गहने भी भला कभी उतरन होते हैं क्या?? – सविता गोयल

” क्या दे दिया तेरी मां ने आज तुझे ??”  पलक के हाथों में थैला देखकर  सुधा जी ने चश्में के नीचे से झांकते हुए पूछ लिया। हिचकते हुए पलक ने थैले में से निकालकर एक साड़ी अपनी सास सुधा जी के सामने रख दी।  साड़ी को उलट पुलट कर देखते ही सुधा जी की … Read more

“बुढ़ापे और बेबसी से बड़ा कोई दर्द नहीं होता!!!” – अमिता कुचया

आज मंजरी को घर से न चाहते हुए भी जाना पड़ा।घर परिवार में नाती पोते किसे प्यारे नहीं होते ,जब टिया और टिली दादी से बात करते तो बहू बेटे को बिल्कुल अच्छा नहीं लगता था। वो किसी न  किसी बहाने से दूर करते, उन्हें डर था कि मां जो कि कैंसर से पीड़ित हो … Read more

दिन बीत गए पर दर्द रह गए – रत्ना साहू 

मॉर्निंग वॉक से राधिका जी घर लौटी तो देखा बेटा आरव रसोई में कुछ बना रहा है। “तू यहां क्या कर रहा है बेटा? चल तू जा यहां से, मैं कर लेती हूं।” “कुछ नहीं मां! ब्रेकफास्ट बना रहा हूं।” “पर तुम क्यों बना रहे हो? मैं बना लेती हूं ना!” “आप जाओ मम्मा अपना … Read more

 मनहूस वो नहीं हम है…. – भाविनी केतन उपाध्याय 

मेहंदी की रस्म शुरू होने वाली है और शर्वरी की नजर अपनी एकलौती भाभी को ढूंढ रही है। उसने अपनी दोस्त को मां को बुलाने भेजा अहिल्या जी ने आते ही पूछा “तुमने अभी तक मेहंदी लगवानी शुरू नहीं की?” “नहीं मां, मैं भाभी की राह देख रही थी वो आते ही हम दोनों के … Read more

जड़ें – सारिका चौरसिया

सौंदर्य की प्रतिमूर्ति स्वंय को सर्वगुण सम्पन्न समझने वाली लेखा जी का मानना था कि दुनिया की किसी भी उपलब्धि और सफलता पर सिर्फ उनका ही अधिकार हो सकता है। इस बदगुमानी में की घर -बाहर आस-पड़ोस की सभी औरतें उनकी सुंदरता और गुणों से चिढ़ती हैं लेकिन पहनावे ओढावे में सभी उनकी ही नकल … Read more

होवे वही जो प्रभु रची राखा – संगीता अग्रवाल

” देखिये सुशीला जी आपकी बहु के गर्भ मे पल रहे बच्चे का लिंग मालूम नही हो पा रहा है !” डॉक्टर सुशीला जी जो की अपनी बहु के गर्भ मे पल रहे बच्चे का लिंग जानने आई थी से बोली। ” ऐसे कैसे डॉक्टर पहले भी तो एक बार तुमने लिंग पता लगाया है … Read more

दर्द का रिश्ता – ऋतु गुप्ता

बड़ी अम्मी नजमा तेज बुखार में तप रही थी और छत पर बैठी चुपचाप स्नेह भरी नजरों से नूर को निहार रही थी, जो पास के ही छज्जे पर चढ़ कर पतंग उड़ा रहा था।नजमा नूर से कहना चाहती थी कि बेटा संभाल कर कहीं पतंग के चक्कर में चोट मत मार लेना,पर नूर की … Read more

ईगो… – आशीष व्यास 

अभी एक साल भी नहीं हुआ था दोनों की शादी को कि दोनों में झगड़ा हो गया किसी बात पर … जरा सी अनबन हुईं और दोनो के बीच बातचीत बंद हो गई …वैसे दोनो बराबर पढ़ें – लिखे , दोनो अपनी नौकरी में व्यस्त तो दोनों का इगो भी बराबर … वहीं पहले मैं … Read more

काश कामिनी प्यार का मतलब समझ पाती – मीनाक्षी सिंह

छोड़ दे सारी दुनिया किसी के लिए ये मुनासिब नहीं आदमी के लिए प्यार से भी जरूरी कईं काम हैं प्यार सबकुछ नहीं जिन्दगी के लिए एफएम पर स्लो वोईस में ये गाना सुनते हुए कामिनी अतीत में गुम हो गयी ! कितना प्यार करता था राघव उसे ! जान  छिड़कता था उस पर ! … Read more

अंजान बेटा – माता प्रसाद दुबे

सुबह के आठ बज रहे थे,प्रसिद्ध तीर्थ स्थान हरिद्वार के रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के पहुंचते ही यात्रियों की भीड़ स्टेशन से बाहर निकलने लगी। प्रकाश अपनी ऑटो रिक्शा स्टार्ट करके सवारी के आने का इंतजार कर रहा था। सामने एक बुजुर्ग महिला के साथ कुली उसका सामान लेकर आ रहा था। “आइए माता जी!कहा … Read more

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