गर्म गर्म पुरिया – दीपा माथुर

मनोरमा जी ने अपने घर में सुंदर कांड का पाठ रखा था। बड़े जोश से तैयारियो में जुटी थी। तभी पड़ोस में रहने वाली नेहा वहां पहुंच गई । मनोरमा जी अपनी बहुओं को हिदायत दे रही थी। “अब सब अच्छी सी तैयार होकर आ जाओ। सुन्दर सुन्दर साड़ी पहनना । ओर टेंट में व्यवस्था … Read more

वक्त हमेशा एक सा नहीं रहता .. – रश्मि प्रकाश

मौसम हमेशा एक सा नहीं रहता कांता …आज धूप है तो कल छाँव भी होगी… एक दिन तेरी किस्मत में भी अच्छे दिन आयेंगे… तू चिंता क्यों करती हैं हम है ना तेरे साथ… जाने दें तेरे पति ने जब साफ साफ कह ही दिया उसको तेरे साथ नहीं रहना… फिर उसको जिसकेसाथ जाना जाने … Read more

 ऐसा क्यों होता है – नूतन सक्सेना 

भला कोई इतना नीचे कैसे गिर सकता है, सोच रहा था राजन । दिशा उसे सताने के लिए किस हद तक जा सकती है, ये आज उसने अपनी आंखों से देख लिया । दिशा और राजन के विवाह को अभी दो बर्ष ही हुए थे । पर इन दो बर्षो में ही उसे क्या कुछ … Read more

दीदी मुनि – अनामिका मिश्रा

दीदी मुनि कहती थी अनुष्का उन्हें। वैसे भी हावड़ा  में बंगाली भाषा में,शिक्षिका को दीदी मुनि कहकर संबोधित किया जाता था।अनुष्का को पता चला। अनुष्का के पिता का तबादला हावड़ा में हुआ था। वहां उसका कहीं दाखिला नहीं हो पा रहा था, क्योंकि वहां के स्कूल का एक नियम था कि, बंगाली भाषा भी पढ़ना … Read more

बहू मुझे जाने के लिए मत कहना… – रश्मि प्रकाश

“ नमस्ते मम्मी जी , आप कब आ रही है..?” कृतिका ने सासु माँ रत्ना जी से पूछा. “ बहू अभी तो मेरी तबियत ठीक नहीं चल रही है… ठीक होते ही खबर करूँगी फिर रितेश से कह कर टिकट करवा देना..।” कराहती सी आवाज़ में रत्ना जी ने कहा. “ ओहह…. सोच रही थी … Read more

कोशिश रंग लाती ही है चाहे गुस्सा ही शांत क्यों न करना पड़े! – अमिता कुचया

रीना जानती है कि बड़े पापा के यहां नहीं जाना है, बाजू में बहुत रौनक और चहल पहल हो रही थी।सब रिश्ते दार आ रहे थे। सब चाचा चाची के बारे में पूछ रहे थे कि वे नहीं आयेंगे क्या? क्योंकि रमा दीदी की शादी थी।रमा दीदी से हमेशा बात होती रहती थी। रीना जानती … Read more

 “इतना सन्नाटा क्यों है…भई” – अनु अग्रवाल

“ये रिमोट वाली कार मेरे पापा लेकर आये थे……मैं पहले खेलूंगा इससे”- राहुल ने चीकू के हाथ से कार छीनते हुए कहा। लेकिन…… भैया ताऊजी ने ये मुझे दी थी…..तो मेरी हुई न….खेलने दो न मुझे- चीकू रुआंसू होकर बोला। राहुल(10) और चीकू(6) दोनों चचेरे भाई हैं….जो एक संयुक्त परिवार में रहते हैं……अब परिवार संयुक्त … Read more

बहुएँ नहीं बेटियाँ हैं – के कामेश्वरी

सूर्य प्रकाश जी रेलवे में मेल गार्ड थे । उनके चार लड़के और चार लड़कियाँ थीं । पत्नी विशाला ने घर को बाँधकर रखा था । वह बहुत ही बड़े घर में दस भाई बहनों में सबसे छोटी लाड़ली थी । यहाँ उन्हें तकलीफ़ तो ज़रूर होती थी क्योंकि सूर्य प्रकाश जी का परिवार छोटा … Read more

यादें न जाए बीते दिनों की -के कामेश्वरी

सन् १९८० की बात है। जब मैं कॉलेज में पढ़ती थी। जैसे ही मैं कॉलेज से घर पहुँची। मैंने देखा माँ मुस्कुरा रही है और कुछ इशारा कर रही थी। पहले तो मुझे समझ नहीं आया फिर मुझे लगा कि बेडरूम की तरफ़ इशारा कर रही थी। मैं झट से बेडरूम की तरफ़ भागी और … Read more

आखिर उमा जी चली गयी -मीनाक्षी सिंह

रवि – पापा ,,हमारा भी तो कुछ सोचिये !! रजनीश जी  ( रवि के पापा ) – सोच की मुद्रा से बाहर आते हुए,,किसकी बात कर रहे हो बेटा,,मैं कुछ समझा नहीं !! रवि – इतने भी नासमझ मत बनिये पापा,,आपको अच्छे से पता हैं मैं माँ के विषय में बात कर रहा हूँ !! … Read more

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