दर्द भरा संतोष – गोमती सिंह 

—कल हम दोनों पति पत्नी विवाह समारोह में शामिल होने के लिए गए थे । विवाह के सभी रस्मोरिवाज पूर्ण होने के बाद अंत में चर्च के प्रांगण में दूल्हा दुल्हन दोनों पक्ष के माता-पिता तथा सभी सगे-संबंधियों के  बीच पास्टर जी आशीर्वचनों से संबोधित कर रहे थे पास्टर जी ने संबोधन जैसे ही पूरे … Read more

मर्द का दर्द – सुल्ताना खातून

“लड़का होकर भी भूत से डरता है, ही ही ही ही….” दोस्तों की  वह हंसी कानों में आज भी गूंजती है… मैं गली में खेलने नहीं जाता था… साथी लड़के मुझे चिढ़ाते थे, अरे ये दब्बू है, अपनी बहनों के साथ खेलता है, लड़कियों वाले खेल, अपनी मम्मी के पीछे ही रहता है, डरपोक… उनकी … Read more

शीशम की लकड़ी – पायल माहेश्वरी

आज आलमारी की सफाई करते वक्त रूचि ने गर्म कपड़े निकाले वर्षो पुराने स्वेटर, टोपी, मोज़े, शाल, कोट, मफलर और रजाईया थी। रूचि ने जब सारे कपड़े बाहर निकाले तो उसे एक राहत भरी साँस लेने वाली आवाज आयी, पर आसपास तो कोई नहीं था फिर आवाज कहा से आ रही थी? रूचि को लगा … Read more

बहूरानी को नौकरानी बनाकर रखेंगे??- कनार शर्मा

थोड़ी देर और रुक ना एक मसाला चाय पीते हैं अभी 6 ही तो बजे है क्या जल्दी है घर जाने की… नीता ने अनन्या से कहा। तू नहीं समझेगी मेरा “दर्द”… सास ससुर, ननद चाय के लिए मेरी राह देखते होंगे, पिंकी को भी भूख लगी होगी, छत पर सूखते कपड़े उठाऊंगी,तह बनाऊंगी, प्रेस … Read more

दर्द औरत की बेकद्री का -स्मिता सिंह चौहान

तुम दो दिन से क्या रूआसी सी सूरत लेकर घूम रही हो?खुद को नहीं देखती कि कैसे बात करती हो?अब तो कुछ ज्यादा ही हो रहा है ,हर बात पर कुछ ना कुछ ताने से मारती हो।हमें भी तो चुभती है तुम्हारी बातें?”अनिल ने सुहानी को देखते हुये कहा। “मेरा ना अभी बहस करने का … Read more

दर्द का रिश्ता  – सुषमा यादव

ये दर्द का रिश्ता बड़ा अजीब है,हम अपने किसी खास अज़ीज़ से या किसी दोस्त के दर्द से इतना गहरे जुड़ जाते हैं,कि उसके साथ एक दर्द का रिश्ता बन जाता है। ,, एक प्यारा सा गीत संदेश परक याद आ रहा है,, ,, अपने लिए जिए तो क्या जिए,, ये दिल ये जां किसी … Read more

आजी  -कल्पना मिश्रा

उन सभी के चेहरों पर अपनों द्वारा ठुकराये जाने का दर्द साफ झलक रहा था।बचपन से अब तक तो बस सुनती ही आई थी कि ” बुढ़ापा अभिशाप होता है ..उस पर अपने ही शरीर के अंश द्वारा किया गया बुरा रवैया उन्हें अंदर तक तोड़ देता है।” ये आज “वृद्धाश्रम में रह रहे बुज़ुर्गो … Read more

दर्द समझने वाली बहू !-  मीनू झा

“तुम्हारा तो ये रोज का है” कोई कितना एडजस्ट करेगा रोहित…तुम जैसे पहले अपनी सारी डेली रूटीन फ़ॉलो कर रहे थे वैसे अभी भी कर रहे हो क्या ये सही है?? अरे मम्मी पापा आएं हैं तुम्हारे,उनके प्रति भी तुम्हारा कोई फर्ज बनता है कि नहीं.. उन्हें समय देना बनता है ना तुम्हारा मुझे तुम … Read more

दिशारी   –   गीता वाधवानी

माता-पिता की इकलौती ,लाडली बेटी दिशारी। कल उसका 20 वां जन्मदिन है। मां मीना और उसके पिता ओम जी ने सोचा कि क्यों ना आज रात को 12:00 बजे ही अपनी लाडली को जन्मदिन की बधाई देकर हैरान कर दिया जाए। इसलिए दोनों दबे पांव उसके कमरे की तरफ बढ़ रहे थे। दिशारी के कमरे … Read more

 बंद दरवाजा  –  सीमा वर्मा

” मम्मी आप इस दरवाजे को हर समय बंद क्यूं रखती हो ? ” ” तुम्हें इससे क्या ? तुम सीधी स्कूल से घर और घर से स्कूल आया – जाया करो बीच में कहीं आने-जाने की जरुरत नहीं है और ना ही किसी से मिलने-जुलने की ” “लेकिन क्यों मम्मी ? बाकी की सारी … Read more

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