चोर – देवेन्द्र कुमार

“राजन, जरा चावलों की थाली खिसका दो|” माँ ने राजन को पुकारा। राजन की मम्मी ने चावलों को हवा लगाने के लिए थाली में भरकर बाल्कनी में रख दिया था। राजन ने थाल खिसका दी। उसके पहुँचते ही थाली पर चूँ-चूँ करती चिड़ियाँ उड़ गईं। वे दो थीं। चावलों पर कुछ तिनके और नीला पंख … Read more

कुछ अनकही सी बातें –  टीना सुमन

कभी-कभी कुछ चीजें आपके बस में नहीं होती ,कोशिश करते हैं आप संवारने की ,मगर चीजें कुछ ज्यादा ही उलझ जाती है ,और आप हार मान लेते हैं ।शायद  मेनें  भी  हार  मान ली थी….. अलार्म बज -बज कर खुद ही सो चुका था ,इस बार अलार्म का काम मां की आवाज ने किया- ” … Read more

माँ ने सिखाया – रिंकी श्रीवास्तव

ये क्या बहु ..!! तुम बिना घूँघट  किये  बाहर से चली आ रही हो ,सारे मोहल्ले वाले देखेंगे  तो  क्या सोचेंगे  ,हमारी इज्जत का  जरा भी ख्याल नही है तुम्हे …!!  हमारे खानदान मे  बहुएँ   बिना  घूँघट  बाहर नही  निकलती   कितनी बार समझाया है तुम्हे  पर तुमने तो   सास  की बात न  … Read more

“पिया ,मोसे छल किए जाए” – सुधा जैन

 मैं एक नारी सब कुछ हारी  पर जीवन से ना हारी, सुनाती हूं अपने जीवन की दास्तान ….नाम नहीं लिखती ….कुछ भी कह सकते हो …।सलोनी… हां प्यारा सा नाम मेरा …अपने मम्मी पापा की लाडली बिटिया …मेरे बाद मेरी छोटी सी एक बहना और दो प्यारे से भाई…. मेरी मम्मी बहुत सहज ,सरल, प्यार … Read more

बहू का फर्ज तो बेटी का कर्तव्य कुछ नहीं – संगीता अग्रवाल 

” श्रेयश पापा को मेरी जरूरत है फिर यहां है क्या जिसका मोह हो तुम्हे !” मंजूषा अपने पति से बोली। ” तुम्हे जाना है तो जा सकती हो पर मैं नहीं जाऊंगा !” श्रेयश सपाट लहजे में बोला। ” श्रेयश मैने तुम्हारे मम्मी पापा की बीमारी में इतनी सेवा की यहां तक कि तुम्हारे … Read more

रिश्ता इंसानियत का – ममता गुप्ता 

अरे!! दीपा जी तुम्हे पता है या नही अपनी सोसायटी में जो कामवाली बाई सरला आती हैं ना… सुना है वह कोरोना पॉजिटिव है…..।। मैने तो जैसे ही सुना वैसे ही उसे काम पर से निकाल दिया..न जाने कितनो को बीमार करती…!बेचारी पता नही मरेगी या जियेगी आखिर उसको कोई अपना हैं भी तो नही…!! … Read more

पापा को भी एक साथी की जरूरत है – चाँदनी झा

ये कोई उम्र है शादी करने की, समाज क्या कहेगा? कितनी आसानी से आपने यह कह दिया। पर कौन देखनेवाला है, पापाजी को। यह समाज?? मिशा बोले जा रही थी। मिशा और अश्विनी बड़े शहरों में रहते थे, अश्विनी के पिताजी मुकुंदलालजी गांव के स्कूल में ही शिक्षक पद पर कार्यरत थे। तो उन्हें बाहर … Read more

बहुरानी चली लेखिका बनने ? – कुमुद मोहन

नैना दोपहर को सारा काम निपटा कर चाहती तो थी कि दो घड़ी कमर सीधी कर ले| पर फिर सोचा घंटे दो घंटे का ये टाइम अगर सोने में चला गया तो कहानी अधूरी रह जाएगी, बस चार दिन ही तो बचे हैं लास्ट डेट के? महिलाओं की एक प्रतिष्ठित मैगज़ीन में कहानी प्रतियोगिता के … Read more

समधी का आसन – मुकुन्द लाल

    विनायक अपने पुत्र सोनू के साथ अपनी भगनी की शादी में अपने जीजाजी के घर पहुंँचा था। अपनी पत्नी के अस्वस्थ रहने के कारण वह उसे नहीं ला सका था इस शादी के सामारोह में, किन्तु अपने इकलौते पुत्र की जिद्द के आगे उसे झुकना पड़ा, अंत में उसे अपनी यात्रा में शामिल कर लिया … Read more

देहदान- बीना अवस्थी

पाराशर जी के घर में मृत्यु सा सन्नाटा पसरा है, कभी कभी मिसेज पाराशर और बेटी प्रार्थना की सिसकियों की आवाज गूँज जाती है। आज राखी का पर्व है परन्तु उनके घर में तो खाना भी नहीं बना। सबकी ऑखों में पिछली राखी की स्मृतियॉ कौंध रही थीं। विपुल और प्रार्थना की मीठी नोंक झोक … Read more

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