बेनकाब – विजया डालमिया

गहराती रात के साथ बीता हर पल उसे और अंधेरे की तरफ धकेल रहा था। जो हुआ उस पर वह यकीन नहीं कर पा रही थी। ना ही वह इसके लिए तैयार थी। कुछ महीनों पहले की ही तो बात है जब वह पल्लव से जुड़ी थी ।पावनी एक मिडिल क्लास फैमिली की लड़की थी … Read more

स्वार्थ ने अंधा कर दिया, – सुषमा यादव

एक गांव बड़ा प्यारा। उसमें एक आलिशान घर बना था, वहां के प्रतिष्ठित श्री लाल जी का,,वे म. प्र. के एक बड़े शहर में प्रिंसिपल थे। उनके दो बेटे राहुल और रमेश थे, और एक बेटी रंजना,, बेटी की शादी बड़ी धूमधाम से एक परिवार में हुई थी, परिवार तो कोई खास नहीं था,पर लड़का  … Read more

दुःख मे अपने ही साथ देते हैं – ममता गुप्ता

अरे!! देखो ये हैं मेरी फैमिली कहने को तो हम सात देवरानी जेठानी हैं लेकिन किसी को किसी के दुःख की कहाँ पड़ी हैं…उसदिन तो वो रेणु बड़ी बड़ी डींगें हाक रही थी की-भाभी जी जब ऑपरेशन हो तब मुझे बता देना…खुद को अकेले मत समझना…बस उसे तो सिर्फ बाते करना ही आता है, कॉल … Read more

अपने तो अपने होते हैं – चेतना अग्रवाल

क्या शादी के बाद लड़की का अपने माता-पिता पर कोई अधिकार नहीं होता.. आज जब कनिका की सहेली उससे मिलने उसके घर आई और उसे परेशान देखकर कारण पूछा, तो कनिका खुद को रोक ना पाई और उसका दर्द आँसू बनकर बह निकला… रश्मि ने भी उसे रोने दिया। वह उसे हल्का करना चाहती थी। … Read more

प्रियतमा  – किरण केशरे

आज सुहाग पड़वा थी, नई नवेली सिमरन आज खूब सजधज कर तैयार हुई थी अभी कुछ महीने ही तो हुए थे शादी को,,रोज जींस टॉप ,टी शर्ट सूट, पहनने वाली सिमी ! साड़ी में बला की खूबसूरत लग रही थी,,,,वैसे उसका ससुराल खुले विचारों वाला था तो कोई रोक टोक किसी बात में नही थी … Read more

एक ससुराल ऐसा भी – संगीता अग्रवाल

” अरे कमला देखो चूड़ी वाला आया है दस दिन बाद तीज है। तीज के लिए चूड़ियाँ लेनी होंगी तुम्हे कहो तो बुला लूँ ?” सुधाकर जी ने अपनी पत्नी को आवाज़ दी। ” धीरे बोलो जी छोटी बहु सुन लेगी तो उसे कितना बुरा लगेगा …वैसे भी मैने बड़ी बहु को बोल दिया वो … Read more

मां में पराई नहीं हूं! – कामिनी सजल सोनी

पूजा के ससुराल में घर के बाहर चाट वाला आवाज लगा रहा था बेवफा चाट वाले की पानी पूरी पीलो खट्टी खट्टी, मीठी मीठी ! उसकी यह आवाज सुनकर पूजा का दिल अक्सर मचल जाता पानीपूरी देखकर यह फिसल जाता! पर हाय रे क्या करूं ससुराल में  घर के बाहर निकल कर पानीपुरी तो नहीं … Read more

बहू बेटी – डा.मधु आंधीवाल

सौम्या नाम ही नहीं स्वभाव की भी सौम्य थी । उदास सी खिड़की में खड़ी देख रही थी । पार्क में एकत्रित हरे परिधानों में गीत गाती सजी धजी महिलाओं को झूला झूलता देख रही थी पर उसकी जिन्दगी तो बेरंग हो चुकी थी । अच्छी खासी वैवाहिक जिन्दगी चल रही थी । इतना प्यार … Read more

कोना मायके का – भगवती सक्सेना गौड़

आज सुकन्या दीवाली की सफाई कर रही थी, सीढ़ी पर चढ़कर ऊपर की अलमारी के किवाड़ खोले। एक चरर्रर्रर सी आवाज़ हुई, क्योंकि ये अलमारी सिर्फ दीवाली के एक हफ्ते पहले ही खुलती थी। तभी एक लकड़ी का बक्सा दिखा, जिसमे सिर्फ उंसकी ही यादें थी, जिसमे सिर्फ उसके अपने थे, जिनका वो बहुत आदर … Read more

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