चंडी – अनुज सारस्वत

****** “देख बेटा खाने पीने का ध्यान रखना वो पीले बैग को अपने पास रखना उसी में खाना पीना 9 घंटे की फ्लाइट है लंदन की।चेक इन अच्छे से कराना।बाकी चार भी है इसमें सो जाना ओढ़कर।” 18 वर्षीय स्वाति को एयरपोर्ट के गेट पर उसकी मम्मी गायत्री अपने अंदर के सैलाब को दबाते हुए … Read more

तेरे मायके से मेरे बच्चें हमेशा दुबले होकर आते हैं – मीनाक्षी सिंह

मानवी – नमस्ते मम्मी जी ( पैर छूते हुए ) विमला जी – नमस्ते ,,खुश रहो ,,आ गयी मायके से !! मेरे बच्चें कहाँ हैं ,,दिख नहीं रहे ! मानवी – वो गाड़ी से सामान उतरवा रहे हैं अपने पापा के साथ ! तभी दौड़ते हुए काजल और यश आ गए ! काजल और यश … Read more

सागर किनारे – विजया डालमिया 

सबको आता नहीं दुनिया को सजा कर जीना। जिंदगी क्या है मोहब्बत की जुबां से सुनिए । मेरी आवाज ही पर्दा है मेरे चेहरे का मैं हूँ खामोश जहाँ मुझको वहाँ से सुनिए। तृप्त तन और सुप्त मन दोनों एक जैसे ही होते हैं। तृप्ति का भाव भीतर तक लिए वैशाली आज समुंदर की लहरों … Read more

नया रिश्ता – नीरजा नामदेव

तृप्ति और श्रेय की जोड़ी बहुत ही सुंदर थी। विवाह के बाद दोनों बहुत ही खुश थे। श्रेय की बहुत बड़ी कंपनी थी। वह दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की कर रहा था ।तृप्ति को यह सब देख कर बहुत अच्छा लगता था। वह श्रेय की सफलता का राज नहीं जानती थी। शादी के कुछ सालों … Read more

नेक शुरुआत… –   प्रीता जैन

डॉक्टर मेघा का ध्यान रह रहकर मेज पर रखी उस सोने की चेन पर जा रहा था जो थोड़ी देर पहले मिसेज जिन्दल पोता होने की खुशी में देकर गई थीं| सब कुछ इतना जल्दबाज़ी व अप्रत्याशित ढंग से हुआ कि मेघा समझ ही ना पाई क्या देकर जा रही हैं और ऐसा क्यों कर … Read more

यात्रा-पथ – नरेश वर्मा

कर्नाटक एक्सप्रेस एक ही लय-ताल से भाग रही थी ।सामने फैले हुए मैदान, वृक्ष, ताल-तलैया सब भाग रहे थे ।खिड़की के पास बैठा वह ,इस भागते दृश्य को निर्लिप्त भाव से देख रहा था ।कहीं कुछ नहीं भाग रहा ,यह दृष्टि-भ्रम मात्र है ।यदि कोई भाग रहा है तो वह स्वयं ।क्यों भाग रहा है … Read more

 पराए हुए अपने – बेला पुनीवाला

 मैं आज सुबह से अपनी आरामदायक कुर्सी पे बैठ के कुछ सोच रहा था। तभी सतीश ने आकर पूछा, ” क्या हुआ पापा ? आज आप ऐसे चुप-चुप क्यों हो ? आपकी तबियत तो ठीक है ना ? डॉक्टर के पास चले क्या ? ” मैंने  कुछ देर सोचने के बाद हिम्मत कर के सतीश … Read more

कौन कहता है, पुरुष ह्रदय कठोर होते हैं? – अनीता चेची

रमा की अभी नई-नई शादी हुई है ।उसे परिवार में इतना प्यार मिला कि, वह अपने मायके को भी भूल गई। जब पहली बार उसने रसोई में खाना बनाया ,उस खाने को खाकर उसके ससुर बोले, रमा तो बिल्कुल मेरी मां जैसा खाना बनाती है’ यह सुनकर उसे बहुत अच्छा लगा। रमा के पिताजी सख्त … Read more

बेरंग – पिंकी नारंग

 माँ को गुलाबी रंग की जरी के काम वाली साड़ी को निहारता हुए देख रोहन माँ से साड़ी लेने की जिद करने लगा | माँ आप भी ले ले ना एक साड़ी, मेरी बारात मे पहनने के लिए |मै मै क्या करुँगी? अनु ने अपनी नज़रे गुलाबी साड़ी से चुराते हुए कहा |मेरे पास इतने … Read more

“स्वाभिमान ” – अनुज सारस्वत 

“थैले ले लो थैले हाथ से बने थैले” गंगा किनारे सावित्री थैले बेच रही थी चल चलकर ,प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध के बाद अब सिर्फ कपड़े के बनाकर बेचती थी ,एक दिन एक व्यक्ति की नजर उस पर पड़ी “अम्मा कैसे दिए थैले “–“बेटा ₹10 -₹15 के हैं ले लो सुबह से बोहनी नहीं हुई … Read more

error: Content is protected !!