सप्तपदी-सप्तवचन* – अनुराधा अनिल द्विवेदी*

ऑटो में मेरे सामने बैठे एक भले मानस मेरे दादा जी के उम्र के रहे होंगे, बड़ी देर से मुझे घूरे जा रहे थे, जब भी मैं उनकी तरफ देखती मुझसे नजरे हटा लेते, उनकी नजरों से मैं असहज महसूस कर रही थी। बात दस साल पहले की है जब मैं ग्रेजुएशन कर रही थी, … Read more

बाबाजी मैं आपकी पोती जैसी दिखती हूं क्या, जो मुझे घूरे जा रहे हैं… – सुल्ताना खातून 

ऑटो में मेरे सामने बैठे एक भले मानस मेरे दादा जी के उम्र के रहे होंगे, बड़ी देर से मुझे घूरे जा रहे थे, जब भी मैं उनकी तरफ देखती मुझसे नजरे हटा लेते, उनकी नजरों से मैं असहज महसूस कर रही थी। बात दस साल पहले की है जब मैं ग्रेजुएशन कर रही थी, … Read more

दिवाली पर बहू नहीं बेटी याद कर रही है। – मंजू तिवारी

बिटिया तुम सब लोग कब घर आ रहे हो दिवाली आने के 1 महीने पूर्व से ही पूछने लगते थे  ,, कहने के लिए तो वह वंदना की ससुर जी थे लेकिन बंदना को अपने ससुर जी से पिता जैसा दुलार मिला था।,,, बंदना से बिल्कुल बेटी जैसे ही बात करते,,, अक्सर सासू मां से … Read more

 प्रेम से बनता परिवार – सरला मेहता

बचपन की सखियाँ मंदिर में मिल जाती हैं। वहीँ पेड़ी पर बैठ लगी सुनाने अपनी राम कहानियाँ। चर्चा का मुख्य मुद्दा परिवार व बहू बेटों पर ही केंद्रित है। पवित्रा शान से कहती है,” देख बेना, मेरी तो एक ही बहू है पर ठीकठाक है। बोलती है कामपुरता। मैं तो ठहरी बातूनी। बस यूँ समझ … Read more

द्रोण – विनय कुमार मिश्रा

“प्रकाश सर का घर यहीं है क्या?” कौन प्रकाश? यहां तो इस नाम का कोई नहीं रहता बाबू” वो चारो लगभग सत्ताईस अठाइस साल के युवक, चमचमाती हुई बड़ी गाड़ी खड़ी कर कुछ सोचने लगे। उन चारों ने एक तस्वीर दिखाई मुझे। “ये जो बीच में हैं, हम इन्हें ही ढूंढ रहे हैं” तस्वीर कुछ … Read more

सासु माँ को हमने अच्छा सबक सिखाया – सुल्ताना खातून 

आज तो सुरज पश्चिम से निकल गया था जैसे, आज  सासु मां समोसे ले आईं थी, हमारी बांछे खिल गईं जैसे, और तो और सासु मां ने समोसे ला कर हमें थमा दिया, ये भी कहा अपने लिए निकाल कर हमें भी दे जाना। हम हैरत के समन्दर में गोते लगाते किचन के तरफ बढ़ … Read more

खट्टी मीठी यादे – रीटा मक्कड़

आज सुनीता का मन सुबह से बहुत ही उदास था।समझ ही नही पा रही थी कि इतनी उदासी और बेचैनी किस लिए महसूस हो रही थी।एक तो जनवरी की कंपकपा देने वाली ठंड,ऊपर से सुबह से लगातार बारिश और ठंडी हवाओं और नासाज तबियत की वजह से घर से बाहर भी नही निकल पा रही … Read more

छत्रछाया – डॉ. पारुल अग्रवाल

वैशाली के मायके की तरफ आज एक विवाह था, वो बहुत दिनो बाद अपने मायके की तरफ के किसी कार्यक्रम में जा रही थी। वो बहुत खुश थी क्योंकि उसे लगता है वहां उसको अपने पुराने  रिश्तेदार मिलेंगे। जिन लोगों को बहुत समय से वो नहीं मिल पाई है,उनसे भी मुलाकात होगी। वो दिल में … Read more

यादों का पिटारा – प्रियंका सक्सेना

आधी रात को फोन आया और सब कुछ खत्म हो गया… मोहित का काॅल आस्था ने ही रिसीव किया और सुनकर वो सदमे में खड़ी की खड़ी रह गई। अखिल ने लपककर फोन लिया और जैसे ही मोहित से सुना कि माॅ॑ गुजर गईं उसे धक्का लगा, अपनी सासु मां से अखिल को बेहद लगाव … Read more

अपना रवैया बदल लो मां नहीं तो परिवार बिखरते देर नहीं लगेगी –  सविता गोयल

शिवानी एक मध्यमवर्गीय परिवार से थी। पिता की कमाई भले हीं संयमित थी लेकिन कभी उसके माता पिता ने अपने बच्चों की ख्वाहिशों को नहीं मारा था…..  जब वो विवाह लायक हुई तो  रूप और गुण को देखते हुए कई बड़े बड़े घरों से उसके लिए रिश्ते आने शुरू हो गए थे । शिवानी के … Read more

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