“बुढ़ापा भी धूप छांव से कम नहीं होता ” – अमिता कुचया
एक दमयंती जी जिनका घर में जो दबदबा रहा है उसे देखते ही बनता था।उनकी बुलंद आवाज ही काफी थी।वे धार्मिक प्रवृत्ति की महिला थी। वो दूरदर्शी होने के साथ सत्यनिष्ठ थी। उनसे झूठ बर्दाश्त नहीं होता था।पर कहते हैं किस्मत के लिखे को कौन बदल पाया। उनके घर में दो बहू बेटे हैं उनका … Read more