टूटा हुआ भरोसा हिम्मत तोड़ देता है – गुरविंदर टुटेजा

#भरोसा  रूही के पापा का यूँ असमय जाना उसके लिये बहुत दुखदाई था पर उससे ज्यादा परेशान उसे मम्मी का सुध-बुध खो देना कर रहा था…ऐसा लग रहा था कि महज चौदह वर्ष की उम्र में ही उसके साथ ऐसा क्यूँ हुआ…!!!!   पापा के जाने के बाद उनके ही परिवार ने मम्मी को भरोसे में … Read more

कांच के टुकड़े को हीरा समझने की भूल की!! – मनीषा भरतीया

 कौशल्या जी अपने भरे पूरे परिवार में पति और बच्चों के साथ खुशहाल जीवन व्यतीत कर रही थी |,  उनके परिवार  में पति राजेश दो बेटे…बड़ा निलेश और….छोटा शैलेश बहु नीलिमा और पोता पोती बबलू और पिंकी थे |निलेश की शादी को 4 साल हो चुके थे नीलिमा बहुत ही अच्छी लड़की थी घर के … Read more

बदनामी के डर से चुप नहीं रहूंगी!! – अर्चना खंडेलवाल

गलती इंसान के जीवन का एक हिस्सा है, और मुझसे भी गलती हो गई, ये गलती मैंने तो नहीं की थी, कहते हैं समय हर घाव भर देता है पर निशान तो रह ही जाते हैं, पिछले महीनों हुई घटनाएं रोली के दिमाग में घुमने लगी। जब वो कॉलेज में नई थी तो कॉलेज देखकर … Read more

मेरी माँ बनने की कोशिश मत करो …. सविता गोयल 

”  ओह मैं भूल कैसे गई कल निर्जला एकादशी  है  !!!  रश्मि के ससुराल फल मिठाईयाँ और शगुन भेजना है  …..। सुनिए… आप अभी ही जाकर सारा सामान ले आईये  सुबह देर हो जाएगी ।  ,, ” ओ हो मीरा… तुम बेकार में इतनी टेंशन लेती हो और साथ साथ मुझे भी देती हो  । … Read more

किसी के दिए के मोहताज नहीं है हम…… भाविनी केतन उपाध्याय 

  ” बहू,ये साड़ी तो हम ने दीपू बिटिया को दी थी फिर यह तुम्हारे पास कैसे ? कितनी बार कहा है कि बेटियों को दिया हुआ वापस नहीं लेते ” सुमन जी ने अपनी बहू हेतल से कहा।   ” मांजी,यह मैंने खुद से वापस नहीं मांगा है…. वो खुद वापस कर के गई … Read more

देवर जी  ससुर बने फिरते थे और ननद रानी आप मेरी सास..! – कामिनी सजल सोनी

रेवती को समझ आ गया उसे अब क्या करना है अब जमाना बदल गया है अगर कोई पुरानी घिसी पिटी बातों का बेसुरा राग अलापता है तो उसे कैसे सुर में लाकर समय के साथ चलना सिखाना है मन ही मन उसने सोच लिया..! दरअसल रेवती के छोटे भाई रौनक की शादी में बड़ी भाभी  … Read more

आप भी बनिए ना राजकुमार – सोनिया कुशवाहा

मेरी बेटी के नामकरण का उत्सव चल रहा था, घर खचाखच रिश्तेदारों से भरा हुआ था। पास और दूर के काफी रिश्तेदार हॉल में जमा थे।चाय कॉफी के साथ गर्मा गरम मुद्दों पर चर्चाओं और बहस का रसपान जारी था।अचानक एक भले सज्जन पुरुष जो कि शिक्षित होने के साथ ही उच्च पद पर आसीन … Read more

पहले दोस्ती फिर पति पत्नी का रिश्ता। – संगीता अग्रवाल 

दरवाजे के खुलने की आवाज़ आते ही आराम से अध लेटी नववधु संजना ने उठकर अपना घूँघट ठीक करना चाहा । “नही नही रहने दीजिये इस फॉर्मेलिटी की कोई जरूरत नही वैसे भी मैने आपको कितनी बार तो देख लिया है !” रोहन मुस्कुराते हुए बोला। “जी !” संजना ने इतना बोल सिर झुका लिया। … Read more

भरोसा – मनप्रीत मखीजा

दीदी , ये रुपए आप अपने पास ही रख लो।” मधु की गृह सहायिका ने मधु द्वारा दी जा रही पगार के साथ कुछ मुड़े तुड़े नोट मिलाकर  पुनः मधु की तरफ बढ़ाते हुए कहा।  “क्यों बबली! तुझे रुपए की जरूरत ना है क्या इस बार!”  “दीदी, रुपयों की जरूरत तो कुबेर और लक्ष्मी जी … Read more

‘खुद पर भरोसा’ – अनीता चेची

जिया अब 16 वर्ष की हो गई थी। उसका इस तरह से  अल्हड़ पन, उछलते, कूदते पूरे घर में घूमना दादी को बिल्कुल भी पसंद नहीं था।  वे बार-बार  कहती जिया कुछ घर का काम भी किया करो। अगले घर जाकर नाम बदनाम करोगी।  जिया हंसी में उड़ा देती।  अरे !नहीं अम्मा देखना  मैं आपका … Read more

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