हां यही प्यार है – डा.मधु आंधीवाल

नीलाक्षी हां यही तो नाम है उसका पर सब उसे नीला के नाम से ही पुकारते थे क्योंकि उसकी आंखें नीली थी । रंग गोरा आँखे नीली बाल भी हल्के सुनहरी । पूरे साल बस एक ही बात का इन्तजार रहता कि कब छुट्टियाँ हो और वह नानी के गांव जाये ।  नीला को गांव … Read more

विदेश जाने की चाहत पूरी हुई तुम्हारी,पर मेरा क्या??? – सुषमा यादव

कुछ दिनों से सर्दी खांसी हो गई थी शिवानी को, घरेलू उपचार भी किया, एलोपैथिक दवाएं भी खाई ,पर खांसी जाने का नाम ही नहीं ले रही थी,, वो जल्दी किसी डॉक्टर के पास नहीं जाती,पर जाना पड़ा,, अकेले ही रहती है, ज्यादा तबियत ना ख़राब हो जाये, नहीं तो अकेले अपने आप को कैसे … Read more

नट्टू गट्टू के पप्पा – प्रीती सक्सेना

आज पड़ोस के खाली घर में काफ़ी हलचल सी दिख रही है, लगता है, कोई आने वाला है, तभी जोर शोर से इतनी सफाई चल रही है, चलो कुछ रौनक बढ़ेगी, बातचीत के लिए पड़ोसन तो मिलेगी, सोचकर हम मन ही मन प्रसन्न हुए, और अंदर आ गए, शाम को पौधों को पानी दे रहे … Read more

किसी भी चीज की अति खराब है! – मनीषा भरतीया

शिल्पा ये क्या है…तूम फिर से शुरू हो गई अब यह रोना-धोना बंद करो और जल्दी मेरा बैग लेकर आओ मुझे देरी हो रही है. सूरज प्लीज आप मत जाओ ना मैं आपके बिना नहीं रह पाती मुझे आपकी इतनी ज्यादा आदत हो गई है कि मैं बस सुबह से लेकर शाम तक आपके बिना … Read more

पिता – कंचन श्रीवास्तव

जिद्दी मां-बेटे के बीच,रवि पिसकर रह गया था। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा कि वो क्या करे। बब्बू की बढ़ती उम्र और मां के आंचल की छांव के बीच ,उसे एक तरफ कठोर कदम उठाने पर मजबूर करती तो दूसरी ओर उसकी ममता आड़े आ जाती ।इससे वो बहुत परेशान रहता। सबसे बड़ी बात … Read more

और मातृत्व छलक उठा – नीरजा कृष्णा

आज सुबह हमारे घर के बाहर हमारे पुराने फलवाले की आवाज सुनाई दी….आम ले लो आम, रसीले मीठे आम…सुनकर सबका मन खुश हो गया। “मम्मी, आज मोहन भैया फल का ठेला लेकर आए हैं! देखो देखो ,कितने सुंदर पीले पीले आम हैं।” बोलते बोलते नन्ही पीहू की जीभ जैसे स्वाद से भर कर लपलपा गई। … Read more

रैन-बसेरा – रश्मि स्थापक

“ऐ,मेरी जगह पर ये किसने बोरा बिछाया है…?” बालू ने चिल्लाते हुए कहा। रैन बसेरे में रोज शाम होते ही चीख चिल्लाहट मच जाती।एक तो सर्दियों की रातें फुटपाथ पर सोनेवालों पर भारी गुजरती हैं इसलिए सर्दियों में तो सरकारी रैन-बसेरे में बेघर लोगों की चिल्लपों मची रहती, सब अपनी- अपनी जगह की जुगाड़ में … Read more

हमारी कोई मांग नहीं है… – संगीता त्रिपाठी

बड़े दिनों बाद कीर्ति बुआ जी से कल मुलाक़ात हुई, कीर्ति बुआ हमारे पापा की चचेरी बहन है हालचाल लेने के बाद मैंने बुआ जी से पूछा, “बुआ जी नितिन की शादी कब कर रही हो आप…??    “जब ढंग की लड़की मिल जाये “दार्शनिक अंदाज में बुआ जी ने जवाब दिया।      “ढंग की…. क्या मतलब … Read more

अनचाही नही हमारी चाहत है हमारी बेटी – संगीता अग्रवाल 

” सुनो इस महीने मुझे पीरियड्स नही आए मुझे डर लग रहा है !” सुगंधा अपने पति नवल से बोली। ” ऐसे कैसे पर …हमने तो .. खैर तुम डॉक्टर के पास जाओ हो सकता है कोई हार्मोन्स के बदलाव के कारण हो ये सब !” नवल  पत्नी से बोला। ” नही तुम मुझे किट … Read more

“चाहत कि जिस काम में खुशी मिले वो करना चाहिए!” – ज्योति आहूजा

क्या बात राधिका? आजकल ध्यान कहाँ रहता है तुम्हारा? आलू पराठे में नमक इतना तेज़ डाल दिया है। सास मालती देवी ने किचन में खड़ी बहू को कहा। रविवार का दिन था। सभी घर पर ही थे। बच्चों का स्कूल भी नहीं था। दादी की बात सुन छोटा बेटा सक्षम तुरंत बोला हाँ मम्मी कल … Read more

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