‘ ज़िंदगी रंग बदलती है ‘ – विभा गुप्ता

   अक्सर ऐसा होता है कि हम जो चाहते हैं,वो हमें  नहीं मिलता।तब हम ईश्वर से शिकायत करते हैं, फिर वही ईश्वर हमें इतना कुछ दे देता है कि उन्हें समेटने के लिए हमारा दामन कम पड़ जाता है।            दीपा से मेरा परिचय सातवीं कक्षा में हुआ था।वो वनस्थली में नई-नई आई थी और मैं एक … Read more

औलाद बुढ़ापे में कैसे कैसे दिन देखने पर मजबूर करती हैं – शिनम सिंह 

“बेटा!! ये लोग कौन थे,पिछले कुछ दिनों से तू लगातार अनजान लोगों को घर लाता हैं ये चल क्या रहा है??? क्यों आते हैं ये लोग घर पर??? क्या चल रहा हैं तेरे दिमाग में??” कविता जी अपने बेटे ध्रुव से बोलीं. “कुछ नहीं मां.. आप इन सबसे दूर रहो,भजन कीर्तन करने की उम्र हैं … Read more

 बेटा! देखना जल्दी ही सब अच्छा होगा – गुरविंदर टूटेजा

   अमय बेटा इतनी ठंड हैं और तू बिना रजाई ओढ़ें क्यूँ लेटा है…????   रजनी ने बेटे को रजाई ओढ़ातें हुए बोला…!!!!    अमय एकदम चौंक गया और बोला…अरे मम्मी ध्यान ही नहीं रहा बस ओढ़नें ही वाला था…!!!! सिर पर प्यार से हाथ फेरतें हुए बोली…बेटा! चिन्ता मत कर जल्दी ही सब अच्छा होगा…चल सो जा … Read more

 सुखांत??? – कविता भड़ाना

“इस धूप छांव से जीवन में,  होने लगे कैसे कैसे व्यापार प्रभु अर्थी भी अपनी पसंद करो अब, और साजो सज्जा का सामान भी…  मर के देख ना पाया जो कुछ अभी तक,  अब जीते जी देख परख कर जाओ सब”   जीवन की संध्या बेला में, जब परिवार के बड़े – बुजुर्गो की एक … Read more

रानी महल की छबि

छबि आज बहुत गुमसुम थी. वह कोराेना का समयकाल था. जब बाहर बारिश हो रही थी और वह अपनी खिड़की पर बैठ कर छबि गीली मिट्टी की सोंधी सोंधी खुशबू ले रही थी. और चाय की चुस्कियां लेते हुए छबि को अपने पुराने दिन याद आ गए. उतने में छबि के कमरे में गुलाबो आती … Read more

प्यार सबके नसीब में कहां…

दिल तो आखिर दिल है, इस दिल पर किसका जोर है, कभी कभी बस दूरियां और कुछ यादों की एक डोर है. यह कहानी अभिमन्यु और नित्या की है. जो जुड़ कर भी पास नहीं है.  “क्या बात है नित्या आजकल तुम बड़ी खुश और खिली खिली सी रहती हो? और देख रहा हूं की … Read more

मोक्ष  

“क्या मां क्या कहती हो आप? इस बार कुंभ के मेले में जाने के बारे में आपकी क्या इच्छा है? आपने मुझे कई बार ताने दिए है, की बहू को बच्चों को घुमाने लेकर जाता है लेकिन अपनी मां को एक बार गंगा नहाने नहीं लेकर चलता… और गंगा नहीं तो कम से कम हरिद्वार … Read more

बस खेते जाओ नैया, चाहे धूप मिले या छैया – पुष्पा जोशी

रिया को कपड़े धोते हुए देखकर अविनाश ने कहा- ‘यह क्या पल्लवी, तुम हमेशा मेरी रानी बेटी से काम करवाती रहती हो, कभी कपड़े धुलवातीहो, कभी झाड़ू निकलवाती हो, कभी खाना बनाना सिखाती हो, क्या जरूरत है इसकी? रिया हमारी इकलौती बेटी है, घर में इतने काम करने वाले हैं,उसे क्या जरूरत है काम करने … Read more

कभी सुख कभी दुख – गीता वाधवानी

बारिश का मौसम होने के कारण भारत में कई शहरों में नदी नाले उफान पर थे। भोपाल की बेतवा नदी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही थी। इस समय उसका रूप इतना विकराल हो चुका था कि किसी की भी रूह कांप जाए।  ऐसे माहौल में बेतवा के किनारे पर खड़ी सुरभि क्या … Read more

मन की बातें मन में ही नहीं रखिए – के कामेश्वरी 

रात के नौ बजे थे किरण सुबह से ऑफिस और घर का काम करके थक गई थी वैसे भी उसका सातवाँमहीना चल रहा था । इसलिए अब सोना चाह रही थी तभी फ़ोन की घंटी बजी उसने फ़ोन उठाकर हेलोकहा दूसरी तरफ़ से प्रशांति आंटी थी । हेलो आंटी !! इतनी रात गए आपने फ़ोन … Read more

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