परिवर्तन – मधु शुक्ला

सीमा की ननद 10 साल बाद आ रहीं थीं। उनके कानूनी स्वभाव के कारण वह उनसे दूर-दूर ही रहती थी। जब तक सासू माँ थीं तब तक तो चल गया दूर रहना। लेकिन उनके गुजरने के बाद तो वह ऐसा नहीं कर सकती थी। इसलिये भगवान से  प्रार्थना कर रही थी। “हे प्रभो दीदी के … Read more

शादी-ब्याह में अगुआई मां भी कर सकती है – डॉ उर्मिला शर्मा

फोन की रिंगटोन बजी तो अनामिका ने देखा उसकी कजन अलका दीदी का फोन था। “नमस्ते दी!…कहिए कैसी है?”- उसने पूछा “सब ठीक है…. एक बात बतानी थी तुम्हें। मेरे बेटे के रिश्ते का साला अमेरिका में इंजीनियर है। आई. आईटीयन है। अपनी आलेख्या के लिए कैसा रहेगा?” “सुनने में तो बहुत अच्छा लग रहा … Read more

सिक्कों का वजन रिश्तों से ज्यादा होता है – सोनिया कुशवाहा 

संस्कारी बेटियां ही संस्कारी बहु बनती हैं। जितना और जैसा अनुभव मायके में मिलता है वही लड़की के लिए उसके ससुराल के लिए सीख होती है। रिश्तों की कोई पाठशाला तो होती नहीं है कि आप अच्छी बहु या बेटी बनने का कोर्स कर लें और बन जाए परफेक्ट बहू। ऐसे ही अपने अच्छे और … Read more

 ‘ ज़िंदगी रंग बदलती है ‘ – विभा गुप्ता

   अक्सर ऐसा होता है कि हम जो चाहते हैं,वो हमें  नहीं मिलता।तब हम ईश्वर से शिकायत करते हैं, फिर वही ईश्वर हमें इतना कुछ दे देता है कि उन्हें समेटने के लिए हमारा दामन कम पड़ जाता है।            दीपा से मेरा परिचय सातवीं कक्षा में हुआ था।वो वनस्थली में नई-नई आई थी और मैं एक … Read more

औलाद बुढ़ापे में कैसे कैसे दिन देखने पर मजबूर करती हैं – शिनम सिंह 

“बेटा!! ये लोग कौन थे,पिछले कुछ दिनों से तू लगातार अनजान लोगों को घर लाता हैं ये चल क्या रहा है??? क्यों आते हैं ये लोग घर पर??? क्या चल रहा हैं तेरे दिमाग में??” कविता जी अपने बेटे ध्रुव से बोलीं. “कुछ नहीं मां.. आप इन सबसे दूर रहो,भजन कीर्तन करने की उम्र हैं … Read more

 बेटा! देखना जल्दी ही सब अच्छा होगा – गुरविंदर टूटेजा

   अमय बेटा इतनी ठंड हैं और तू बिना रजाई ओढ़ें क्यूँ लेटा है…????   रजनी ने बेटे को रजाई ओढ़ातें हुए बोला…!!!!    अमय एकदम चौंक गया और बोला…अरे मम्मी ध्यान ही नहीं रहा बस ओढ़नें ही वाला था…!!!! सिर पर प्यार से हाथ फेरतें हुए बोली…बेटा! चिन्ता मत कर जल्दी ही सब अच्छा होगा…चल सो जा … Read more

 सुखांत??? – कविता भड़ाना

“इस धूप छांव से जीवन में,  होने लगे कैसे कैसे व्यापार प्रभु अर्थी भी अपनी पसंद करो अब, और साजो सज्जा का सामान भी…  मर के देख ना पाया जो कुछ अभी तक,  अब जीते जी देख परख कर जाओ सब”   जीवन की संध्या बेला में, जब परिवार के बड़े – बुजुर्गो की एक … Read more

रानी महल की छबि

छबि आज बहुत गुमसुम थी. वह कोराेना का समयकाल था. जब बाहर बारिश हो रही थी और वह अपनी खिड़की पर बैठ कर छबि गीली मिट्टी की सोंधी सोंधी खुशबू ले रही थी. और चाय की चुस्कियां लेते हुए छबि को अपने पुराने दिन याद आ गए. उतने में छबि के कमरे में गुलाबो आती … Read more

प्यार सबके नसीब में कहां…

दिल तो आखिर दिल है, इस दिल पर किसका जोर है, कभी कभी बस दूरियां और कुछ यादों की एक डोर है. यह कहानी अभिमन्यु और नित्या की है. जो जुड़ कर भी पास नहीं है.  “क्या बात है नित्या आजकल तुम बड़ी खुश और खिली खिली सी रहती हो? और देख रहा हूं की … Read more

मोक्ष  

“क्या मां क्या कहती हो आप? इस बार कुंभ के मेले में जाने के बारे में आपकी क्या इच्छा है? आपने मुझे कई बार ताने दिए है, की बहू को बच्चों को घुमाने लेकर जाता है लेकिन अपनी मां को एक बार गंगा नहाने नहीं लेकर चलता… और गंगा नहीं तो कम से कम हरिद्वार … Read more

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