भरोसा… अब नहीं – अंशुमान सक्सेना
अमावस की काली रात थी और बाहर मूसलाधार बारिश हो रही थी, लेकिन दिवाकर के मन में जो तूफ़ान चल रहा था, वह बाहर के मौसम से कहीं ज़्यादा भयानक था। वह अपने कमरे में खिड़की के पास खड़ा था, उसके हाथ में एक नीला लिफाफा था जिसे उसने इतनी ज़ोर से भींच रखा था … Read more