‘ वक्त बदलता अवश्य है ‘ – विभा गुप्ता

 ” वो देखो, शराबी की बीवी जा रही है।” चौराहे पर बैठे लोगों में से एक ने कहा तो रुक्मणी धीरे- से बुदबुदाई, फिर से वही शब्द…..ओफ़्फ! और हमेशा की तरह अपने कानों पर हाथ रखते हुए वह वहाँ से निकल गई।          ‘ शराबी की पत्नी ‘ हमेशा से रुक्मणी की पहचान नहीं थी।दस बरस … Read more

शुभा की जीवन यात्रा” – सीमा वर्मा

” हम तो यूं ही बैठे हैं , उम्र की दहलीज पर देखूं कहां तक ले जाता है वक्त हमें घसीटे हुए “ साथियों यह कहानी एक स्त्री की सम्पूर्ण जीवन यात्रा है। उसके बालपन से शुरू हुई उम्र की उन्यासवीं पायदान पर खड़ी आसन्न मृत्यु के इंतजार करती बेचैन ‘शुभा ‘  की आंखों में … Read more

काश कुछ वक्त मिल जाता – किरन विश्वकर्मा

नीरा बहुत खुश थी, उसके बेटे पार्थ की शादी होने वाली थी। वह यह सोच कर बहुत खुश थी कि अभी तक वह बहू थी अब उसकी भी बहू आ जायेगी। अपनी सहेली रमा के साथ नीरा आज कुछ सामान खरीदने पर मार्केट आई हुई थी। अभी शादी में एक महीने का समय था दोनों … Read more

“सब दिन होत न एक समाना ” – डॉ. सुनील शर्मा 

राम चरण मास्टर जी जब तक विद्यालय के प्रधानाचार्य रहे, अपनी शर्तों पर नौकरी की. कभी विद्यालय के कार्यकलापों में न किसी तरह की ढील बर्दाश्त की, न एक भी पैसा खाया. उसूलों के पक्के मास्टर साहब ने न कभी टयूशन किए और सभी मातहत अध्यापकों पर भी कड़ी नज़र रखी. बल्कि कमज़ोर छात्रों के … Read more

अपने और पराए-वक्त ने बतलाए – पूजा मिश्रा

”कहो राजकरण! कैसा लग रहा है? अब चले, कि अभी अपनी आंखों से और भी कुछ देखना बाकी है।”  ”नहीं-नहीं प्रभु, अब इतना सब कुछ देख लिया, अब तनिक इच्छा नहीं करती कि और कुछ अपने आंखों से देखूँ। अभी इसी समय कृपया कर मुझे अपने साथ ले चले प्रभु, कृपया कर अपने साथ ले … Read more

कौन जाने किस घड़ी वक्त का बदले मिज़ाज – कुमुद मोहन 

“ये सब इस मनहूस की वजह से हुआ! जब वो जा रहा था कैसे रो रो के इसने अपशकुन किया था! जब से फ्रंट पर जाने की बात सुनी थी इसने शलभ को चैन की सांस तक ना लेने दी थी पूरे घर में मनहूसियत फैला के रखी थी!हर वक्त मुंह सूजाऐ घूमा करती! अरे!जब … Read more

पंखे की डोर –   बालेश्वर गुप्ता

     अरे रामदीन क्या मर गया है, हाथ क्यों नहीं चल रहे?देखता नही कितनी गर्मी पड़ रही है,जल्दी जल्दी डोर खींच।          जी माई बाप, कह कर  पसीने से तरबतर रामदीन ने और जोर से डोरी खींचनी शुरू कर दी।         असल मे अबकी बार गर्मी कुछ अधिक ही पड़ी थी।वैसे भी बड़े आदमियों को गर्मी हो या … Read more

मम्मी वक्त के साथ बदल जाने में ही समझदारी है। – दीपा माथुर

शैली मम्मी से जिद्द करती हुई बोली ” प्लीज़ मम्मा अबकी बार भाभी को मैं जो ड्रेस दे रही हूं आप पहनने दीजियेगा।” आप ही तो कहती थीं ” मेरे मोंटू की शादी होगी तो देखना  उसकी बहू को तुमसे भी अच्छा रखूंगी “ बस दिखावे के लिए क्या? मम्मी जी आंखों की त्योरियां चढ़ा … Read more

विरासत – अनुज सारस्वत

अमेरिका से विदुषी 15 साल बाद भारत लौटी थी, अपने दादा जी की चहेती थी ,जो कि अब भी भारत के एक पहाड़ी गांव में गंगा के समीप रहते थे ,रिटायर्ड मेजर थे उसके दादू, 80 साल की उम्र में भी फिट और यंग रहते थे सारा ऑर्गेनिक फार्म खुद ही व्यवस्थित करते थे, विदुषी … Read more

वासना – पृथ्वीराज

रॉकी, शहर के सबसे अमीर आदमी का बेटा.. जिसने कभी हारना नही सीखा, वो जो चाहता वो चीज उसके कदमों में होती थी.. और जिसे वो हासिल नहीं कर पाता था, उसे वो मिटा देता था.. दिन भर घूमना फिरना और रातों में पार्टी उसकी आदत थी.. शराब और शबाब दोनो से दिन रात घिरा … Read more

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