मातृत्व का सुख – सुल्ताना खातून

अरे रीता  सुना तुमने वो मिश्रा  जी की बिटिया है ना निभा , शहर जा रही है, बच्चा गोद लेने के लिए,,,, कमला काकी अपनी पड़ोसन रीता  के पास बैठी फुसफुसा रही थीं। बात ही ऐसी थी कि दबे दबे सारे गांव में बात फैल गई थी, इस गांव तो क्या पूरे इलाके में ऐसा … Read more

स्वार्थ – मीनू झा

अब बड़ा बेटा “एटीएम मशीन” बनकर नहीं रहेगा !! निशांत…गांव पैसे नहीं भेजे क्या आपने इस महीने??बार बार मेरे फोन पर भी फोन आ रहे है…मुझे तो देखते समझ आ गया कि आप पैसे भेजने भूल गए होंगे वरना मुझे क्यों फोन आने लगा वहां से… अरे यार.. बिल्कुल भूल गया..इस महीने वर्क प्रेशर इतना … Read more

स्वार्थ ने अंधा कर दिया, – सुषमा यादव

ये एक सच्ची है कहानी,, सुनाऊं मैं अपनी ज़ुबानी,, एक गांव बड़ा प्यारा। उसमें एक आलिशान घर बना था, वहां के प्रतिष्ठित श्री लाल जी का,,वे म. प्र. के एक बड़े शहर में प्रिंसिपल थे। उनके दो बेटे राहुल और रमेश थे, और एक बेटी रंजना,, बेटी की शादी बड़ी धूमधाम से एक परिवार में … Read more

मैं इतनी भी स्वार्थी नहीं – सविता गोयल

” निशा , मैं चलती हूं..… देर हो रही है …. ” कहते ममता  मंदिर में हो रहे सत्संग के बीच में हीं उठ कर जाने लगी। ”  ममता  रूक तो…  कहाँ चल दी इतनी जल्दी , अभी अभी तो तू आई थी! ”  थोड़ी देर और रूक जा बस आरती होते ही प्रसाद लेकर … Read more

NRI दामाद – के कामेश्वरी

सरिता अपनी स्कूटी अपने बुआ के घर के सामने रोकती है। उस पर से उतरकर स्कूटी को ताला लगा कर चाबी हाथ में लेकर घुमाते हुए गेट खोलकर अंदर आ जाती है और कहने लगती है कि वाह सुनंदा बुआ आपके हाथों में जादू है । क्या बना रही हैं ? उसकी खुशबू गेट तक … Read more

दो हिस्सों में बंटा प्रेम – प्रेम बजाज

रीमा और अंजलि दोनों एक ही मोहल्ले में रहती थी, एक ही स्कूल और एक ही क्लास में थी। ज़ाहिर सी बात है अक्सर ऐसे में दोनों में घनिष्ठता बढ़ती है। रीमा और अंजलि में भी काफी घनिष्ठता थी, उस पर कुदरत का करिश्मा ही कहेंगे कि दोनों का जन्म दिन केवल एक दिन के … Read more

आखिर आपने भी तो हमें अपने स्वार्थ के लिए ही तो पैदा किया हैं – मीनाक्षी सिंह

राजन – माँ ,,पापा से कह दिजियेगा ,मैं  बच्चों और पूजा को लेकर जा रहा हूँ  कुछ दिनों में ! खुद कहूँगा उनसे तो खामखां बहस  हो जायेगी ! सुजाता जी ( राजन की माँ ) – तू ही कह देना ,,जब बाजार से आ जायें तो ! क्या पता तेरा सारा गुस्सा मुझ पर … Read more

सरसता – अभिलाषा कक्कड़

सच ही कहते हैं कि सहजता और सरलता में जो रस निखार और सुन्दरता है वो थोपी हुई थोथी बातो में नहीं । कभी-कभी बनावट का लिबास हम इस कदर ओढ़ लेते हैं कि हमारी स्वाभाविकता की चमक भी खो जाती हैं और परिणाम भी हानिकारक ही ज़्यादा साबित होते हैं । अच्छा है जितनी … Read more

अपना अपना स्वार्थ – डॉ. सुनील शर्मा

रिदिमा ने जब मां को उसके साथ ही ऑफिस में कार्यरत संकेत का विवाह का प्रस्ताव बताया तो एक बार तो मां पशोपेश में पड़ गईं. किसी तरह अपने आप को संभाला. रिदिमा और उसके दोनों बहन भाई बहुत छोटे थे जब पति की एक सड़क दुर्घटना में म‌त्यु हो गई थी. कंपनी ने उनके … Read more

आंटी जी – मधु शुक्ला

दिव्या की शादी ऐसे परिवार में हुई थी। जहाँ बस दो ही सदस्य थे परिवार में। उसके पति के अलावा ससुर जी। उसकी सासू माँ स्वर्ग सिधार चुकीं थीं। प्रेम विवाह के कारण उसके सास ससुर दोनों ही अपने परिवारों से जुदा हो गये थे। उनके कुछ अभिन्न मित्र उन्हें परिवार की कमी महसूस नहीं … Read more

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