सप्तपदी-सप्तवचन* – अनुराधा अनिल द्विवेदी*
ऑटो में मेरे सामने बैठे एक भले मानस मेरे दादा जी के उम्र के रहे होंगे, बड़ी देर से मुझे घूरे जा रहे थे, जब भी मैं उनकी तरफ देखती मुझसे नजरे हटा लेते, उनकी नजरों से मैं असहज महसूस कर रही थी। बात दस साल पहले की है जब मैं ग्रेजुएशन कर रही थी, … Read more