माँ – कल्पना मिश्रा 

लोग इकट्ठे हो रहे थे। चिरनिद्रा में लीन माँ की अंतिम यात्रा की तैयारी शुरू होने लगी। उनको नहलाया जा रहा था.. वैसे तो ये काम बहुयें करती हैं और देवरानी अपना फर्ज़ निभा भी रही थी लेकिन मैं तो बस पत्थर सी बनी माँ को देखे जा रही थी।तब मात्र साढ़े चौदह बरस की … Read more

दमयंती जी की चाहत ‘ – विभा गुप्ता

        हर इंसान की कोई न कोई इच्छा अवश्य होती है और वह उसे पूरी करने अथवा प्राप्त करने की पूरी कोशिश करता है।लेकिन कुछ लोग अपनी चाहत को पाने के लिए हद से आगे भी गुजर जाते हैं।इस कहानी की पात्र दमयंती जी की भी एक चाहत थी।           अपने माता-पिता की इकलौती संतान थी … Read more

बस कुछ शब्द दूरियां मिटा देते हैं – सविता गोयल

” हैलो नेहा ….” ” हां, बुआ नमस्ते , कैसी हैं आप??  और केशव भईया की शादी की तैयारियां कैसी चल रही हैं ?” अपनी इकलौती और प्यारी बुआ की आवाज सुनते हीं चहकते हुए नेहा पूछ बैठी। ” ठीक हूं नेहा और शादी की तैयारियां भी चल रही हैं लेकिन …. ,, ” लेकिन … Read more

पुरुष – कंचन श्रीवास्तव 

बढ़ती उम्र ने अमन को मानों खामोश कर दिया। जबकि कमी किसी चीज की नहीं है।कभी कभी उसे देख के लगता है उसकी जिंदगी में कोई है।फिर लगता है नहीं नहीं ऐसा अगर होता तो बताता। क्योंकि वो हमेशा से हर एक बात मुझसे बताता आया है मुझे अच्छे से याद है कि जब वो … Read more

बेटियों की चाहत – रोनिता कुंडू

मम्मी..! दादी..! देखिए आपकी बेटी डांस में प्रथम आई है, अब मैं नेशनल स्टेज पर डांस करूंगी… प्रियंका ने अपनी मां (रेनू) और दादी (सविता जी) से कहा रेनू:  वाह..! मेरा बच्चा.. शाबाश… ऐसे ही आगे बढ़ते रहो… मेरा आशीर्वाद हमेशा तुम्हारे साथ है.. सविता जी:   क्या आशीर्वाद दे रही हो…? मां, बेटी तो … Read more

रखवाली – कमलेश राणा

पहाड़ों पर बर्फबारी हो रही थी जिससे मैदानी इलाकों में भी ठंड का कहर बढ़ गया था। हाड़ कंपा देने वाली सर्दी पड़ रही थी। लोग रजाई कंबल में दुबके हुए थे बाहर निकलने का मन ही नहीं करता। ऐसी ही एक सुबह खिड़की से लोगों की आवा जाही की भनक मिली, खोलकर देखा तो … Read more

*कापुरुष* – मुकुन्द लाल

   रात के सन्नाटे को चीरती हुई कई लोगों की  मिली-जुली आवाजें “रिक्शा रोको।” ने रिक्शे पर बैठे दम्पति को चौंका दिया। रिक्शावाला भी शायद भयभीत हो गया था। पैडल पर उसने दबाव बढ़ा दिया था।  सहसा अंधेरे के बीच से कई साये एक साथ उभर आये। उनमें से दो ने दौड़कर रिक्शे की हैंडिल … Read more

‘ संस्कार ‘ – विभा गुप्ता

 ” मालकिन, चार बजने को आये हैं, आप कहें तो आरती की थाली तैयार कर देती हूँ।दीपक भैया बहुरानी को लेकर आते ही होंगे।” गृहसेविका नंदा ने जब अपनी मालकिन से पूछा तो देविका जी ने बेमन-से उत्तर दिया, ” इसकी कोई आवश्यकता नहीं है नंदा,नई बहुरानी तो नये विचारों वाली विदेशी है। वो भला … Read more

उसके चेहरे पर डर साफ़ दिख रहा था – के कामेश्वरी 

किरण अपने पति की मृत्यु के बाद वह कुछ ज़्यादा ही चिड़चिड़ी हो गई थी । उसके घर में सास और बेटा ही थे परंतु उसे लगता था कि वह बहुत सारा काम कर रही है इसलिए सुबह से ही अपनी सास से लड़ती रहती थी । सास बहू के बीच पहले भी पटती नहीं … Read more

तलाश (कहानी ) – अंतरा 

दस लड़कियों का एक ग्रुप हंसता -ठिठोली करता पहाड़ियों पर चल रहा था। सभी लड़कियां सेल्फी लेने में व्यस्त हैं और प्राकृतिक छटा को निहार कर विस्मृत हो रही हैं लेकिन एक लड़की बिना किसी विस्मयी भाव के प्रकृति की फोटो लेने में व्यस्त है! वह हर उस छोटी चीज की फोटो ले रही है … Read more

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