खजाना – टीना सुमन

चाय नाश्ता लेकर बैठक की तरफ ही जा रही थी ,,तभी अंदर से आती हुई आवाज से कदम दरवाजे पर रुक गए ,,” “देख मंझली छोटी के तो कोई जमीन जायदाद को खाने वाला है नहीं ,एक बेटा था राहुल वह भी भरी जवानी एक्सीडेंट का शिकार हो गया ,अब क्या करेगी वह सासु मां … Read more

सूर्य का अहंकार ‘ – डा. सुनील शर्मा

सूर्य धरती के लिए ईश्वर का दिया हुआ अद्भुत वरदान है. सूर्य से ही पृथ्वी पर जीवन है. जीव, पेड़ पौधे सभी सूर्य से ऊर्जा लेते हैं. सूर्य का प्रकाश धरती पर दिन तथा रात का सृजन करता है. धरती सूर्य के गिर्द घूमती है तो रंग रंगीली छ: ऋतुओं का आगमन होता है. ऋतुओं … Read more

पंख होते तो ! – अंजू खरबंदा

आज फिर वही उदासी ! मेधा फ्लैट की बॉलकनी में आकर खड़ी हो गई । मंद मंद हवा उसके खुले बालों से अठखेलियां करने लगी ।  समीर को ये उसके बालों की ये अठखेलियां बेहद पसंद थी । वह कार ड्राईव करते हुए अक्सर खिड़की का शीशा खोल देता ताकि खुली हवा आकर मेधा के … Read more

“एक रिश्ता टूटा हुआ”  – भावना ठाकर ‘भावु’

ओस धुली अलसाई सुबह में विंड चाइम की मधुर घंटीयों की सरगम ने मेरी बोझिल पलकों पर दस्तक दी, कोहरे की भीनी खुशबू से सराबोर होते एक झोंका आया खिड़की खोलकर सूरज की पहली रश्मि के संग, हौले से टकोर दी कुछ कड़वी यादों भरी ढ़ेर सारी सुबह की और में चली गई अतीत की … Read more

लालच और अहंकार   – बेला पुनीवाला

 अनिकेत बहुत ही मेहनती लड़का था, अपने पापा के अचानक से चले जाने के बाद उसी ने ही अपने पापा का सारा बिज़नेस संँभाला था और साथ-साथ अपने पापा का कर्ज़ा भी चुका रहा था। मगर किस्मत हर बार साथ नहीं देती, जैसे कि अनिकेत के अच्छे खासे बिज़नेस में अचानक से बहुत बड़ा नुक्सान … Read more

उपर की कमाई – प्रेम बजाज

सोमेश पुलिस इंस्पेक्टर और रामलाल हवलदार है। सोमेश घमंड में रहता और कहता, “मैं अपने बेटे को अपने से बड़ा आफिसर बनाऊंगा, उसे बड़े इंग्लिश स्कूल में पढ़ाऊंगा, चाहे कितना भी पैसा खर्च क्यूं ना हो” इसलिए वो झूठे-सच्चे केस बना कर, इधर-उधर घपला करके उपर की कमाई करता। उस पर रौब भी झाड़ता मेरे … Read more

पितृपक्ष  – डाॅ संजु झा

  आजकल  पितृपक्ष चल रहा है।इस काल में लोग पितरों के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करतें हैं। पितृपक्ष  हर साल  भाद्र मास के शुक्लपक्ष  की पूर्णिमा  तिथि से प्रारंभ  होकर  आश्विन  मास की  अमावस्या तिथि को समाप्त  हो जाता है।हरेक व्यक्ति अपनी इच्छानुसार अपने  पितरों पर अपनी आस्था व्यक्त करतें हैं।इस प्रथा पर अनेक तरह … Read more

जब वक्त ने सिखाया सबक – किरन विश्वकर्मा

कियारा बार- बार मॉल में जैम की शीशी को उठा कर देख रही थी और रख दे रही थी फिर थोड़ी देर बाद वह शीशी उठाकर कृतिका से बोली…..मम्मा मैं यह जैम ले लूं……. आप मुझे टिफिन में हमेशा पराठा सब्जी देती हो…मेरा भी कभी कभी मन करता है कि चाची के बच्चों के जैसे … Read more

“अपमान का बदला कुछ यूँ लिया” – भावना ठाकर ‘भावु’

“मत डरो तम घिरी राहों के अंधेरों से, जब अंधेरा होता है तभी हम सितारों को देख पाते है”  कब कौनसी रात का अंधेरा, एक रोशन सितारा लेकर आएगा कोई नहीं जानता। उम्र के कौनसे पड़ाव में, कौनसी घटना हमारी ज़िंदगी का रुख़ मोड़ देगी कुछ नहीं कह सकते। संभावनाओं से भरी ज़िंदगी जब करवट … Read more

अंग्रेजी बोलने पर अहंकार क्यूं? – ऋतु गुप्ता 

“हिंदी और हम हिंदुस्तानी”  काफी समय हुआ हम चारों सहेलियों (सपना,चारू, ज्योति और मैं अनु )को मिले क्योंकि आज सभी अपनी अपनी गृहस्थी में मग्न हो गई हैं, किसी को अपने घर परिवार से  छुट्टी नहीं तो, किसी को नौकरी की चक चक से। यानि पूरी तरह हम लोग भूल चुके हैं कि हमारी भी … Read more

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