कभी मेरा दर्द भी देख लेते… – रश्मि प्रकाश

“ जानती भी हो ये कितने का था….. ।” सामने फ़र्श पर पड़े फूलदान को टुकड़ों में बिखरा देख रितेश पत्नी नित्या पर बरस रहा था  “ जी वो साफ करते हाथ से छूट गया….. पता था बहुत क़ीमती था… तभी तो कमली को हाथ लगाने ना देती थी… अब जान बूझकर तोगिराया नहीं ।“ … Read more

बुढ़ापे के दर्द की दवा – पूजा मनोज अग्रवाल

अरे मम्मा क्यूं बर्तन धो रही हो,,,कितनी सर्दी पड़ रही है ,,,फिर से बीमार हो जाओगी तुम,,, । नही बेटा,,,,तुम्हें तो पता है ना में तो पुराने जमाने की हूं और मेरे हिसाब से रसोई में रात को झूठे बर्तन छोड़ना अच्छी बात नहीं है,,, कहकर मालती जी हंसने लगी । ” आपको कितना भी … Read more

मन को भिगो दिया – कंचन श्रीवास्तव

हर कोई शाम अपनी रंगीन करने ही तो आता है, ‘ हलक के नीचे शराब का आखिरी घूंट उतारते हुए रीमा बोली ‘ बता तुझे अभी दूं या और चढ़ा दूं थोड़ा।और मुड़ते हुए तिरछी नज़र से देखा। तो देखते ही हैरान हो गई। आने वाला  शख्स दरवाजे के बाहर चप्पल उतार कर आया था।कुछ … Read more

इस दर्द से मैं भी गुजरी हूं दीदी – सरोज प्रजापति

नौकरी और घर परिवार की दोहरी जिम्मेदारियों के चलते चाहकर भी बीना कई दिनों से अपनी ननद से बात  करने का समय नहीं निकाल पा रही थी। सास रही नहीं इसलिए जब भी समय मिलता वह फोन पर उनका व परिवार का हालचाल पूछ लिया करती थी। जिससे कि उसकी ननद को मां की कमी … Read more

मर के भी ना होंगे जुदा – सुषमा यादव

एक प्यारा सा गांव,,उस गांव की एक खूबसूरत लड़की ऋतु कालेज पढ़ने गई, बहुत कम ही लड़कियां कालेज तक पहुंच पाती।  पर ऋतु के घरवालों को अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलवाना था, अतः बेरोकटोक किसी की भी परवाह किए बगैर ऋतु कालेज पढ़ने जाने लगी,,नये नये लोग,कालेज की नई जिंदगी, उसे बहुत रास आने … Read more

यादें – सुधा शर्मा

 आज फिर वही हिमाचल की खूबसूरत वादी, दूर तक फैली हुई बर्फ के पहाड़ों की मनोरम छटा , चारों ओर हरियाली , ठंड का सुहाना मौसम।, बस फर्क इतना कि तब किसी के स्नेह व भावनाओं से सराबोर प्रफुल्लित मन और आज उसकी स्मृतियों में डूबता उतरता अवसाद ग्रस्त हो चुका मन।               यहीं इन्हीं वादियों … Read more

पाप – नन्दलाल भारती 

दंश रतन इतना बड़ा पाप करेगा, कलयुग में भी विश्वास नहीं होता।पलपल कलपती निधि के आंखों से निरन्तर झरते आंसू और नरोत्तम की असहनीय पीड़ाओं के एहसास से तो यही लगता था। दंश रतन और उसकी घरवाली निर्लजा की साज़िश का पर्दाफाश हो चुका था। नरोत्तम और निधि के बेटे आज्ञा कुमार के साथ दंशरतन … Read more

बेटियों को दर्द देने वालों को सज़ा जरूर मिलनी चाहिए- शोना सिंह 

“रुचि बेटा तैयार हो जा,तेरी बुआ के यहां चलना है, तेरी थोड़ी बहुत पैकिंग तो मैंने कर दी हैं बाकी की पैकिंग तुम खुद करो और हां शादी के हिसाब से 2-3 जोड़ी कपड़े जरूर रख लेना,वरना वहां जाकर शिकायत करोगी कि मां मेरी वो ड्रेस क्यों नहीं लाई…वो ड्रेस नहीं पैक नहीं की,हर बार … Read more

दर्द बना नासूर –   मंजू तिवारी

यह बात लगभग 30 साल पहले की है। गणतंत्र दिवस आने ही वाला था ,,, स्कूल में बच्चों से गायन और नृत्य में भाग लेने के लिए नाम लिखे जा रहे थे,,, मुझे गाना और नृत्य दोनों ही नहीं आते थे तो मैं सुनने वालों में शामिल रहती थी,,,,, सारे बच्चों से सुना जा रहा … Read more

दर्द का बंटवारा – Emotional Story

शाम हो गई थी |बूढ़ी सरला काकी ने अपनी चाय की दुकान समेट ली |जाड़े का समय था |अब किसी ग्राहक के आने की उम्मीद न थी |वह चूल्हे के आग पर रात के लिए रोटियां सेंक रही थी |रात के साथ- साथ वह सुबह के लिए भी रोटी बना लेती थी| शाम को चूल्हे … Read more

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