“अपनो से धोखा ” – कविता भड़ाना

  धोखा आपको कब ,कौन और कहां दे जाए,..कुछ नहीं पता होता।…परायो से मिले धोखे को इंसान एक बार सहन भी कर लेता है पर धोखा देने वाला जब अपना कोई हो तो बड़ा असहनीय हो जाता है।  आज मैं एक सच्ची घटना को कहानी के रूप में आप सबके सामने प्रस्तुत कर रही हूं … Read more

धोखा – कुमुद चतुर्वेदी

        “सुनो आज फिर हॉस्पिटल से फोन आया था “पति मुकेश के मुँह से यह सुन चंदा पूरी बात सुने बिना ही बोल पड़ी”ऐँ फिर से,तो तुमने क्या कहा?”मुकेश गहरी साँस लेकर बोला”क्या कहता?चुपचाप सुनता रहा और वही फिर से कह दिया कि अभी घर पर मैं अकेला ही हूँ कृपया कुछ समय की मोहलत … Read more

बहू, बहू रहे और बेटी, बेटी तो ही अच्छा  –  संगीता अग्रवाल 

“देखिए बहनजी हमारी बेटी बहुत लाडली है बस हम तो यही चाहते हैं ये जिस भी घर जाए वहां इसे बेटी बना कर रखा जाए!” सीमा को देखने आए लड़के की मां अनीता जी से शांति जी बोली। “देखिए शांति जी हमे सीमा बहुत पसंद है हम इसे अपने घर की बहू बनाना चाहते हैं … Read more

पापा का वादा – डा. चंद्रकान्ता वर्मा

रोली एक साधारण परिवार में पली बड़ी पर उसके सपनें बड़े बड़े थे। चार बहन दो भाई थे किसी से पटती नहीं थी थोडा देखनें में अच्छी थी रंग साफ था।मां भी हमेशा कहतीं ये बेटी तो राजकुमारी है फटा फट कोई राजकुमार इसे ले जायेगा, और इस तरह बचपन से ही उसके मन में … Read more

एक धोखा ऐसा भी..!! – प्रियंका मुदगिल

“इतना बड़ा धोखा … मैं तुम जैसी काली कलूटी लड़की के साथ अपनी जिंदगी बिताने की कल्पना भी नहीं कर सकता …..अभी मुझसे दूर हो जाओ”” रजत ने चिल्लाकर अपनी पत्नी नेहा से कहा। सुहागरात की सेज पर बैठी हुई नेहा, रजत की यह बात सुनकर रोने लगी ।सुबकते हुए उसने कहा, “”रजत जी! किस … Read more

फर्क –  ऋतु अग्रवाल

  सूरज अपनी ढलान पर था। शाम का धुँधलका गहराने लगा। एक जोरदार अंगड़ाई लेकर गायत्री झटके से उठी। एक स्मित सी मुस्कान उसके अधरों पर तैर गई। आज सत्येंद्र नाराज होकर शोरूम गए थे।वही पुरानी बहस, गायत्री बच्चा गोद लेना चाहती थी पर सत्येंद्र को यह ना मंजूर था। कमी गायत्री में ही थी। परिवार … Read more

 धोखा – मधु शुक्ला

पण्डित जी ने  कृष्णकांत जी को उनकी बेटी के लिए जो रिश्ता सुझाया था। वह उन्हें ठीक लगा इसलिए उन्होंने हामी भर दी। शुभ मुहूर्त में बातें तय हुईं। वर पक्ष की एक ही माँग थी। वो यह कि “उन्होंने अपनी बेटी के  विवाह के लिए जो धन राशि सोची है। वह तिलक में दे … Read more

पानी – स्नेहज्योति

पानीबूँद-बूँद से बनता हूँरिश्तों सा निखरता हूँखुले आसमाँ से जबख्वाहिश बन बरसता हूँतो बंजर पड़े अरमानो कोपलभर में गुलजार कर देता हूँसबके चेहरे पर एक उत्साहभीनी सी मुस्कुराहट छोड़ देता हूँमैं पानी हूँ सबसे जुड़ी कहानी हूँजो कल था आज हूँपर कल किसके पास हूँना तेरा हूँ ना उसका हूँसबका कतरा-कतरा हूँआम सही पर ख़ास … Read more

भाई की शादी के लिए मोटी पार्टी फसाई है – मंजू तिवारी

   अरे कोई तो बचाओ,,,, यह आदमी मुझे बिल्कुल मारे डाल रहा है,,, पीटती पीटती प्रतीक्षा लहूलुहान हो चुकी थी,,, कमरे से मारता हुआ पति उसे दरवाजे के बाहर पटक के झाड़ू से मार रहा था झाड़ू और डंडे टूटते जा रहे थे प्रतीक्षा गांव में सभी से कहती इसने मेरा फोन तोड़ दिया है कोई … Read more

चल उड़ जा रे हंसा – उषा भारद्वाज

  आज ताई की तेरहवीं है।  तेरह ब्राह्मण भोजन के लिए बैठे थे । तभी किसी ने कहा आज तो पूरा भोजन ताई की पसंद का बना होगा क्योंकि कहते हैं कि मरने वाले की पसंद का भोजन ब्राह्मणों को खिलाने से  अप्रत्यक्ष रूप से दिवंगत आत्मा को मिल जाता है।       मैं भी वही पास में … Read more

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