने हॉल में कुर्सियां और मेज जमा रही थीं। सूची ने सोचा शायद कुछ प्रोग्राम है इसीलिए आंटी सब कर रही हैं… पड़ोसी होने के नाते सूची ने सुमन जी से पूछा! “नहीं नहीं बेटा बस हो ही गया है,, बस … Read more

हमारे यहां लडकी वालों को देने दिलाने का रिवाज ना है –  कुमुद मोहन 

“ऐ मन्नो!तूने भाई की ससुराल वालों को अच्छी तरह बता दिया ना कि सास के वास्ते सोने की चीज जरूर आऐगी।और हां ये भी कहलवा दियो कि पतली फरचटी सी ना भेज दें कम से कम दो तोले की तो हो!” अपने दामाद की सोने की चेन और तेरे लिए हीरे के ना तो सोने … Read more

झूठा सच – बरखा शुक्ला

भाभी सब काम निपटा कर कॉफी ले आयी थी , समीर को भी रात में कॉफी पीना बहुत पसंद था , समीर की याद से नेहा के मन में एक कसक सी हुई । कॉफी का कप लेते हुए नेहा ने पूछा” छोटू सो गया ?” “हाँ तुम्हारे भईया ने सुलाया । मुझसे कहाँ सोता … Read more

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