कौन घर परिवार के झंझट में पड़े –  चाँदनी झा 

देखो संध्या, यहां पूछ-पूछ कर सब काम करती रहोगी, तो बस जिंदगी भर पूछते रह जाओगी। मेरी बात मानो, जो मन में आए करो, और देवर जी से भी कहो, वो अच्छा कमाते हैं, तुम्हें अपने साथ रखे। मंजू, संध्या की जेठानी,  संध्या को समझा रही थी। हां जीजी, पर….पर-वर कुछ नहीं, मैं तुमसे पहले … Read more

अकेली मां बेहतर है या धोखेबाज पिता का साथ – नीतिका गुप्ता 

सुबह-सुबह की आपाधापी में श्रुति अपने सारे काम जल्दी जल्दी निपटा रही थी। बेटी काव्या को स्कूल बस में बैठा दिया था और अब वह चाय का कप हाथ में लेकर काव्या का दोपहर का लंच और अपने लिए टिफिन भी तैयार कर रही थी। श्रुति की रोज की यही दिनचर्या थी सुबह जल्दी उठकर … Read more

…तो रिश्ता एक तरफा कैसे ? – संगीता अग्रवाल 

” कैसी हो बेटा ? ससुराल में सब ठीक तो हैं ना कोई परेशानी तो नहीं !” संध्या जी ने अभी दो महीने पहले ब्याही बेटी शीना से फोन पर पूछा। ” मम्मी बस पूछो मत दो महीने में ही इस ससुराल नाम से इतना उकता गई हूं कि सोचती हूं शादी ही क्यों की … Read more

सोच पर पड़े पत्थर कब हटाओगी? – सविता गोयल 

“ये देखो, फिर रास्ते में ये खिलौने बिखरे पड़े हैं। इस बहू को पता नहीं कब अकल आएगी। इतना भी ध्यान नहीं रख सकती कि कोई इनमें उलझ कर गिर जाएगा। मालती जी गुस्से में जोर से बोलीं तो उनकी बहु नैना भागती हुई आई और खिलौने समेटने लगी। “मां जी वो चीकू बार-बार बिखेर … Read more

नई शुरुआत – संगीता त्रिपाठी

“क्या लिख रही नीरा, इतनी रात में सामानों की फेहरिस्त बना रही हो,”राकेश जी ने पूछा!!         “न…. सामानों की फेहरिस्त नहीं, अपने शौक और जरुरत की फेहरिस्त बना रही हूँ “…      “मै समझा नहीं, तुम्हारी कौन से शौक और जरुरत है, सब तो पूरी होती है, वैसे भी अब सांध्य बेला पर क्या … Read more

खुशियों की उम्मीद – डॉ .अनुपमा श्रीवास्तवा 

  आर्मी हॉस्पीटल में लेबर रूम के बाहर विशाल अपनी माँ के साथ बैठा हुआ था तभी अंदर से नर्स अपने हाथों में नवजात शिशु को लेकर बाहर निकली उसे देखते ही दोनों खड़े हो गए। नर्स ने बच्चे को दिखाते हुए कहा-” बधाई हो आंटी जी पोता हुआ है।” रागिनी जी पोते को लेने … Read more

मेरी बहुओं ने मुझे कहाँ फँसाकर छोड़ दिया है? – गीतू महाजन

कमलजीत कौर बहुत खुश थी..उसकी खुशी का कारण यह था कि उसके छोटे बेटे परमिंदर की शादी बहुत अच्छे से हुई थी। पिछले कुछ दिनों से वह अपने छोटे बेटे की शादी में व्यस्त थी और अब सभी रिश्तेदार भी खुश हैं। शादी बहुत अच्छी हुई और लड़कियों ने भी पार्टी का बहुत अच्छे से … Read more

देवरानी-जेठानी रिश्तों की जुगलबन्दी  –  पूजा अरोरा

“अरे भाभी! मैंने तो सोचा था कि अबकी बार जब मैं आऊंगी तो आपको दोनों बहुओ से सेवा करवाते हुए पाऊंगी परंतु यह क्या यहां तो अब उलटी गंगा बह रही है दो-दो बहुओं के होते हुए” उषा ने अपनी भाभी विमला को कहा | विमला जी बस मुस्काई मगर कुछ बोली नहीं | दरअसल … Read more

सासू मां आपने मुझे उड़ना सिखाया – सरगम भट्ट 

रीमा की सगी मां नहीं थी , उसकी सौतेली मां रेनू थी जिसके खुद के दो बच्चे थे ! एक बेटा मोहक और एक बेटी सुहानी ! रीमा रेनू को फूटी आंख ना सुहाती थी , रेनू सिर्फ अपने दोनों बच्चे मोहक और सुहानी से ही प्यार करती थी । रीमा सारा दिन घर का … Read more

रिश्तों की अहमियत – शिखा जैन

“भाभी,आप भैया को छोड़कर अपने घर चली जाओ।मैं भी हमेशा के लिए यहाँ रहने आ गई हूँ।” आरती के यह कहने पर रीना भाभी जोर जोर से हंसने लगी जैसे आरती ने कोई चुटकुला सुनाया हो। “क्या भाभी,आप भी?इतनी सीरियस बात पर भी कोई हंसता है क्या” आरती झुँझला पड़ी। “अभी-अभी भैया आप से लड़कर … Read more

error: Content is protected !!