यादो का पन्ना – श्रेया त्रिवेदी 

मेरे प्यारे पापा       जन्मदिन की शुभकामनाएं आपको कैसे दू? क्या लिखू क्या नहीं? लिखते हुए भी आँखों से गिरती धारा अक्षरों को मिटा देती है।  मेरे पिताजी एक सरकारी अफसर थे। घर के सामने एक सरकारी गाडी और दो सहायक 24*7 साथ रहते थे। हम बच्चो का जीवन कैसे बीता यह सिर्फ चंद शब्दों में … Read more

चाहत पाने का नाम नहीं होता – अर्चना खंडेलवाल 

मीरा के जीवन के उतार-चढ़ाव  ने उसे रिश्तों का अच्छा पारखी बना दिया था। समझदार होते ही वह अपना खर्चा निकालने लगी थी। मौहल्ले के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर उसने अच्छी-खासी रकम जमा कर ली थी। पढ़ाने के दौरान ही उसने एक प्राइवेट स्कूल में टीचर की नौकरी कर ली।मां खुश नहीं थी, उन्हें लगता … Read more

कृत्रिम दीवार – बालेश्वर गुप्ता

       ये भी अजीब है जब उम्र बढ़ने लगती है तो मन मस्तिष्क में अजीब सा परिवर्तन आने लगता है।जीवन की सांसें कम होने के अहसास मात्र से चाहते भी बढ़ जाती है।        मुन्ना अपने ऑफिस के लिये प्रातः7 बजे घर से निकल जाता है, वापसी का कोई समय नही।उसके पास शनिवार और रविवार का समय … Read more

चाहत – डाॅ संजु झा

चाहत की कोई  सीमा नहीं होती है। इच्छाएँ अनंत हैं।उन पर लगाम लगाना आवश्यक है।कभी-कभी मनुष्य अपनी असीम तथा फालतू चाहत के हाथों की कठपुतली बनकर जिन्दगी भर कष्ट उठाता है।अंत में पश्चाताप के सिवा उसके हाथों में कुछ नहीं रह जाता है। आज मैं बेटे की चाहत सम्बन्धी एक कथा लेकर उपस्थित हूँ।रंजना जी … Read more

खुद की सैंटा – गीतू महाजन

क्रिसमस की छुट्टियों में अवनि घर आई हुई थी और उसके आने पर घर की रौनक देखते ही बनती थी।अवनि की मां नीलिमा जी और पिता सुबोध जी दोनों ही बहुत खुश नज़र आ रहे थे।अवनि के घर आने से पहले ही नीलिमा जी ने उसके लिए उसकी पसंद के ढेरों पकवान बनाकर रख दिए … Read more

कभी कभी छोटी सी चाहत पूरी होने में बरसों लग जाते हैं – शीनम सिंह

मां हमारे स्कूल वाले पिक्चर दिखाने लेकर जा रहे हैं, मैं भी उनके साथ जाना चाहती हूं,मुझे पैसे दो ना! बहुत मन हैं बड़े पर्दे पर फिल्म देखने का” मीना अपनी मां से बोली “कोई जरूरत नहीं हैं कहीं जाना की और ऐसी बातें तेरे पिता जी के सामने मत करना वरना मुझे भी डांट … Read more

चाहतों का आशियाना – तृप्ति शर्मा

ऋचा का बचपन आर्थिक तंगी के कारण बड़ा सादा सा बीता ।जरूरतों की चीजें ही बड़ी मुश्किल से जुड़ पाती ‌मां पापा दोनों ही बड़ी जी तोड मेहनत करते।तब जाकर चार बच्चों को साधारण सी पढ़ाई के साथ एक साधारण जिंदगी दे पा रहे थे।        ऋचा सभी भाई बहनों में सबसे छोटी थी ।जब कभी … Read more

चाहत है ख़ुशियों वाला घर मिले नौकरों वाला नहीं…. – रश्मि प्रकाश 

 “वह हमारे सपनों का घर था.. और आज उस घर को यूँ तोड़ फोड़ कर के नया रंग रूप देना ज़रूरी था क्या… अरे बच्चे कितने दिन हीहमारे पास में रहेंगे…..आपको नहीं लगता ये निर्णय हम बहुत जल्दी में कर रहे … ।”अपने पति से कहती कल्याणी जी अपने सपनों केघर को निहार रही थी  … Read more

चाहत – मेरा भी सम्मान हो – अमिता कुचया

  मीनल  और रीतिका अच्छी सहेली है।मीनल गरीब परिवार से हैं। जबकि रीतिका अच्छे भरे पूरे परिवार से हैं उसके यहां कोई कमी नहीं है पर उसकी मां का स्वभाव बिल्कुल ही अच्छा नहीं है वेअपने पैसे के घमंड के कारण कभी कोई  गरीब की बेइज्जती करने से नहीं चूकती। जबकि मीनल एक मध्यम वर्गीय … Read more

एहसास और अल्फाज़ – ऋतु गुप्ता

शगुन जल्दी जल्दी अपना काम निपटा रही थी, क्योंकि उमस जोरों पर थी, लगता था आज बारिश जरूर आएगी। शगुन का पति शरद भी आजकल घर से ही काम कर रहा था, तभी बारिश शुरू हो गई, शगुन भागकर आंगन में पड़े कपड़े समेटती है, तभी शरद ने आवाज लगाई, शगुन जरा एक कप मसाला … Read more

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