शिव समा रहे हैं मुझमें और मैं शून्य हो रहा हूँ – कमलेश राणा

जीवन में एक वक्त ऐसा भी था जब मैं रात दिन दो रोटी की जुगाड़ के लिए संघर्षरत था तब हर कोई मेरा हमदर्द था, सहानुभूति के बोल मेरे लिए लोगों के मुख से सुनना जीवन की दिनचर्या का हिस्सा बन चुके थे। न जाने सच में यह मेरे लिए उनके दिल में उपजी करुणा … Read more

जिंदगी की धूप  छांव – अनीता चेची

जीवन के 70 बसंत पूरे करने के बाद जीवनलाल पूरी तरह से प्रभु भक्ति में लीन हो गया। चारों बेटे और दो बेटियों की शादी जीवनलाल ने बड़ी धूमधाम से की। जीवन लाल ने अपने जीवन में खूब संपत्ति  कमाई । जिसे उसने सभी बच्चों में बराबर बराबर बांट दिया। उसका एक बेटा विदेश नौकरी … Read more

भले ही आप मुझे पराई समझते हैं पर मैं तो आपको अपना समझती हूॅं…. – भाविनी केतन उपाध्याय 

आ गए आप ? कैसा रहा दिन ? चलिए जल्दी से हाथ मुंह धो लिजिए…. आप की मनपसंद अदरक, इलायची वाली चाय और वेजिटेबल कटलेट तैयार हैं..” मनीषा ने चहकते हुए अपने पति जतिन से कहा। ” क्या नहीं आना था मुझे घर ? तुम्हें क्या करना है जानकार मेरा दिन कैसा रहा ? चाय … Read more

गर्म गर्म पुरिया – दीपा माथुर

मनोरमा जी ने अपने घर में सुंदर कांड का पाठ रखा था। बड़े जोश से तैयारियो में जुटी थी। तभी पड़ोस में रहने वाली नेहा वहां पहुंच गई । मनोरमा जी अपनी बहुओं को हिदायत दे रही थी। “अब सब अच्छी सी तैयार होकर आ जाओ। सुन्दर सुन्दर साड़ी पहनना । ओर टेंट में व्यवस्था … Read more

वक्त हमेशा एक सा नहीं रहता .. – रश्मि प्रकाश

मौसम हमेशा एक सा नहीं रहता कांता …आज धूप है तो कल छाँव भी होगी… एक दिन तेरी किस्मत में भी अच्छे दिन आयेंगे… तू चिंता क्यों करती हैं हम है ना तेरे साथ… जाने दें तेरे पति ने जब साफ साफ कह ही दिया उसको तेरे साथ नहीं रहना… फिर उसको जिसकेसाथ जाना जाने … Read more

 ऐसा क्यों होता है – नूतन सक्सेना 

भला कोई इतना नीचे कैसे गिर सकता है, सोच रहा था राजन । दिशा उसे सताने के लिए किस हद तक जा सकती है, ये आज उसने अपनी आंखों से देख लिया । दिशा और राजन के विवाह को अभी दो बर्ष ही हुए थे । पर इन दो बर्षो में ही उसे क्या कुछ … Read more

दीदी मुनि – अनामिका मिश्रा

दीदी मुनि कहती थी अनुष्का उन्हें। वैसे भी हावड़ा  में बंगाली भाषा में,शिक्षिका को दीदी मुनि कहकर संबोधित किया जाता था।अनुष्का को पता चला। अनुष्का के पिता का तबादला हावड़ा में हुआ था। वहां उसका कहीं दाखिला नहीं हो पा रहा था, क्योंकि वहां के स्कूल का एक नियम था कि, बंगाली भाषा भी पढ़ना … Read more

बहू मुझे जाने के लिए मत कहना… – रश्मि प्रकाश

“ नमस्ते मम्मी जी , आप कब आ रही है..?” कृतिका ने सासु माँ रत्ना जी से पूछा. “ बहू अभी तो मेरी तबियत ठीक नहीं चल रही है… ठीक होते ही खबर करूँगी फिर रितेश से कह कर टिकट करवा देना..।” कराहती सी आवाज़ में रत्ना जी ने कहा. “ ओहह…. सोच रही थी … Read more

कोशिश रंग लाती ही है चाहे गुस्सा ही शांत क्यों न करना पड़े! – अमिता कुचया

रीना जानती है कि बड़े पापा के यहां नहीं जाना है, बाजू में बहुत रौनक और चहल पहल हो रही थी।सब रिश्ते दार आ रहे थे। सब चाचा चाची के बारे में पूछ रहे थे कि वे नहीं आयेंगे क्या? क्योंकि रमा दीदी की शादी थी।रमा दीदी से हमेशा बात होती रहती थी। रीना जानती … Read more

 “इतना सन्नाटा क्यों है…भई” – अनु अग्रवाल

“ये रिमोट वाली कार मेरे पापा लेकर आये थे……मैं पहले खेलूंगा इससे”- राहुल ने चीकू के हाथ से कार छीनते हुए कहा। लेकिन…… भैया ताऊजी ने ये मुझे दी थी…..तो मेरी हुई न….खेलने दो न मुझे- चीकू रुआंसू होकर बोला। राहुल(10) और चीकू(6) दोनों चचेरे भाई हैं….जो एक संयुक्त परिवार में रहते हैं……अब परिवार संयुक्त … Read more

error: Content is protected !!