परमेश्वर तो दूर पति बन जाओ वही बहुत है – सोनिया निशांत कुशवाहा 

चटाख! राकेश  के मारे हुए चांटे की गूंज अभी भी गूँज रही थी कानों में! बात सिर्फ एक थप्पड़ की नहीं थी , बात सिर्फ शरीर पर लगने वाली चोट की नहीं थी मन घायल हो गया था। आत्मा धिक्कार रही थी कि ऐसे आदमी को ईश्वर समझ कर आज तक मैं व्रत पूजन करती … Read more

पुरुष जीवन – कमलेश राणा

हमारा समाज पितृसत्तात्मक समाज है,,जिसमें पुरुष की भूमिका अहम होती है,,उसके निर्णय सर्वमान्य होते हैं,,अत: घर चलाने की जिम्मेदारी भी उसी की होती है,, निखिल की दिली ख्वाहिश थी कि उसका विवाह कामकाजी लड़की से हो,,ताकि मंहगाई के इस दौर में गृहस्थी का खर्च चलाना आसान हो जाये,,जब स्वाति का रिश्ता आया तो उसने खुशी-खुशी … Read more

इतना घमण्ड!!! – ज्योति अप्रतिम 

आज जब उस शहर से गुजरना हुआ तो सहसा नज़र उस मकान पर चली ही गई  जहाँ पर अब केवल बर्बादी के निशां बाकी रह गए थे। वह कार जिसमें बैठे बिना ही रीमा और रमेश की बेइज्जती की गई थी आज जंग खा कर खटारा बन कर खण्डहर हुए गैराज में पड़ी थी। उस … Read more

भला सास बिना भी कोई ससुराल कहलाता है  – मनप्रीत मखीजा

“पापा जी, आपके लिए चाय बना दूँ!” “हअ……, नहीं अभी नहीं| “ “पर पापा जी, शाम के छह बजे हैं| आप और मम्मी जी तो साढ़े चार पर ही चाय पी लेते थे?” “मेरा चाय का मन नहीं है बहू, मैं थोड़ा टीवी देख लेता हूँ|” टीवी तो सुबह से ही चल रहा था, मगर … Read more

मेरी बेटी की किस्मत ससुराल मायके दोनों तरफ से अच्छी है  – कृति मेहरोत्रा

” उनका घर बिजनेस सब चला गया , उसमें घाटा हो गया तो इसमें मेरी बेटी का क्या दोष जो लोग उस पर दोषारोपण कर रहे हैं । ये सब उनकी सोची समझी चाल है उन्होंने शादी करने के लिए झूठ बोला अब दोष मेरी बेटी को दिया जा रहा है ” मंजुला देवी तड़पते … Read more

यह आजकल की छोरियां – टीना सुमन

“सुना भागवान तुमने, तुम्हारा बेटा क्या कह रहा है, अपनी मर्जी से शादी करेगा, पढ़ी-लिखी नौकरी वाली बहू लाएगा, तुम्हें नहीं पता आजकल की छोरियां, शर्म हया तो इनमें होती ही नहीं है, इस पर ना बड़ों का आदर सत्कार है, ना कुछ घर का काम काज है, दिन भर बस अंग्रेजी में पटर-पटर | … Read more

डांट – विनय कुमार मिश्रा

दरवाजा खोला तो पड़ोस का प्रमोद घबराया हुआ था। रात के करीब डेढ़ बजे होंगे। “क्या बात है प्रमोद?” “भैया कुछो समझे में नहीं आ रहा है, बाबुजी को सीने में बहुत दर्द है,सांस भी नहीं ले पा रहे हैं, छटपटा रहे हैं, थोड़ा चलकर देख लीजिए ना, कुछो दवाई दे देते तो” “हां हम … Read more

 तलाक – गुरविंदर टूटेजा

अप्रकाशित    अनय व रूही दोनोें बच्चें सहमें हुये एक तरफ खड़ें थे…उधर नमन व रचना दोनों एक-दूजे पर इल्ज़ाम लगा रहें थे नमन कह रहा था तुम कमाती हो इसका मतलब ये नहीं कि तुम घर पर कुछ करोगी ही नहीं…बच्चों का ध्यान रखना तुम्हारा फर्ज है…मम्मी का नहीं..!!!!  रचना बोली…सही है ना तुम काम … Read more

 साडी कैसी लग रही है? – उषा भारद्वाज

 क्या हुआ बहू ? – सावित्री  ने अपनी जगह पर बैठे- बैठे अपनी बहू रितु की तेज आवाज सुनकर पूछा ।   कुछ नहीं मां – प्रकाश उनके बेटे ने अपने रूम से जवाब दे दिया।  सावित्री चुप होकर बैठ गई । थोड़ी देर बाद अक्कू के रोने की आवाज सुनाई पड़ी ।  क्या हुआ बेटा … Read more

अहंकार – अनामिका मिश्रा

शहर में एक मंदिर था। वहां रोज शाम को भजन कीर्तन हुआ करता था। सभी आसपास की महिलाएं जमा होती थी और मंदिर में भजन-कीर्तन किया करती थी। उसी मंदिर में एक गरीब पुजारिन रहती थी,पूजा पाठ किया करती थी मंदिर के भरोसे ही उसका गुजारा चल रहा था। दिन-रात मंदिर में ही सेवा करती … Read more

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