बहु नहीं बेटी – गीता वाधवानी
पिताजी की तेरहवीं वाले दिन उनके दोनों बेटे नीरज और धीरज बात कर रहे थे कि मां अब गांव में अकेली कैसे रहेगी? दोनों बहुएं चुपचाप बातें सुन रही थी। तब मां ने कहा-“मेरे बच्चो, तुम परेशान मत हो। मैं अकेली रह लूंगी। मैं अपनी देखभाल भली-भांति कर सकती हूं।” दोनों बेटों ने बहुत समझाया … Read more