दबंग – पिंकी नारंग 

मैडम इस स्टाइल का एक ही सूट है दुकान पर और ये वो सामने वाली मैडम खरीद चुकी है |दुकानदार मेरी तरफ इशारा करके किसी को बोल रहा था | मै मन ही मन अपनी पसंद पर इतरा रही थी |ठीक है भइया अगर दुबारा स्टाक मे ऐसा सूट अाए तो मेरे लिए रख देना, … Read more

*जहाँ चाह, वहाँ राह* – सरला मेहता

” माँ ! तुम क्यों चली गई, हम सबको छोड़कर। दादी भी थक जाती है, दादू की सेवा टहल करते। पापा हम सबके ख़ातिर नई  बिंदु माँ ले आए हैं। पर उन्हें अपनी बेटी कुहू से ही फ़ुर्सत नहीं। तुम्हीं बताओं मैं क्या करूँ ? ” यूँ ही माँ से अपना दुखड़ा सुनाते कुणाल सो … Read more

पिया का घर – नीरजा कृष्णा

मयूरी आज सुबह से बेहद उदास थी।वो बस औंधी पड़ी पिछली बातें सोचे जा रही थी।  उस छोटे से घर में या उस ढाई कमरे के घर में किसी से कोई बात छिप ही नहीं पाती थी। ममतामयी सास और स्नेही जेठानी रूपा उसकी उदासी महसूस करती ही थीं। उस दिन जब वह चाय पीने … Read more

मेरे अपने… –  प्रीता जैन

वही रोज़ का बुदबुदाना जारी था मिताली का, सुबह से ही घर के बिखरे काम देख झुंझलाने लगती धीरे-धीरे काम फिर क्रमबद्ध होते ही जाते किन्तु कुछ अधिक सफाई प्रिय होने की वजह से सब अस्त-व्यस्त देख परेशान ज़रूर हो जाती| हालाँकि रोज़ की ही बात है जानती-समझती है फिर भी लगातार काम निपटाने में … Read more

परदेश – संगीता  अग्रवाल

” मां मुझे कॉलेज से वजीफा मिल गया अब मेरे सपने पूरे होंगे और मैं विदेश जाऊंगा पढ़ने के लिए। ” बाइस वर्षीय वंश कॉलेज से आ चहकता हुआ बोला। ” क्या …मतलब तू विदेश चला जायेगा ?” साधना इकलौते बेटे के दूर जाने के ख्याल से तड़प कर बोली। ” मां बस दो साल … Read more

“परिवार” – ऋतु अग्रवाल 

 “संपदा, जल्दी करो भाई! कितनी देर लगाती हो तैयार होने में? तुम्हारे चक्कर में हर बार देर हो जाती है।” पुलकित बाहर से आवाज लगा रहा था।       “आई! बस दो मिनट।” संपदा ने प्रत्युत्तर दिया।       “इसके  दो मिनट पता नहीं कब पूरे होंगे?” पुलकित बड़बड़ाने लगा।     “चलो” संपदा बाहर निकल आई।    पुलकित बस ठगा सा … Read more

बहू भी परिवार का हिस्सा है – अर्चना कोहली “अर्चि”

“साढ़े सात बज गए हैं, अभी तक आपकी लाडली बहू का पता नहीं। रोज़ तो छह, साढ़े छह बजे तक आ जाती है”। राधिका ने बड़बड़ाते हुए अपने पति शेखर से कहा। “अरे भाग्यवान। आ जाएगी। आज सुबह भावना ने कहा तो था, आज आने में देरी हो जाएगी। तुम तो जरा-जरा सी बात पर … Read more

ये कैसा न्याय है? – प्रियंका त्रिपाठी ‘पांडेय’

निर्मला पेट से है यह खुशखबरी पाते ही निरंजन खुशी से झूम उठा परंतु निर्मला की सास को जरा भी खुशी नही हुई, उल्टा मुंह फुला कर बैठ गई। निरंजन ने पूछा माॅ॑ मै बाप बनने बाला हूं और तुम दादी क्या यह जानकर तुमको खुशी नही हुई? “खुशी होती बेटा यदि पता चल जाता … Read more

हम साथ साथ हैं – कमलेश राणा

कमलेश राणा अनु… देखो… कब से फोन बज रहा है तुम्हारा।  हाँ, अभी आई।  अरे वैशाली, आज बड़े दिन बाद याद आई।  याद तो बहुत आती है दीदी आप सबकी, बस फोन ही नहीं कर पाई।  रवि के ऑफिस जाने के बाद बिल्कुल अकेली रह जाती हूँ , कभी ऐसे रही ही नहीं। आपको तो … Read more

लालिमा बिखेरता सूरज – डा.मधु आंधीवाल

आज इस सयुंक्त परिवार में जैसे हंसी को लकवा लग गया हो जहां पूरे समय हंसी के ठहाके बाहर तक सुनाई देते हो वहां ये सन्नाटा अजीब लग रहा था । लाला जी  अपनी पत्नी ,पांच बेटों ,चार बहुयें व नाती पोतों के साथ रहते थे । बहुत बड़ा व्यापार था । पांचवा बेटा राहुल … Read more

error: Content is protected !!