सबसे बड़ा धोखा- सांसें – संजय अग्रवाल

सांसे थमने वाली हैं। अटक अटक कर आ रही है, गले से घर्र घर्र की आवाज निकल रही है। आंखों के कोर से आंसू धीमे धीमे बह रहे हैं। चैतन्य तो हूँ मगर इतनी भी नही की जो से आवाज देकर किसी को बुला सकूँ। और सुनेगा भी कौन? यहां है ही कौन? सालो से … Read more

संतान पालो पर उम्मीद मत पालों – डॉ. पारुल अग्रवाल

राजेंद्र जी और मनोहर जी बहुत अच्छे दोस्त थे। बचपन से लेकर जवानी तक का साथ रहा। अब उम्र के सांध्य काल में भी एक-दूसरे से गहरी बनती थी। मनोहर जी कई दिन से महसूस कर रहे थे कि राजेंद्र जी बहुत गुमसुम से हैं।दो तीन तक तो उन्होंने सोचा कि राजेंद्र जी खुद ही … Read more

दहलीज पार करा दो-  भाग-2 – रीमा ठाकुर

अन्नू दरवाजे तक पहुंची ही थी की आभा की धीमी सी आवाज सुनायीं दी” संजय प्लीज गोलियों का असर है, नींद आ रही है सोने दो!  ये रोज रोज के नखरे मेरी समझ से बाहर है, दुनिया में और भी औरते है तुम कोई अकेली नही हो,  संजय ने शायद आभा को झिडक दिया था!  … Read more

रजस्वला – स्मिता सिंह चौहान

क्या सुमि हर तरफ सामान बिखरा पड़ा है तुम्हारा।कम.से कम.समेट तो लिया करो।”राहुल ने सुमि के बैड से कपड़े उठाते हुए कहा। “कर लूंगी यार ,अभी कुछ मत बोलो।अभी पेट में बहुत जोर से दर्द हो रहा है।”कहते हुए सुमि पेट को कसकर पकड़ते हुये लेट गयी। “अब ये तो तुम्हारा हर महीने का है।पहले … Read more

परवरिश – स्मिता सिंह चौहान

अरे,जैसा अपने मायके से सीखकर आयी होती है ।वैसा ही तो ससुराल में करेंगी।”कहते हुए मिसेज शर्मा ने ,मिसेज गुप्ता को देखा। “सुरभि जरा समोसे और तलकर ले आना।”अपनी ठोडी को अकड़ वाले अंदाज में ऊपर करते हुए किचन की तरफ देखकर बोली। मिसेज शर्मा ने आज अपनी कुछ दोस्तों को चाय पर बुलाया था।अब … Read more

उपहार – संजय मृदुल

सुनो जी! इस दीवाली पर दूज के दिन भैया का जन्मदिन भी है कुछ अच्छा लेना है उनके लिए। अनु ने विनय से कहा। क्यों? पीछे से निलय की आवाज आई। क्यों गिफ्ट लेना है उनके लिए। साल में तीन बार तो ऐसे भी देते ही हो गिफ्ट। बदले में वो क्या देते हैं हम … Read more

जिंदगी गुलज़ार है – सुषमा यादव

***करोना बना वरदान**** ,,  ये जिंदगी मिलेगी ना दोबारा, मैं इसे खोना नहीं चाहती मैं इसे जीना चाहती हूं जी भर कर जीना चाहती हूं * क्यों कि,,,, *ये जिंदगी मिलेगी ना दोबारा *** ,, ज़िंदा दिल ही तो जीते हैं,, मुर्दा दिल क्या ख़ाक जीतें हैं ,,,   पिछले करोना काल में मैं भी … Read more

उपहार – संजय मृदुल

सुनो जी! इस दीवाली पर दूज के दिन भैया का जन्मदिन भी है कुछ अच्छा लेना है उनके लिए। अनु ने विनय से कहा। क्यों? पीछे से निलय की आवाज आई। क्यों गिफ्ट लेना है उनके लिए। साल में तीन बार तो ऐसे भी देते ही हो गिफ्ट। बदले में वो क्या देते हैं हम … Read more

“खुशी का मानक ” – उषा भारद्वाज

   उनके चेहरे पर बहुत तनाव था ।वो अस्पताल में लेबर रूम के सामने बार बार इधर उधर घूम रहीं थीं । कितनी बार सरिता ने कहा मम्मी बेड चाहिए लेकिन हर बार उनका एक ही उत्तर रहता कि” अभी नहीं, मुझे बेचैनी हो रही है ,जब तक कि सब ठीक-ठाक मुझे पता चल जाए, और … Read more

दुलारी सिम्मी – माता प्रसाद दुबे

नन्ही सी बच्ची को गोद मे लिए सिम्मी एक कोने मे चुपचाप बैठी अपने अतीत के बारे मे सोच रही थी।”क्या ये वही घर है..वही लोग है..जहा वह सबकी आंख का तारा थी..वह उदास होती थी तो पूरा घर परेशान हो जाता था..वह हंसती थी तो सभी खिल-खिलाकर हंसते थे..पर आज उसके पास न कोई … Read more

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