आईना ! – किरण केशरे 

डाकतराईन ने क्या बोला ? लल्ला !  घर में घुसते ही अम्मा ने घेर लिया था भैरव को ! कुछ नही, लड़की है,, भैरव का उखड़ा हुआ स्वर सुनकर अम्मा बिफर ही पड़ी थी,,,, “कब से आस लगाकर बैठी थी अब दूसरी बार तो बेटा जनेगी करमजली”  पोते की चाह ने अम्मा को विकल कर … Read more

आखिरी आवाज़ – कंचन श्रीवास्तव 

की बोड पर हर वक्त थिरकती हुई उंगलियां अचानक शांत हो गई है ऐसा लगता है जैसे पोर पोर दुखता है पास होते हुए भी बेगाने सा पड़ा रहता है। आज पूरे दो महीने हो गए समीर को गए, पर ऐसा लगता है जैसे कल ही की बात है । हां कल ही कि बात … Read more

बर्दाश्त की हद – सुनीता मिश्रा

“कलुआ,पानी दे ।” “कल्लू मेरी चुनौटी तो ला दे।” “मास्टर जी,बुला रहे काले राम तेरे को।” कल्लू,कलुआ,कालेराम सब उसे इसी नाम से बुलाते।वैसे रंग ही उसका झक काला तो नहीं हाँ थोड़ा दबा जरूर था। छबि सुंदर थी।माँ पर गया था,बस रंग छोड़ कर।।संयुक्त परिवार मे बड़ी बहू जानकी(उसकी मां)दो देवर,उनकी पत्नियाँ,सास थी।सम्पन्न घर।सुघड़ जानकी … Read more

माँ का विरोध करना मेरी गलती है – के कामेश्वरी

मैं अपनी फेवरेट हूं,मैं अपनी फेवरेट हूं, अब मुझे सिर्फ खुद के लिए जीना है,खुद से ही प्यार करना है….ये क्या लगा रखा है निशा… बहुत हो चुका ये सब,अब बस भी करो और अपनी जिम्मेदारियों पर ध्यान दो… कोई चीज जगह पर नहीं मिलती मेरी…खैर मुझे छोड़ो तुमने देखा पिंकी के इस बार हाफ … Read more

दोषी – सुधा शर्मा

आज चौपाल पर मजमा लगा हुआ था ।     सब लोग मिलकर नन्दा को भला बुरा कह रहे थे। कोई एहसान फरामोश कह रहा , कोई कृतघ्न , कोई लालची ।         एक स्वर मे सब उसको गाँव से निकालने या पुलिस के हवाले करने की सिफारिश कर रहे थे ।  आखिर उसने अपराध ही ऐसा किया … Read more

 नैना – मंजुला

“ताई जी और ताऊ जी दोनों सवेरे मंदिर गये हुए थे। शरद मौका पाकर नैना के कमरे में चला आया। डर और गुस्से से काँपती नैना चिल्लाना चाहती थी लेकिन शरद ने बायें हाथ से उसका मुँह बंद कर दिया। शरद की पकड़ से छूटने के लिए कसमसाती नैना का पैर जोर से कोने में … Read more

हैसियत तो आपकी नहीं थी बहू लाने की। –  सविता गोयल

” हूंह… एक भी सामान ढंग का नहीं दे रखा जो हमारे घर में रखा जा सके।  कपड़े लत्ते भी ऐसे दिये हैं कि सारे रिश्तेदारों के सामने हमारी नाक कट गई।  हमने तो सोचा था सरकारी मास्टर की इकलौती बेटी है तो कम से कम ब्याह तो ठीक से करेंगे … लेकिन यहां तो … Read more

विषकन्या – सुषमा यादव

नागिन जैसी बलखाती,फन फैलाती,रोब झाड़ती,लाल लाल आंखें, अपने शब्दों से विषवमन करती, किसी भी अन्याय का प्रचंड विरोध करती,वो है एक विषकन्या, जी हां, मुझे यही नाम दिया गया था, मेरी मां ने और बाद में सभी ने। मैं बहुत ही गुस्सैल, स्वभाव की हूं, किसी की ग़लत बात को सहन नहीं कर सकती, बचपन … Read more

 यह विवाह संभव नहीं  – डॉ. सुनील शर्मा

हरीराम मास्टर जी की आंखों के आगे अंधेरा छा गया… पिछले तीन माह से बड़ी बेटी सुधा की शादी की तैयारियों में पूरा घर लगा था. ससुराल वाले ऊंचे तबके के थे. हमारा उनसे कोई मेल नहीं, लेकिन बेटी की ज़िद थी . रमेश लड़का अच्छा था. एक बैंक में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर … Read more

हर बार विरोध करना ज़रूरी है क्या..? – रश्मि प्रकाश 

‘‘हमेशा जवाब देना भी अच्छा नहीं होता पलक , मैं ये नहीं कह रही कि तुम चुप ही रहो पर बेटा समय देख कर बोलो तो बात का वजनरहता ,और एक चुप्पी बहुत बार सौ बातों पर भारी पड़ जाता।‘‘रत्ना जी अपनी बहू को समझाती हुई बोली ‘‘ पर माँ गलती तो भईया की ही … Read more

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