और अहम पिघल गया – लतिका श्रीवास्तव 

..”मैं इस हॉस्पिटल का चीफ सर्जन भी हूं और बेस्ट सर्जन भी हूं…..मेरे कारण ही इसकी साख है लोकप्रियता है…..मेरा नाम सुनकर ही लोग यहां आते हैं…..मेरे बिना इसका कोई अस्तित्व नहीं है और आप सभी का भी …. लोग सिर्फ और सिर्फ मुझसे ही सर्जरी करवाने आते हैं….”डॉक्टर विक्रम बोलते बोलते सांस लेने के … Read more

मेरी बेटियां ही मेरा अहंकार है – गीतू महाजन

  दांत के दर्द से परेशान सुषमा जी आज भी डेंटिस्ट के पास आई हुई थीं। डॉक्टर ने उन्हें तीन से  चार सिटिंगस लेने के लिए बोला था। आज उनका तीसरा दिन था। आराम तो पहले से काफी था उन्हें पर अभी एक दिन और आना था। ड्राइवर ही उन्हें ले आता था। आज भी … Read more

 अहंकार – विनोद प्रसाद

कौशल कुमार जी भारतीय रेल सेवा में अधिकारी पद पर कार्यरत थे। उनके हर क्रिया-कलाप में अधिकारीपन की बू आती थी। अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ उनका व्यवहार रूखा रहता था। उन्हें लगता था कि रौब और भय के द्वारा ही कर्मचारियों से काम लिया जा सकता है।  उनके इस व्यवहार से अधीनस्थ कर्मचारियों में हमेशा … Read more

कठपुतली – मंगला श्रीवास्तव

सीमा अपने फ्लेट की गैलरी में बैठी सकूँन से चाय पी रही थी। आज वह *आजाद* हो गई थी  एक कठपुतली नुमा जिंदगी से। वह शादी के बाद बहुत खुश थी वह अच्छे प्यार करने वाले सास ससुर ,सुंदर उच्चपद आसीन पति राजीव को पाकर। पर कुछ दिनों बाद ही उसकी खुशी काफूर हो गई … Read more

ढोलना” – डॉ .अनुपमा श्रीवास्तवा

 सीधे सरल और सहृदय थे हमारे गांव के शिक्षक बाबु साहब जिन्हें हर कोई मास्टर जी के नाम से संबोधित करता था। शायद ही कोई गाँव का बच्चा होगा जो उनसे अच्छी शिक्षा नहीं लिया होगा। बच्चे बुढ़े सभी उनका आदर करते थे।  मास्टर जी को गुजरे दो साल हो चुके थे। पिछले साल जैसे … Read more

उम्मीद की किरण: लेडी सिंघम किरण सेठी

लिंग-भेद हमारे समाज का एक ऐसा चलन है,जो इस 21वी सदी में भी समाप्त नहीं हो रहा, आज भी लड़कियों पर कई तरह की पाबंदियां  लगाई जाती हैं। उनको घर से शाम ढलते ही कहीं जाना हो तो बोला जाता है कि अकेले मत जाओ,पापा या भाई में से किसी को साथ लेकर जाओ। अब … Read more

 बहू ये तुम्हारा ससुराल है ,मायका नहीं – सविता गोयल

आज नन्दिता  के घर नई- नवेली बहू आने वाली थी । नन्दिता  बहुत खुश थी। भाग भागकर बेटे- बहू के गृह प्रवेश की तैयारी कर रही थी। सारी तैयारी हो गई थी फिर भी उसका मन बेचैन था कि कहीं कोई कमी ना रह जाए।  दरवाजे पर टकटकी लगाए खड़ी थी। इस शुभ अवसर पर … Read more

भगवान का इशारा – सपना गोयल

पलाश को आफिस भेजकर कामना अपनी पूजा पाठ में लग गयी वैसे भी पलाश के जाने से पहले वह पूजा के लिए समय नहीं निकाल पाती थी….उसका लंच.. नाश्ता नहाना धोना इसी में आठ बज जाते थे खैर वो जैसे ही पूजा करके उठी उसे अपने मोबाइल पर रिंग बजती सुनाई दी….उसने फटाफट पूजा पर … Read more

 दर्द भरी आह !” – -गोमती सिंह

-जनवरी का महीना था सुबह के लगभग 6 बज रहे थे , यानि कि एकदम कंपकपाती ठंडी का मौसम।  लेकिन मौसम चाहे जैसा भी हो दैनिक जागरण तो निर्धारित समयानुसार हो ही जाता है।          नीलम भी काॅलेज जाने की फिक्र में बिस्तर छोड़कर मेन गेट के पास सूर्योदय का आनंद ले रही थी । … Read more

“बहु है ना फिक्र किस बात की” – मनदीप

सभी पाठकों को मेरा नमस्कार आशा करती हूं कि आप सभी अच्छे होंगे। तनु अरी ओ तनु, कहां रह गयी ये मेरी तो एक नही सुनती …… जी मम्मी जी , मैं बस अभी आ ही रही थी वो गोलू ने नल खोलकर अपने कपड़े भिगो लिए…. अभी आपके लिए चाय बनाकर लाती हूँ। ये … Read more

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