जंग जीत ली – रीटा मक्कड़

अनिता , उसके पतिदेव और बेटा तीनो में से कोई भी पूरी रात सो नही पाए थे।बेटी पूरी रात रो रो कर उन्हें फोन करती रही और आगे से उसकी आवाज़ सुन कर अनिता भी रोने लगती।पति और बेटा दोनो को समझा रहे थे ।लेकिन बिटिया जो हर मुश्किल घड़ी में सबसे ज्यादा मजबूती से … Read more

“प्लीज़ !मां-बाप के त्याग और प्यार को पैसों के तराजू में मत तौलो – कुमुद मोहन 

 “मां मुझे भी राहुल जैसा पेंसिल बाक्स चाहिए ये टीन वाला पेंसिल बाक्स देख कर सारे दोस्त मेरा मजाक उडाते हैं,कल अगर नया नहीं लाई तो मै स्कूल नहीं जाऊंगा”मनु ने मुँह बनाकर अपनी मां शीला से कहा!शीला लोगों के घर चौका बर्तन,झाड़ू पौंछा करती थी!मनु के पिता जीवन ड्राइवर थे! दोनों का सोचना था … Read more

बड़े भैया – नीरजा नामदेव

चार भाई बहन साकेत, निकेत और रिद्धि, सिद्धि हंसी खुशी अपने माता-पिता के साथ रहते थे।  साकेत और उनके भाई निकेत के बीच 8 वर्ष का अंतर था ।इसी प्रकार रिद्धि और सिद्धि उनसे बहुत छोटी थी। तीनो भाई बहन उन्हें बड़े भैया कहते थे। बचपन से ही साकेत अपने तीनों भाई बहनों पर जान … Read more

फ़र्ज़ का क़र्ज़ – प्रेम बजाज

सुरेश मोची का बेटा अभी अमित शादी को एक साल हुआ, ईश्वर ने चांद सा बेटा दिया, सब बहुत खुश हैं लेकिन अमित को चिंता सता रही है।  एक तो दादा जी ने ज़िद के कारण 20 साल की उम्र में शादी कर दी उसकी, उस पर पड़पोते का मुंह देखना चाहते हैं मरने  से … Read more

 माली  – नम्रता सरन “सोना”

औ …औ..औ … अरुंधती की आँख खुली तो किसी के ओकने की आवाज़ सुनकर यकायक विचार मस्तिष्क में कौंधा ..-क्या ये श्यामली को उल्टियां हो रही है.तत्काल ही बिस्तर छोड़ वो बाहर की ओर लपकी ..बाहर जाकर देखा तो श्यामली पौधों को पानी दे रही थी. क्यूँ रे श्यामली अभी तू उल्टी कर रही थी … Read more

इससे बड़ा भी त्याग हो सकता है क्या ? – सुषमा यादव

मेरे साथ मेरे पिता जी और श्वसुर दोनों रहते थे, मेरी एक बेटी दिल्ली में और दूसरी बड़ी बेटी पेरिस में,, बड़ी बेटी की शादी दिल्ली में तय हुई, मैंने महिला संगीत यहां अपने कार्य स्थल म, प्र, में किया और बेटी को लेकर दिल्ली चली गई,इन दोनों बुजुर्गों को लाने की जिम्मेदारी मैंने अपने … Read more

 मातृभूमि के लाल – आरती झा”आद्या”

सबका उत्साह देखते ही बन रहा था। एक दूसरे के साथ चुहलबाजी चल रही थी। छुट्टी तो घर के लिए सिर्फ सौरभ को मिली थी।  जब सही से दाढ़ी मूँछ भी नहीं आती है। माँ के आँचल में ही अपना आशियाना समझते हैं बच्चे, उस उम्र में पढ़ने की अदम्य लालसा होते हुए भी घर … Read more

“एक त्याग ऐसा भी” – कविता भड़ाना

पूरा हॉल खचाखच भरा हुआ था, शहर के बड़े बड़े लोगो के अलावा, मुख्य मंत्री जी बस किसी भी समय पहुंचने वाले ही थे।आज देश का नाम पूरे विश्व में रोशन करने वाली “रिया”का सम्मान किया जाएगा। बैडमिंटन में ” गोल्ड मेडल”लाने वाली रिया ने सबसे छोटी उम्र की खिलाड़ी का भी खिताब अपने नाम … Read more

 सूनी गोद – प्रियंका सक्सेना

दमयंती जी के घर में आज भागमभाग का माहौल है सुबह मुंह अंधेरे ही दोनों बेटे दोनों बहुओं को लेकर हॉस्पिटल जा चुके हैं। अरे!अरे… कुछ गलत मत समझ लीजिएगा, यह दोनों अपनी पत्नियों को किसी प्रॉब्लम की वजह से नहीं, अपितु उनकी डिलीवरी होने वाली है, इस वजह से हाॅस्पिटल ले कर गए हैं। … Read more

“माँ की करधनी” – विजय कुमारी मौर्य”विजय”

रामखिलावन का बड़ा सुन्दर परिवार था। कई सालों बाद माँ फूलमती  की मिन्नतों से…. एक बेटा जन्मा था। रामखिलावन की माँ  उसकी रात-दिन सेवा करती बस दूध पिलाने के लिए ही बहू जानकी  की गोद में देती थी….. पोते के सवा महीने का होने पर उसका नामकरण और गाँव में दावत रखी उस दिन फूलमती … Read more

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