डबल ड्यूटी-कहानी-देवेंद्र कुमार

लखमा तेजी से हाथ चला रही है। आज उसे जल्दी घर जाना है। कोई मेहमान आने वाला हैं। लेकिन काम तो पूरा करना ही है। लखमा बाज़ार में तीन दुकानों में सफाई का काम करती है। पति मजदूर है। दोनों के काम करने पर भी घर मुश्किल से चलता है। एक बेटा है अमर| दुकानों … Read more

हमें तो बस आपकी बेटी चाहिए – मीनाक्षी सिंह

रमेश जी – अरे भाई साहब ,दहेज की कौन कह रहा हैं ! हमें तो बस अपनी बेटी दे दिजिये ! भूषण जी – वो तो ठीक हैं समधी जी ,पर फिर भी आपकी कोई मांग हो तो बता दिजिये ! जैसे सब बातें साफ रहे ! कोई समस्या ना हो आगे ! रमेश जी … Read more

‘उम्मीद का दिया बुझा दो’ – अनीता चेची

गोरा रंग ,मझोला कद ,चाॅंद सी सूरत 21 वर्षीय हीरामणि का विवाह हीरा से हुआ। संस्कारों से सुसज्जित हीरामणि पूरे परिवार के प्रति समर्पित और अपने पति को परमेश्वर मानने वाली थी। हीरा भी उसे बहुत प्यार करता  परंतु  एक उन्मुक्त पक्षी की तरह आकाश में भी उड़ना  चाहता था । वह किसी भी तरह … Read more

नई उम्मीद

संचिता बड़े-बड़े कदमों से तेज-तेज चलने लगी…आज कोई आटों नहीं मिला पैदल ही घर जा रही थी रात के नौ बजने वाले थे रास्ता सुनसान था…दिसंबर था तो ठंड भी बहुत थी…!!!!    तभी चार नौजवान सामने से आते दिखें…अच्छे लग रहे थे देखने में तो…थोड़ी देर बाद संचिता और वो चारों आमने-सामने थे…पता नहीं क्यूँ … Read more

नहीं हूं मैं “सुपर वुमन” !! – मीनू झा 

क्या ज्योति मैडम…कल भी वो फाइल मेरे टेबल पर नहीं आई जो आपको परसों देने कहा था…क्या चल रहा है यहां ये ऑफिस है या चिड़ियाघर??—बाॅस ने सुबह आते ही ज्योति से सवाल किया। सर…वो फाइल तो मैंने परसों ही रामदीन को दे दिया था–ज्योति आश्चर्य से बोली। हां मैडम आपने दिया तो था..पर बताया … Read more

बेटा, तुझे दिखावा करने की कोई जरूरत नहीं। –  सविता गोयल

 ये क्या भईया !! ना आपने सारे नाते रिश्तेदारों को न्योता दिया और ना हीं भोज का आयोजन सही तरीके से रखा। समाज में क्या इज्जत रह जाएगी हमारी। अरे पैसे कम पड़ रहे थे तो एक बार बोल दिया होता मैं हीं कुछ इंतजाम कर देता….    मेरे ससुर जी भी पापा की तेरहवीं … Read more

“बोझ” – सेतु

शहर के बड़े रईसो में गिने जाने वाले राजकुमार जैन जी के इकलौते पुत्र यश से विवाह की बात पक्की होते ही अर्चना को चारों तरफ से बधाई संदेश आने लगे थे.सोशल मीडिया में तो जैसे शुभकामनाओं का तांता सा लगा हुआ था. यश और अर्चना की मुलाकात कुछ महीनों पहले एक विवाह समारोह में … Read more

बाँसुरी – सेतु

नींद के मामले में वैसे तो मैं बदकिस्मत नही रहा हूँ. बिस्तर पर आते ही आंख लग जाया करती है. पर उस दिन नींद के साथ आंखमिचौली कुछ ज्यादा ही हो रही थी.खिड़की से पर्दा हटा कर देखा तो सामने के मकानों में रात के वक्त जलने वाले बल्ब अभी जगमगा रहे थे.शर्दी की रात … Read more

उम्मीद का दामन – निभा राजीव “निर्वी”

अपने आठ माह के बच्चे को गोद में लिए कमली ने एक बार फिर अपने खेतों को विवश आंखों से निहारा। बारिश के अभाव में शुष्क होकर मानो धरती का सीना फट गया था। जगह-जगह दरारें फटी हुई थी। कमली को ऐसा लगा मानो वे दरारें जमीन के साथ-साथ आंतों में भी पैठकर आंतों को … Read more

उम्मीद की एक नई किरण”दक्षा”  – गीता वाधवानी

माता-पिता का लाडला, इकलौता बेटा दक्ष पढ़ाई में बहुत ही होशियार था। 12वीं कक्षा तक 98% तक नंबर लाता रहा और उसके बाद सीए पूरी करने के बाद आज कनाडा जा रहा था। वहां पर आगे की पढ़ाई करने के बाद वहीं के एक प्रसिद्ध बैंक में उसकी जॉब लग जाएगी ऐसा उसने अपने माता-पिता … Read more

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