यादों के सहारे जीवन नहीं कटता – शकुंतला अग्रवाल ‘शकुन’
उमा अपने कमरे की खिड़की से क्षितिज को निहार रही है । भास्कर अस्ताचल की ओर डग भर रहे हैं साँझ की लालिमा अपने यौवन पर है रात की अगवानी के लिए। उमा को अपना जीवन भी इस डूबते सूरज-सा लगने लगा। जयंत के जाने के बाद से उसकी हालत भी तो कुछ ऐसी ही … Read more