छलावा – गीतू महाजन 

“तो तुम हो मालती”  आवाज़ सुनकर उसने अपना चेहरा ऊपर उठाया… आंखों में हैरानी के भाव थे। वह कोई बाईस-तेईस साल की युवती थी। कुर्सी पर सर झुकाए जब उसे मुक्ता जी ने पुकारा तो उसका ध्यान टूटा… शायद कुछ सोच रही थी।  “क्या हुआ? इतनी हैरान क्यों हो”? मुक्ता जी ने उसके कंधे पर … Read more

संभालो अपने संस्कारों को ..!! – भाविनी केतन उपाध्याय

“जब मैंने कोई गलती नहीं की तो क्यों बर्दाश्त करूं ? आप को पता था कि मेरे माता पिता गरीब हैं और कुछ देने में सक्षम नहीं हैं फिर भी आप ने मांजी अपना स्वार्थ ही देखा। मेरे माता पिता ने आप को इस बात से अवगत भी कराया था कि आप लोगों में और … Read more

तेरी मां बेघर नहीं है!! – अर्चना खंडेलवाल 

ट्रेन एक स्टेशन पर रूकी, लगभग सारे यात्री उतर चुके थे, कुछ यात्री थे जो मोबाइल में व्यस्त थे, कुछ गाने सुन रहे थे तो कुछ वीडियो देखकर समय बिता रहे थे, सबको अपनी मंजिल के आने का इन्तजार था पर संगीता जी को कोई जल्दी नहीं थी, वो चाह रही थी कि ट्रेन हर … Read more

प्रेम रंग – भगवती सक्सेना गौड़

आज रविंदर बिजी अपने पोते अमरसिंह से बोल रही, “सुन पुत्तर, मुझे न अमृतसर ले चल, तुम सब मेरी बीमारी में बहुत परेशान हो गए हो, इत्ती उम्र नब्बे भी निकली जा रही, मुझे भगवान बुलाता ही नही, कुछ तो कारण है।” “क्या बिजी, इतने ऐशो आराम से परिवार के मध्य सेवा करा रही हो, … Read more

ये भी प्रेम ही था ना.. – अर्चना नाकरा

मेट्रो तेज रफ्तार से भाग रही थी और ‘उसी रफ्तार से साधना का मन भी” आज सुबह प्रेजेंटेशन देनी थी नहीं तो शायद छुट्टी ले लेती! वैसे, छुट्टियां बची भी कहां थी ? आए दिन कुछ ना कुछ लगा ही रहता और उसे घर रुकना पड़ता! पता नहीं कैसे’ खींचतान कर घर और नौकरी’ चला … Read more

क्या लगता है तुम्हारी मां इतनी बुरी है – रत्ना साहू 

एक तो सुबह की चाय समय से नहीं मिली उसकी नाराजगी तो थी ही उपर से बेटी को रसोई में काम करते देख और बढ़ गई। अरे प्रिया बेटा! तुम यहां रसोई में क्या कर रही हो? भाभी कहां गई?” “मां, चाय बना रही हूं और भाभी फ्रेश होने गई है। “क्या..!अभी फ्रेश होने गई … Read more

कॉम्प्रोमाइज – कीर्तिरश्मि नन्द

उसने कहा” मैं मां को साथ नहीं रखूंगा”। क्यों ?” जज ने पूछा “इस बुढ़ापे में तुम ही तो उसका सहारा हो फिर ये रवैया क्यूं”…। “मेरी बीवी नहीं चाहती उसका इगो हर्ट होता    है” लड़के ने बनावटी बात बोली। “ये भी भला कोई बात हुई ,समझाओ बीवी को” ” नहीं समझा सकता” क्यूं” … Read more

“छोटा प्रयास बड़ा बदलाव” – कविता भड़ाना

आजकल शादियों का मौसम है।  आप लोगों का भी शादी और उससे जुड़े दूसरे समारोह में आना जाना लगा ही होगा। कल रात मेरा भी दो शादियों में जाना हुआ। में, मेरी दोनों बेटियों और पतिदेव के साथ अपने करीबी रिश्तेदारों के यहां गई थी। बड़ा ही सुंदर फार्म हाउस था। बिजली की रंग बिरंगी … Read more

वाह अपने बेटे की क्या कीमत लगाई हैं© ममता गुप्ता

आज प्रमिला को लड़के वाले देखने आ रहे थे इसलिए प्रमिला की माँ वंदना उसे समझा रही थी कि… देख प्रमिला कल तुझे लड़के वाले देखने आ रहे,तो तू लड़के वालों के सामने ज्यादा न बोलना,वो जो भी तुझसे सवाल करे  सिर झुकाकर जवाब देना, औऱ हाँ तू उनसे कोई सवाल जवाब करने मत लग … Read more

तलाकनामा – डा. मधु आंधीवाल

गांव का सबसे धनाढ्य परिवार यानी जमींदार परिवार । इस परिवार की बात ही निराली । जमींदार साहब मनजीत सिंह जी के सबसे बड़े सुपुत्र राम सिंह जी जिन्हें सब रामू भैया कहते थे । रामू भैया को जमींदार साहब ने शहर भेज दिया अध्ययन करने के लिये । रामू भैया को शहर की हवा … Read more

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