दर्द जो समय के साथ मरहम बन गया – Short Motivational Story

अभी पिछले साल ही मंगला (काम वाली दीदी)ने कुछ पैसों की मांग की थी,बेटी की शादी के लिए।सुधा ने जब सुमित को बताया ,उन्होंने तुरंत हां कह दी।दस हजार रुपए दे दिए मंगला को।मंगला‌ ने खुश होकर कहा कि वो जल्दी लौटा देगी पैसे।सुधा ने अलग से कपड़े और बर्तन भी दिए अपनी तरफ से।दो … Read more

दर्द  –  के कामेश्वरी

मालती जी अपने कमरे से धीरे धीरे चलते हुए बाहर निकल कर आई और अभी वे पिछवाड़े की तरफ़ जाने ही वाली थी कि रमा ने उन्हें रोकते हुए कहा कि माँजी आप भी इतनी सुबह सुबह उठकर कहाँ जा रही हैं । आपको ऑफिस या स्कूल कॉलेज तो नहीं जाना है न क्या जल्दी … Read more

मां का दर्द मां बनके ही समझ आता है।- अर्चना खंडेलवाल 

मां यह क्या इतना सारा आटा सेंक रही हो!!मैं इतने सारे लड्डू नहीं ले जाऊंगी, खाऊंगी तो मोटी हो जाऊंगी, आप कुछ कम कर लो, बहुत समय भी लग जायेगा और हमें बहुत सारे काम भी निपटाने है, मार्केट भी जाना है और शॉपिंग भी तो करनी है, सपना ने रसोई में मां सुजाता को … Read more

दुख-दर्द भरी गृहस्थी –   मुकुन्द लाल

कड़ाके की ठंड में भी रानी अपनी माँ मंजुला के साथ कस्बे के पंँचों के दरवाजे पर जाकर अपना दुखड़ा सुना रही थी। अपने चाचा बलवीर द्वारा उसके परिवार पर ढाये जा रहे जुल्म और अनीति युक्त कारनामों के खिलाफ। अपने हिस्से से अधिक मकान पर जबरन कब्जा करने और पुश्तैनी धन-संपत्ति को हड़पने की … Read more

दर्द तो मुझे हुआ था  – सविता गोयल

अंजलि छत पर बंधी ऊंची रस्सी पर कपड़े सुखाने की कोशिश कर रही थी लेकिन उसका हाथ नहीं पहुंच रहा था। थोड़ा उचककर उसने जैसे ही कपड़ा सुखाया अंजलि की कमर में झटका लगा और दर्द शुरू हो गया।कमर पकड़कर वो धीरे धीरे छत से नीचे उतरी और बरामदे में डली कुर्सी पर बैठ गई। … Read more

मदद  ( छोटी सी कहानी) – विनोद शर्मा”विश”

…🖊️आज मुझे अपनी माँ की बात स्मरण हो आई l बोलती थी बेटा किसी बेसहारा की “मदद” जरूर करो। अगर आप कर सकते हो अपनी सुविधा अनुसार जरूर “मदद” करो। मैंने भी एकबार ऎसा करके देखा l बल्कि अब तो कई बार किया है l और बहुत ख़ुशी मिलती है। उसी में से एक आपके … Read more

यादें – सुधा शर्मा

      आज फिर वही हिमाचल की खूबसूरत वादी, दूर तक फैली हुई बर्फ के पहाड़ों की मनोरम छटा , चारों ओर हरियाली , ठंड का सुहाना मौसम।, बस फर्क इतना कि तब किसी के स्नेह व भावनाओं  से सराबोर प्रफुल्लित मन और आज उसकी स्मृतियों में डूबता उतरता अवसाद ग्रस्त हो चुका मन।                 यहीं इन्हीं वादियों … Read more

बेदर्द दर्द – रजनी श्रीवास्तव अनंता 

“सुना है आजकल कहानियां लिखने लगी हो?”  मेरी सहेली रीनू ने मेरी तरफ देख कर कहा तो, किटी पार्टी में शामिल सारी लड़कियां (औरतें कहना पार्लर की बेइज्जती होगी) मेरी तरफ देखने लगीं। कुछ ने मुझ पर एक नज़र डालने के बाद, नज़र फेर लीं। जैसे कि उन्हें डर हो कि मैं जबरदस्ती पकड़-पकड़ कर … Read more

दर्द की पराकाष्ठा – शकुंतला अग्रवाल ‘शकुन’

पावस ऋतु ढलान पर थी शरद की दस्तक से हवा में नमी व्याप्त होने लगी थी। मंद-मंद पवन का झौंका भाव-विभोर कर जाता है। उस पर पूनम की रात हो तो समस्त वसुधा प्रेममयी हो जाती है। ऐसे सुरम्य-वातावरण में भी किसी के अंतस में लावा फूट रहा हो तो, प्रकृति भी गमगीन होने लगती … Read more

नजरिया – डॉ उर्मिला सिन्हा

  मन खिन्न था … धीरे-धीरे बड़े होते हुए बेटा बेटी .. उनकी चाहतें,जिद, उटपटांग  हरकतें उन्हें परेशान कर  डालती है।   “पराठा , पूड़ी सब्जी ,खीर,सेव‌ई कोई खाने की वस्तु है….”नाश्ते के प्लेट को हाथ नहीं लगाते आज के  बच्चे।     भले कालेज के कैंटीन में पिज्जा,बर्गर, फास्ट फूड, अगड़म -बगड़म खाकर अपनी भूख मिटाते हों ।लेकिन  … Read more

error: Content is protected !!