दिल के बहुत क़रीब हो तुम – सुषमा यादव

जिंदगी में कुछ ऐसे भी प्यारे रिश्ते बन जाते हैं,जो ख़ून के रिश्तों से कहीं ज्यादा आपके जीवन में महत्वपूर्ण हो जाते हैं,, उनकी बराबरी कोई अन्य सगे रिश्तेदार नहीं कर सकते हैं,, उनके प्रेम के आगे हम सदैव नतमस्तक रहते हैं,,उनकी मेहरबानियां हम ताजिंदगी नहीं भुला सकते,, ऐसा ही एक बहुत ही प्यारा दिल … Read more

स्वाभिमानी – बरखा दुबे शुक्ला 

“मम्मी आपका लाड़ला बेटा शादी के लिए माना कि नही ,मेरी जेठानी को क्या जवाब दूँ , वो उसके लिए अपनी भतीजी के लिए बोल रही है ।”लीना ने पूछा । “बेटा मैं तो समझा – समझा कर हार गई ,पर उसे तो बस सीमा से ही शादी करनी है ।”लीना की मम्मी बोली । … Read more

मम्मी जी ,मैं घूंघट नही हटाऊँगी  – रिंकी श्रीवास्तव

सुनो बड़ी बहु , मालति मामी का फोन  आया है ,अगले हफ्ते उनकी  बहु  की  गोदभराई की रस्म है ,तो हम सभी को बुलाया है ,कह रही थी कि भतीजे की शादी के बाद से आप आयी नही ,इस बार सबको आना है ,सुनीता जी बोली | अगले हफ्ते !पर मम्मी जी अगले हफ्ते तो … Read more

भगवान का दूसरा रूप – डॉ. पारुल अग्रवाल

आज रागिनी के बेटी खुशी 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद बैंगलोर हॉस्टल में रहने जा रही थी। आज पहली बार वो घर से बाहर की दुनिया में कदम रख रही थी।आजकल वैसे भी सबके एक या दो बच्चें होते हैं जिनको बहुत ही नाज़ो से पाला जाता है। रागिनी खुश थी,कि बेटी का … Read more

“पापा! – विनय कुमार मिश्रा

 दूसरी नयी साइकिल दिला दो ना” मैं समझ सकता हूँ। साइकिल थोड़ी पुरानी हो गई है। इसी से स्कूल और ट्यूशन जाता है। बेटा बोल रहा था बार बार चेन उतर जाता है इसका।पर अभी नई दिला पाना थोड़ा मुश्किल है। बेटे को लेकर साइकिल दुकान उसे ठीक कराने गया। साइकिल दे हम वहीं बैठे … Read more

सार्थक बुढ़ापा –     डॉ अंजना गर्ग

शांति पति की मृत्यु के बाद बेटे बहू के साथ महानगर में आ गई। जीवन एकदम बदल गया था। पति का साथ तो छूटा ही,साथ ही 40 साल की जमी जमाई गृहस्थी और घर भी छूट गया। साथ ही छूट गया अड़ोस पड़ोस और सहेलियां भी जो  हर दुख सुख में साथ रहती थी। यहां … Read more

सही फैसला –  डॉ अंजना गर्ग

इंदु और बिंदु गांव से रोज शहर पढ़ने आती थी दोनों ही निम्न मध्यम परिवार से थी। परंतु घरवाले किसी भी तरीके से उनको शहर मे पढ़ा रहे थे ।कॉलेज से एक ट्रिप नैनीताल जा रहा था इंदु और बिंदु भी उसमें जाना चाहती थी परंतु दोनों के माता पिता ने कहा कि कॉलेज तक … Read more

हृदयेश्वरी: – मुकेश कुमार (अनजान लेखक)

तुम जाओगे न तब मुझे बहुत अखरेगा, बहुत ख़ालीपन महसूस करूँगी। लेकिन तुम जाओ, तुमने बहुत दिन से इस दिन का इंतज़ार किया है। योगेश के जाने से एक दिन पहले दोनों बात कर रहे थे। दोनों कोसों दूर हैं एक दूसरे से पर हर दिन दो-चार बार बात हो ही जाती है। प्रेम का … Read more

शक्ति का रूप – मंजू तिवारी

मैं नवरात्रि में श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ करती हूं तो मेरे मन में पाठ में जो भी वर्णन है। उसके चित्र से उभरते  हैं। किस प्रकार माता रानी ने राक्षसों का वध किया। पृथ्वी को राक्षसों से बचाया ।अनेक राक्षसों का वध ब्रह्मा विष्णु महेश तथा देवता भी करने में असमर्थ थे ।उन राक्षसों … Read more

दो मीठे बोल! – प्रियंका सक्सेना

“मामू, बहुत दिनों बाद चक्कर लगा यहां का?” फेरी वाले अनवर की आवाज़ सुनकर लपककर घर से बाहर आई गुंजन “हां, बिटिया। अपने गाॅ॑व गए रहे हम, इस बार ज्यादा वक्त लग गया।” फेरी वाले अनवर  ने अपनी पेशानी पर झलकते पसीने को गमछे से पोंछने हुए कहा उसे फिक्र नहीं थी कि किस्मत की … Read more

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