बहु नहीं बेटी – गीता वाधवानी 

पिताजी की तेरहवीं वाले दिन उनके दोनों बेटे नीरज और धीरज बात कर रहे थे कि मां अब गांव में अकेली कैसे रहेगी?      दोनों बहुएं चुपचाप बातें सुन रही थी। तब मां ने कहा-“मेरे बच्चो, तुम परेशान मत हो। मैं अकेली रह लूंगी। मैं अपनी देखभाल भली-भांति कर सकती हूं।”        दोनों बेटों ने बहुत समझाया … Read more

जिम्मेदारी – आरती झा आद्या : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi : विभा.. आज तुम्हारी दोस्त मीनू अपने पति के साथ बाजार में मिल गई थी.. सोमेश घर में प्रवेश करता हुआ बैग रख अपनी पत्नी से कहता है। ये तो अच्छी बात है… विभा कहती है। कल उसे और उसके परिवार को मैंने लंच के लिए निमंत्रण दिया है.. सोमेश बताता … Read more

सफ़र – कंचन श्रीवास्तव आरज़ू

कविता क्या कर रही हो कहते हुए सुलेखा ने कमरे में कदम रखा।और जैसे ही उन्होंने कदम रखा वो छुटकर पैर छूते हुए कुर्सी पर बैठने का इशारा किया।वो बैठी ही थी कि राम आ गया तो इसने शिकंजी का गिलास पकड़ाते हुए कहां ये लीजिए। पर उसका मुंह देखने लायक था। जिसे देख वो … Read more

अंतिम फ़ैसला- के कामेश्वरी

रामकिशन सुबह की सैर करके आए थे । उनको आते देखते ही सुलोचना चाय बनाने चली गई । जैसे ही रामकिशन फ़्रेश होकर आए दोनों बैठकर चाय पीने लगे ।उसी समय बाहर गेट के खुलने की आवाज़ हुई ।सुलोचना उठती है और झाँक कर देखती है । यशोदा गेट खोलकर अंदर आ रही थी । … Read more

ससुर नहीं पिता हूं तुम्हारा!! – प्रियंका मुदगिल

हौसला ना हार कर सामना जहान का….. सुरेश जी ने गुनगुनाते हुए रीमा को चाय का कप पकड़ाया ” यह लो…रीमा बेटा! चाय पी लो और यह सिर्फ मैं गाना नहीं गुनगुना रहा था…. बल्कि तुम्हारे लिए कह रहा था…” “लेकिन पापा मैं कैसे सब का सामना करूं ..?आते -जाते सब लोग मुझ पर ताना … Read more

“बदलाव की लहर”  – कविता भड़ाना

दोपहर के समय मोहल्ले की सारी महिलाएं गप्पे मारती हुई ठेले वाले को घेर कर सब्जियों की खरीददारी में व्यस्त थीं की तभी सुभद्रा जी के घर का मुख्य द्वार खुला और देखा उनकी छोटी बहु गाड़ी बाहर निकाल रही हैं साथ ही सुभद्रा जी और उनकी बड़ी बहु भी गाड़ी मैं बैठ उड़नछू हों … Read more

परिवार के संस्कार और सहयोग ही समाज में बदलाव लाने की हिम्मत देते हैं। – सुल्ताना खातून 

“लागा चुनरी में दाग …….” दादी क्या ये पुराने गाने सुन रही हैं, आईए मेरे साथ डांस करें! दिव्या ने दादी को खिचते हुए बोली। तभी दरवाजा खुला और अमित अंदर आया, पिछे एक काली चादर में धूमिल, डरी सहमी सी खुबसूरत सी लड़की भी थी। तभी दादी ने ऐनक ठीक करते हुए कहा- अरे….कोन … Read more

‘ ऐसा परिवार सबको मिले ‘ – विभा गुप्ता 

  विवाह-कार्य सम्पन्न होने के बाद जब तृप्ति की विदाई का समय आया तो घर के बड़े-छोटे सभी सदस्यों की आँखें नम होने लगी।तृप्ति कभी ताईजी के सीने से लगकर रो रही थी तो कभी मानसी बुआ के गले से लिपट कर कह रही थी, बुआ, मुझे रोक लो और बुआ कहती, ” बिटिया,ये तो समाज … Read more

परिवार की एक विधवा बहू,,,, – मंजू तिवारी

हेलो छोटी बहू मैं खेतों का बटाईदार बोल रहा हूं। बड़े भैया ने खेतों के लिए पानी देने के लिए मना कर दिया है। अब खेतों में गेहूं कैसे बोया जाएगा। नमिता बटाईदार से कहती है। यदि जेठ जी खेतों के लिए पानी नहीं दे रहे तो किसी और से पानी ले लो ,,,लेकिन कोई … Read more

जेवर – अंजू निगम

“जिज्जी, क्या सोचा? मालू की दुल्हन की गोद भराई में क्या देना है? सोना तो आग पकड़े है। पुन्नी बता रही थी कि पचास के ऊपर पहुँच गया है।” “पचास के ऊपर!!!!! राम राम। मैंने तो इतने दिनों से सोना खरीदा नहीं। हमारे बखत तो  बीस के आस पास रहा होगा।” सुधा के चेहरे पर … Read more

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