बिटिया ले आयी चाँद – भगवती सक्सेना गौड़
एक दौड़ते भागते व्यस्ततम महानगर में रवीना खरे अपने सत्तर वर्षीय श्रीमान जी के साथ बढ़िया सी सोसाइटी में रहती है। रोज शाम को ज्यादा दूर तो नही पास में ही दोनो टहलने जाते हैं, क्योंकि दोनो ही गठिया के शिकार है। शरीर कमजोर तो है ही पर दोनो हमेशा मस्ती में रहते। दोनो बेटे … Read more