अपनों का दर्द – संगीता त्रिपाठी

 उनकी आँखों में अथाह दर्द था, आखिर जीवनसंगिनी खो कर जीना आसान नहीं था, वो भी तब जब बच्चे भी विदेश में सेटल हो चुके हो। उमड़ते आँसूओ को रोकने का हुनर सिर्फ स्त्री को ही नहीं आता, बल्कि पुरुष को भी आता है। इस जमघट में कोई नहीं था जो उनके दर्द और आँसू … Read more

दर्द की साझेदारी – लतिका श्रीवास्तव 

दर्द से मानो पिछले सात जन्मों का नाता जुड़ा है मेरा जिंदगी में कुछ सुकून के भी पल ईश्वर ने लिखे हैं या नहीं…..आज तो शरीर का पोर पोर दर्द से लहक रहा है…आरती की आंखों में बार बार आंसू छलक आ रहे हैं….अकेलापन अपने आप में सबसे बड़ा दर्द है जिंदगी का….बच्चे हैं…. बहुत … Read more

साइकिल वाला डिलीवरी बॉय – रश्मि सिंह

यात्रीगण कृपया ध्यान दें गाड़ी नंबर 11546 यमुना एक्सप्रेस प्लेटफार्म नंबर-1 पर आ रही है। आपकी यात्रा मंगलमय हो। धन्यवाद। रोहित-मम्मी जल्दी चलो आपकी ट्रेन प्लेटफार्म नंबर-1 पर आएगी, हम ग़लत प्लेटफार्म पर खड़े है। रोहित और सुशीला जी बैग उठाये तुरंत प्लेटफार्म नंबर एक पर आते है। रोहित अपनी मम्मी को उनकी सीट पर … Read more

दर्द का दर्द से रिश्ता – ममता गुप्ता

चाँद का मुखड़ा, लंबे लंबे बाल औऱ बोलने पर शब्दों में से प्रेम के झरने बहते थे, बला की खूबसूरत थी वो…लेकिन न जाने किस की नजर लग गई विनीता को। शादी के डेढ़ साल बाद ही पति रोहन की एक कार एक्सीडेंट में मौत हो गई थी और विनीता का खुशहाल जीवन एक सफेद … Read more

दर्द – पिंकी सिंघल

शादी के 10 साल बाद जब सिया को उसकी डॉक्टर ने यह खबर दी की वह बहुत जल्द मां बनने वाली है तो सिया की आंखें खुली की खुली रह गईं।वह अपलक डॉक्टर सुषमा को देखती ही देखती रह गई उसका मुंह खुला का खुला रह गया। उसने अपने पति राघव की तरह अश्रुपूर्ण आंखों … Read more

” तू एक बहू होकर मेरी बहू का दर्द क्यों नहीं समझती!!” – अमिता कुचया

सरला जी के पास बहू स्वाति अपने बच्चे को देते हुए कहती हैं – “मम्मी जी आप‌ बाबू को संभाल लेंगी। यदि आप कहे तो मैं न जाऊं।”तब सरला जी कहती- अरे स्वाति कैसी बात कर रही है, मैं बाबू  का अच्छे से ख्याल रखूंगी। अभी बाहर ठंड है ,इसलिए अपने बाबू को नहीं भेज … Read more

हर बार पत्नी ही समझौता क्यों करें – नूतन योगेश सक्सेना 

आज सुनंदा की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था , आखिर उसे इतने महीनों से दिन रात की गई अपनी मेहनत का फल मिल ही गया था। वो जिस प्रोजेक्ट पर पिछले कई महीनों से कार्य कर रही थी, उसका एप्रूवल हो गया था ।       सुनंदा आज के जमाने की पढी – लिखी होशियार लडकी … Read more

हाथी के दाँत – मधु शुक्ला

विभा के पड़ोस में रहने वाली रीमा नौकरी के कारण ज्यादा व्यस्त रहती थी। इस वजह से उससे विभा की बातचीत नहीं हो पाती थी। वह उसको बस आते जाते देखती थी। कभी-कभी मुस्कान का आदान प्रदान हो जाता था। इसके अलावा विभा जरूरत पड़ने पर रीमा से पैसे या घर में घटे सामान माँग … Read more

दस्तक – डॉ. पारुल अग्रवाल

संध्या के साथ आज जो भी कुछ घटित हुआ,उससे संध्या के तो मानो पैरों तले ज़मीन ही खिसक गई। उसने आज तक खून का पानी होने वाली कहावत सिर्फ सुनी ही थी पर आज उसने प्रत्यक्ष रूप में अनुभव भी कर लिया। आज उसके ही सहोदर ने उसको ऐसा दर्द दिया था जिसको वो भुला … Read more

दर्द का एहसास – कान्ता नागी

(सत्य घटना पर आधारित) सुमन मुंशी प्रेमचंद जी का प्रसिद्ध उपन्यास गोदान पढ़ने में तल्लीन थी। उपन्यास काफी रोचक लग रहा था, अचानक उसे किसी के दर्द से कराहने का करूण स्वर सुनाई पड़ा। उसने दीवार पर टंगी घड़ी की तरफ देखा-रात के बारह बज रहे थे। पास में ही पति रंजन और दोनों बेटियां … Read more

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