जीना इसी का नाम है – कुमुद मोहन

बड़े दिनों बराबर वाला फ्लैट खाली पड़ा था। मधु और सुरेश जी अकेले रहते। बच्चे दोनों बाहर थे कभी-कभार ही आ पाते। मधु का मन था कोई ढंग उनकी हमउम्र का आ जाए तो थोड़ी कंपनी मिल जाए। फिर एक दिन जैसे भगवान ने उसकी सुन ली। सामने खड़ा ट्रक देखा जिसमें से सामान उतर … Read more

पत्नी धूप तो पति छांव… – भगवती सक्सेना गौड़

यूट्यूब में गाना लगाए हसीन यादों में खोए थे, सीनियर सिटीजन वर्मा साहब, बीच बीच मे गुनगुना भी रहे थे… … बड़े रंगीन ज़माने थे, तराने ही तराने थे मगर अब पूछता है दिल, वो दिन थे या फ़साने थे फ़क़त इक याद है बाकी !! लो आ गयी, उनकी याद वो नही आये… आप … Read more

बेटी, तू भी तो यही चाहती थी ना!! – सविता गोयल 

”  वाह मां, ये साड़ी तो बहुत जंच रही है आप पर । कहां से लाई हो??” ” अरे बेटा, मैं कहां बाजार में जाती हूं .. पहले तू ला देती थी अब तेरी भाभी ला देती है। सच में बहुत अच्छी पसंद है उसकी। देख तेरे लिए भी दो साड़ियां ला कर रखी है … Read more

तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है – सोनिया निशांत कुशवाहा

स्त्री होना इतना सरल कहाँ है। उस पर भी वह स्त्री जो अपनी पलकों में आसमान को छू लेने का स्वप्न बसाए हो उसके लिए जीवन दुरुह हो जाता है। समाज हो या परिवार सभी ने सदा से ही नारी के लिए दायरे तय किए हुए हैं। एक महिला से अपेक्षा यही होती है कि … Read more

हर रिश्ते में थोड़ा स्पेस जरूरी है – संगीता अग्रवाल 

” देखो प्राची ये अनामिका पता नहीं इतना सज धज कर कहां जा रही है ?” प्राची अपने घर के दरवाजे पर खड़ी थी तब उसकी पड़ोसन नीतू उससे बोली। ” जा रही होगी किसी काम से या किसी फंक्शन में !” प्राची लापरवाही से बोली। ” अरे ये तो अपने मिस्टर के बिना कहीं … Read more

मोह मोह के धागे – दीपा माथुर

मम्मी जी ,पापा जी को सुबह सुबह चाय की प्याली पकड़ाते हुए छवि बोली ” मम्मी जी आज छोले भटूरे बना लू?” मम्मी जी ने नाक भो सिकोड़ कर कहा “ अब हमारी उम्र तो चटखारे लेने की है नही। सिंपल सी घीया की सब्जी और रोटी बना लो। वैसे भी छोलेभटूरे में तेल बहुत … Read more

  नेकी का बदला – लतिका श्रीवास्तव 

आकाश हतप्रभ था स्तब्ध था …विशाल का बेजान शरीर उसके समक्ष था कितना भरोसा था विशाल को अपने सिद्धांतों पर …हमेशा कहता था अच्छा करोगे तो अच्छा ही मिलेगा…अपने कर्तव्यों को निष्ठा से करोगे तो निष्ठा ही मिलेगी…समाज भ्रष्ट नहीं  होता है कमी है भ्रष्ट लोगों के स्थान पर सदनियत लोगों के सामने आने की…..! … Read more

 ” गोलगप्पे खिलाएंगी।” – उषा भारद्वाज

संजना अपने कमरे में अलमारी में कपड़े एडजस्ट करके रख रही थी तभी उसको बाहर से कुछ आवाजें सुनाई पड़ीं। उसकी दादी मां और सासू मां के बीच बात हो रही थी ।  दादी मां सासु मां से कह रही थी-” बेटा एक हफ्ता हो गया है मैं सत्संग नहीं गई हूं, आज तो तुम … Read more

भरोसा –  श्रीमती सुषमा मिश्रा : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi :  एक बड़े घने जंगल में मैं “बांस”का पेड़ अपने परिवार के साथ एक कोने में रहता था। मैं अपने  चारों ओर खड़े अनेको छोटे-बड़े पेड़ ,पौधों को की खूबसूरती को निहारता रहता था और  मन ही मन सोचता था  कि ईश्वर ने  मुझे इतना बदसूरत और निरर्थक  क्यों बनाया जहां … Read more

यात्रा-पथ – नरेश वर्मा

कर्नाटक एक्सप्रेस एक ही लय-ताल से भाग रही थी ।सामने फैले हुए मैदान, वृक्ष, ताल-तलैया सब भाग रहे थे ।खिड़की के पास बैठा वह ,इस भागते दृश्य को निर्लिप्त भाव से देख रहा था ।कहीं कुछ नहीं भाग रहा ,यह दृष्टि-भ्रम मात्र है ।यदि कोई भाग रहा है तो वह स्वयं ।क्यों भाग रहा है … Read more

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