अपनों का दर्द – संगीता त्रिपाठी
उनकी आँखों में अथाह दर्द था, आखिर जीवनसंगिनी खो कर जीना आसान नहीं था, वो भी तब जब बच्चे भी विदेश में सेटल हो चुके हो। उमड़ते आँसूओ को रोकने का हुनर सिर्फ स्त्री को ही नहीं आता, बल्कि पुरुष को भी आता है। इस जमघट में कोई नहीं था जो उनके दर्द और आँसू … Read more