कुछ वक्त मेरे लिए भी – मनप्रीत मखीजा

“सलोनी…उठो सलोनी…. सलोनी क्या हुआ तुम्हे!” विजय पिछले चंद मिनटों से अपनी पत्नी सलोनी को बेहोशी से बाहर लाने की कोशिश कर रहा है। सलोनी पर कोई असर न होता देख विजय ने डॉक्टर को फोन किया। चेकअप के बाद डॉक्टर ने विजय से बात की। “क्या उम्र है आपकी पत्नी की!” “जी…., यही कुछ … Read more

अजनबी – विजया डालमिया

अगर इश्क गुनाह है तो गुनाहगार है खुदा जिसने बनाया दिल किसी और पर आने के लिये। कुछ हादसे आवाज छीन लेते हैं ।इंसान चाह कर भी उन हादसों से बच नहीं सकता क्योंकि वह जिंदगी में ऐसी छाप छोड़ जाते हैं कि बदलाव आए बिना नहीं रहता। देखने को सब कुछ वही रहता है।पर … Read more

मेरा पहला मोबाइल – सुषमा यादव

बहुत साल पहले की बात है,मैं किसी काम से दो दिन के लिए दिल्ली गई थी, मेरी बेटी ने अपनी पहली तनख्वाह से मुझे एक प्यारा सा स्मार्टफोन गिफ्ट किया, मैंने उससे कहा कि ये मेरे पास है तो, मुझे तो ये चलाना भी नहीं आता, अरे मम्मी,ये तो छोटू मोबाइल है,आप इससे दीदी से … Read more

हाय रे घूंघटा…….  – डा उर्मिला सिन्हा

संस्मरण लिखना हो वह भी विवाह पर । फिर क्या एक से बढ़कर एक सुमधुर यादें पलकों में बोलने लगती हैं।हम कलमकारों को कहां से शुरू करूं और कहां अंत…..उलझन में डाल देती है। फिर भी….! मन के तहों में वर्षों से दबा स्मृतियों का पिटारा,हमारा अनमोल खजाना है।   यह उनदिनों की बात है जब … Read more

दोस्ती -एक अनमोल रिश्ता – मीनाक्षी सिंह

बात उन दिनों की हैं जब मैं 11वीं में पढ़ती थी !मेरी श्रद्धा नाम की एक खास  सहेली थी ! मैने बायोलोजी विषय ले रखा था और श्रद्धा ने गणित  ! वो जब भी अपनी गणित की क्लास के लिए गणित की लैब में जाती तो मुझे बहुत गुस्सा आता क्योंकी मुझे लगता कि  वो … Read more

ज़िंदगी मेरे घर आना – के . कामेश्वरी

प्रतिमा घर का पूरा काम ख़त्म करने के बाद बैठक में आँखें बंद कर अपनी थकान मिटाने के लिए बैठी थी । सुबह से काम करते -करते थक गई थी । अब जाकर घर ख़ाली हुआ था । ट्रिंग ट्रिंग !!!!!फ़ोन की घंटी से जैसे उसे होश आया । फ़ोन उठाकर कहा हेलो!!! उधर से … Read more

 एक चिट्ठी प्यार भरी – श्वेत कुमार सिन्हा

प्रिय पापा, सबसे पहले तो मुझे क्षमा करें मैने आपके लिए आदरणीय के स्थान पर प्रिय शब्द का इस्तेमाल किया। दरअसल कई बातें थी जिन्हे कहने के लिए मुझे इस चिट्ठी का सहारा लेना पड़ा। नहीं तो खुद कई बार आपके समक्ष आकर भी बोल पाने की हिम्मत न जुटा पाया।  सबसे पहले जो बात … Read more

नौजवान की दास्ताँ – बेला पुनीवाला

  जनकपुर नाम के एक छोटे से गाव में एक पति पत्नी रहते थे, पति का नाम श्यामल और पत्नी का सुशीला था। श्यामल खेतिबाड़ी संभालता था, सुशीला अपना घर संभालती थी, दोनो की शादी को 5 साल हो गए थे, लेकिन बच्चा नहीं हुआ था, फिर एक वैदजी की औषधि और कितनी मन्नतो  के बाद  … Read more

 परित्यक्ता  – मुकुन्द लाल 

उदय जिस घर मे ट्यूशन पढ़ाने जाता था, उस घर में परिवार से अलग-थलग एक युवती अक्सर दिखलाई पड़ती थी। उसने अनुमान लगाया कि हो न हो वह बच्चों की बुआ ही होगी। वह अपने काम से मतलब रखता था। पढ़ाने के बाद वह सीधे अपने डेरा के लिए प्रस्थान कर जाता था। ट्यूशन पढ़ाने … Read more

बेटियाँ परायी होती है बहू नहीं – रश्मि प्रकाश

सुबह सुबह घर के सारे काम खत्म कर एक कप चाय लेकर बैठी ही थी कि मौसमी का फोन आ गया। अब तो लंबी बातचीत होगी सोचती हुई वंदना चाय के घूंट के साथ साथ अपनी इकलौती चचेरी ननद से बतियाने लगी। पूरे ससुराल वालों में एक मौसमी ही थी जो वंदना से स्नेह भी … Read more

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