‘ अपनों ने ठोकर मारी तो गैरों ने गले लगाया ‘ – विभा गुप्ता 

 मंच पर संचालक महोदय ने जब पचहत्तर वर्षीय देवकीनन्दन मिश्रा जी का नाम पुकारा तो पूरा हाॅल तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा।उन्हें ‘बेस्ट टीचर ऑफ़ द इयर ‘ के सम्मान से नवाज़ा जा रहा था।           ये सम्मान उन्हें लम्बे समय तक शिक्षण कार्य करते रहने के लिए नहीं बल्कि सेवानिवृत्त होने के पश्चात दस … Read more

अपना वही जो सही राह दिखाए –  राशि रस्तोगी 

“मुझे कोई पसंद नहीं करता ना घर में ना स्कूल में काली आयी काली आयी ये सुनकर मेरा मन भर आता है” रोते हुए शैलजा ने अपनी स्कूल की टीचर शशि जी से कहा। आइये पढ़ते है शैलजा की कहानी। शैलजा,13 साल की स्कूल में पढ़ने वाली लड़की है। उसका जन्म एक मध्यम वर्ग के … Read more

खाली गिलास -कहानी-देवेंद्र कुमार

सवेरे का समय था, बलवान चाय वाले की दूकान पर काफी भीड़ थी रोज की तरह। वहीँ काम करता था रमुआ। उसका काम था जूठे गिलास धोना, टेबल पर कपडा मारते रहना और आस पास की दुकानों में चाय दे कर आना। उसका कोई नहीं था इसलिये बलवान को ही बापू कहता था। वैसे बलवान … Read more

अपने -पराये की परिभाषा – संगीता त्रिपाठी

   “जिंदगी के मेले में             कौन अपना और कौन पराया             जिसने जाना, वो सिकंदर कहलाया “     वो फकीर तो तन्मय हो गाता चला जा रहा था, पर मेरे दिल में अनेक प्रश्न उभर आये। सच है कौन अपना और कौन पराया, जीवन भर हम इसी में उलझें रहते। खून के रिश्ते ही अपने होते है, … Read more

” गहन चिकित्सा कक्ष ” – डॉ. सुनील शर्मा

अचानक किसी के कराहने की आवाज़ सुनकर होश आया. नर्स दौड़ कर आई और मेरे पैरामीटर्स चैक करने लगी. बुखार नहीं था, भी पी भी ठीक था. नर्स ने ही बताया कि दो दिन पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में रखने के बाद आज ही गहन चिकित्सा कक्ष में शिफ्ट किया है.सीने पर मॉनिटर के एलैक्ट्रोड चिपके … Read more

पड़ोसी पराए नहीं,, अपने ही तो होते हैं! – मंजू तिवारी

आज  के समय में लोग ज्यादातर घर परिवार से दूर रह रहे होते हैं तो बस एक पड़ोसी ही ऐसे होते हैं जो हमारे सबसे पास और हमारी हर विपत्ति में मदद कर सकते हैं। बात लगभग 6साल पहले की है। जब प्रिया के पति के सीने में अचानक से दर्द उठ गया कोलेस्ट्रॉल की … Read more

अकेलापन “मेरा रहबर ” – कृष्णा विवेक

कविता ••• कविता •••• “अरे निशांत तुमने देखा क्या वो कविता ही थी ना !!! “ शालिनी ने निशांत से कहा। निशांत को भी आश्चर्य था वो कविता ही लग रही हमारी आँखे अपनी दोस्त को पहचानने में धोखा नहीं खा सकती  चलो पीछा करते हैं। निशांत और शालिनी मॉल की पार्किंग से जल्दी अपनी … Read more

स्नेह बंधन – पायल माहेश्वरी

” कितनी सुन्दर और सुहानी सुबह हैं,हवा में कितनी ताजगी हैं, पहाड़ो पर गिरती बर्फ काँच की तरह साफ और चमकदार लगती हैं महानगर के दौड़ते-भागते जीवन में अब ऐसे सुकून के पल कहा मिलते हैं ” सीमा अपने पति नयन से बोली । ” बिलकुल सही कहा तुमने सीमा इसी नैसर्गिक सौन्दर्य-दर्शन के लिए … Read more

” भूखिन ” – गोमती सिंह

 दिसंबर का महीना था।  सुबह के 7 बज चुके थे, आज भूखिन को सुबह उठने में देर हो गई थी।  वह जल्दी जल्दी बर्तन धो रही थी।  भूखिन को उस घर में काम करते हुए लगभग 25 वर्ष हो गये थे । उस घर में कितने गिलास कितने चम्मच यथा कितने कटोरियां आदि रोजमर्रा में … Read more

अपने तो अपने होते हैं –   गरिमा जैन

विमला, बिन्नू आंटी कितनी अच्छी है जैसे ही मैं उनके घर जाती हूं झट से मेरे लिए टीवी ऑन कर देती हैं और एक मां है जब भी टीवी देखने बैठो बस पढ़ाई करो का रोना लेकर बैठ जाती हैं ।होमवर्क किया कि नहीं? टेस्ट की तैयारी कैसी चल रही है? काश बिन्नु आंटी मेरी … Read more

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