नम्बर 2 – रीटा मक्कड

आज अकेले बैठे हुए नीरजा फिर से अतीत की यादों में खो गयी थी ।उसे वो सब  बातें याद आने लगी जिन बातों ने कदम कदम पर उसके दिल को गहरे जख्म दिए थे। हालांकि देखने वालों को यही लगता था कि वो अपने घर संसार और अपने पति बच्चों के साथ बहुत खुशहाल जीवन … Read more

रहे ना रहे हम महका करेंगे …  – किरण केशरे

माला जी अपने बड़े से खूबसूरत आँगन में धूप में बैठी हुई,ख्यालों में खोई हुई थी… बेटे शांतनु का कनाडा से वीडियो कॉल कल ही आया था… बहुत सी बातें हुई, वह माला जी को बार बार कनाडा आने के लिए कह रहा था ,,,,बेटा शादी के बाद कंपनी के प्रोजेक्ट पर विदेश गया तो … Read more

 अहंकार काकी का –  मंजू तिवारी

जीजी पढ़ना लिखना बहुत अच्छी बात है सबको पढ़ना चाहिए लेकिन बेटों के लिए पढ़ाई लिखाई बहुत जरूरी होती है क्योंकि आगे चलकर उनको अपना जीविकोपार्जन करना होता है। अगर बेटियां ना पढे तो कोई फरक नहीं पड़ता क्योंकि उन्हें कौन सा अपना जीविकोपार्जन करना होता और उनके ऊपर कौन सा आर्थिक बोझ होता है … Read more

जिंदगी ना मिलेगी दोबारा – वर्षा शर्मा

सुबह चाय की चुस्कियों के साथ उगते हुए सूरज को देखना विक्रम  के साथ बैठना कितना अच्छा लगता था| एक आत्मिक शांति मिलती थी, लेकिन समय ही नहीं होता दोनों के पास| बस वह 15 मिनट चाय की चुस्कियां पर मिलने के बाद सीधे डिनर के टाइम ही मिलते थे| और अब तो विक्रम  का … Read more

“हार गया अहंकार” – कविता भड़ाना

“प्रिया” बहुत ही सुंदर, उच्च शिक्षा प्राप्त आधुनिक लड़की हैं।शादी हुए अभी साल भर ही हुआ है, परिवार में पति “राघव”के अलावा, सीधी सरल स्वभाव वाली सासु मां “सुजाता जी” ही है। राघव कल कंपनी के काम की वजह से 6 महीने के लिए दुबई जाने वाला है। कल रात की फ्लाइट है, जाने से … Read more

परिवार की ताक़त – डॉ. पारुल अग्रवाल

दिव्या की कुछ दोस्त उसके घर पर पार्टी के लिए आमंत्रित थी। सब उसके यहां आकर उसके घर, फर्नीचर और उसकी शानोशौकत की बहुत तारीफ कर रही थी, साथ-साथ उन्हें मन ही मन दिव्या से जलन भी हो रही थी। उनको लग रहा था कि वो लोग तो बस घर के कामों में लगी रह … Read more

प्रणय अपहरण  – रवीन्द्र कान्त त्यागी

आजकल न जाने क्यूँ बचपन की यादों के गुब्बारे रह रहकर दिमाग में फट रहे हैं। कहते तो ये हैं कि  इंसान के आखिरी समय में ऐसा होता है मगर, तुरंत तो ऐसा एहसास नहीं हो रहा है। बात पचास साल से भी अधिक पुरानी है। बचपन में हम जोधपुर में रहते थे। हमारा मकान … Read more

 बदलता वक़्त – ममता गुप्ता

हे भगवान फिर से बेटी ही पैदा हुई हैं …?  कर्म फुट गए मेरी देवरानी नीता के तो पहले से ही एक बेटी हैं , अब एक औऱ हो गई …!!  न जाने कैसे दो दो लड़कियों का बोझ उठा पाएगी बेचारी…!! गर भगवान की कृपा से एक बेटा हो जाता तो इसका जीवन सुख … Read more

गोरे रंग पे ना इतना गुमान कर – रत्ना साहू

सौम्या! हां सौम्या नाम था उसका| लंबी छरहरी एकदम गोरी-चिट्टी कमर तक सिल्की बाल तीखे नैन नक्श जो कोई एक बार उसे देखता, देखता ही रह जाता। लेकिन उसका बस नाम ही सौम्या था बाकि बोली और स्वभाव में जरा भी सौम्यता नहीं थी। तीन भाई बहनों में सबसे छोटी थी पिता बड़े बिजनेसमैन थे … Read more

वक्त किसी के लिये रुकता नहीं.  –  संगीता त्रिपाठी 

दर्पण के सामने बैठी मीरा, बालों में झलकती सफेदी और चेहरे की गहरी लकीरें देख हतप्रभ थी। क्या ये वही मीरा है जिसके रूप सौंदर्य पर कॉलेज के सहपाठी दीवाने हुआ करते थे।इसी रूप ने तो कॉलेज का सबसे होनहार छात्र सुयश को अपने मोहपाश में बांध लिया था।अपने जिन लंबे केश और गहरी बड़ी … Read more

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