आलसी बहु  – चेतना अग्रवाल

“अनुज, जरा थोड़ी देर के लिए गुनगुन को सँभाल लीजिए। लगातार रो रही है, इस तरह मैं रसोई में काम नहीं कर पा रही।” खाना बनाती रचना ने रसोई से अपने पति को आवाज दी जो टी वी देखने में मशगूल था। रचना के सास-ससुर भी हॉल में बैठे टी वी देख रहे थे। अनुज … Read more

नहीं! मुझे बुरा नहीं लगता। – मधू वशिष्ट 

“सुनो, आज शाम को सरसों का साग बना कर रखना, थोड़ा सा गाजर गोभी का अचार भी डाल देना। यह रोटी ले जाओ, ठंडी हो गई है गरम फुल्का ले आना।” बिना विरोध किए गंगा विनय की हर बात मुस्कुराकर मानी जा रही थी। शीला ने देखा था रात को जीजा जी ने सोते हुए … Read more

बेकारी की दौड़ – माता प्रसाद दुबे

बेकारी की दौड़ में जीत हासिल करना आसान नहीं होता। ना जाने कितने लोगों का पूरा जीवन इस दौड़ को पूरा करने में समाप्त हो जाता है। रविवार का दिन था। रेलवे स्टेशन की बेंच पर बैठा हुआ प्रकाश हजारों की संख्या में रेलवे की भर्ती की परीक्षा देने आए नौजवानों की भीड़ देखकर वह … Read more

“यह कैसा संस्कार” – ऋतु अग्रवाल

 “मम्मीजी! कल मेरे मामाजी और मामीजी लखनऊ से आ रहे हैं। वे लोग मुंबई घूमने आ रहे हैं। एक  दिन यहाँ रुक कर फिर वे लोग अपने होटल चले जाएँगे।” श्रुति ने अपनी सास से कहा तो उन्होंने कुछ कहा तो नहीं बस चुपचाप अपने कमरे में चली गई।        अगले दिन श्रुति की सासू माँ … Read more

संस्कार पिलाए नहीं जाते…! – वर्षा गर्ग

ऑटो से उतरते ही हलचल का अंदाज़ हो चुका था।  दोपहर के वक्त शांत रहने वाली हमारी हाउसिंग सोसाइटी में चहल पहल थी।  मैन गेट से आगे आई तो एक एंबुलेंस नजर आई।  हे ईश्वर!सबकी रक्षा करना। मन ही मन भगवान का नाम लेते हुए आगे बढ़ी मैं। लिफ्ट के पास कुछ परिचित चेहरे नजर … Read more

चाभी – मीनाक्षी सौरभ

“अंकल, आप जब भी फ़्री हों तो प्लीज़ फ़ोटोग्राफ़र से बोलिएगा कि हमें भी डांडिया नाइट की फ़ोटोज़ शेयर करे।” खाने की टेबल पर बैठी प्रिया ने कहा। “हाँ, उस दिन हमारी ज़्यादा फ़ोटोज़ ही नहीं हो पाईं थीं। हम लोग होस्टिंग में बिजी थे।” रावी भी मुस्कुराते हुए बोली। “ज़रूर बेटा। बहुत सारी फ़ोटोज़ … Read more

संस्कार – पुष्पा पाण्डेय

सूरज बचपन से ही होनहार था। अपनी कक्षा में हमेशा प्रथम आया करता था। माँ-बाप का इकलौता बेटा था। पिता इंजिनियरिंग काॅलेज में प्रोफ़ेसर थे। माँ सरोज एक कुशल गृहणी थी और अपने जड़ों से जुड़ी हुई थी। गाँव की लड़की शादी के बाद शहर आकर ऐसा तालमेल बैठाया कि न उसने अपने संस्कार को … Read more

जो बोए पेड़ बबूल के तो फूल कहां से होय..! – कामिनी सजल सोनी 

आज सुबह से ही सर दर्द के मारे फटा जा रहा था सोचा था संडे की सुबह है तो जल्दी से नाश्ता निपटा कर कहीं आउटिंग पर जाएंगे लेकिन दर्द के मारे तो हाल बेहाल है। सभी अपने अपने कामों में व्यस्त हैं सुनील ऑफिस का काम निपटा रहे हैं, तो बगल में बैठा किट्टू … Read more

पर उपदेश कुशल बहुतेरे – डा. मधु आंधीवाल

  रमा काकी मोहल्ले की चलती फिरती विविध भारती थी । पूरे मोहल्ले की बहू बेटियों की खबर रखती थी । कुछ लोग तो उन्हें नारद मुनि कहते थे । प्रीति मि. शर्मा जी की छोटी बेटी थी । बड़ी बेटीऔर बेटे की शादी हो गयी थी । प्रीति बहुत समझदार और शिक्षित लड़की थी । … Read more

” परवरिश ”  – अनिता गुप्ता

शहर की पॉश कॉलोनी के एक बंगले के बाहर काफी गहमा-गहमी का माहौल है। पुलिस ने यहां पर दबिश दी है। बहुत समय से शिकायत आ रही थी कि, इस बंगले में कुछ ग़लत हो रहा है। लेकिन सबूतों के अभाव में पुलिस कोई कार्यवाही नहीं कर पा रही थी। अभी पिछले हफ्ते ही नई … Read more

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