मै रहूं या ना रहूं( एक  प्रेम कहानी) – सपना शर्मा काव्या

कुछ घटनाएं हमारी ज़िंदगी में ऐसी हो जाती है जिन पर विश्वास करना मुश्किल होता है। लेकिन वो कहते है भगवान है तो सब कुछ मुमकिन है। हां अगर ये घटना मेरे साथ ना हुई तो शायद मेरा भी यकीन करना मुश्किल ही होता । मै रोज की तरह आज भी लास्ट में अपनी फ्लाइट … Read more

प्रपोज डे  – मीनाक्षी सिंह

कुनाल दौड़ता हुआ आया ,दादू ये लो फूल ! हैप्पी प्रपोज डे दादू ! आई लव यू ! महावीर जी (कुनाल के दादू ) – ये क्या कर रहा हैँ तू  ,मुझे फूल क्यूँ दे रहा हैँ ! लड़खड़ाती हुई आवाज में ! कुनाल – अरे दादू आप भी ना कुछ भी नहीं जानते ! … Read more

वो पुराना गुलाब – गुरविंदर टूटेजा

  आदि व अवनी मम्मी-पापा के साथ बैठें बातें कर रहें थे…अवनी ने बोला कि…क्या करना हैं फिर आपकी पच्चीसवीं सालगिरह आ रही हैं मेरे पास एक आईडिया है कि…गोवा जा सकतें हैं…!!!! आदि ने कहा या छोटा सा फैमली फंक्शन रख सकतें हैं…?? नीरजा ने कहा कि मेरे हिसाब से तो हम चारों गोवा चलतें … Read more

मम्मीजी पापाजी का “लड़ाई वाला लव” – मीनू झा 

भाभी…लगता है रात फिर कहा सुनी हुई है मम्मी जी और पापाजी में…सुबह सुबह पापाजी कहीं निकल गए हैं और मम्मीजी मुंह फुलाए बैठी हैं बालकनी में–छोटी बहू स्निग्धा बड़ी बहू नम्रता से कह रही थी। तुम नई हो ना स्निग्धा थोड़े दिनों में इन सबकी आदत तुम्हें भी पड़ जाएगी… मैं तो तीन सालों … Read more

प्रेम न जाने जात पात भूख न जाने खिचड़ी भात – के कामेश्वरी 

 प्रणव और शिप्रा प्रेम की अनोखी मिसाल थे । दोनों एक साल से एक-दूसरे से प्यार करते थे ।फ़ोनपर घंटों बातें भी करते थे पर अनोखी बात तो यह थी कि दोनों ने एक दूसरे को अभी तक नहीं देखा था।है न दोनों अनोखे !!!!प्रणव हैदराबाद में रहता था और शिप्रा चेन्नई में ।  दरअसल … Read more

बीते हुये लम्हें – डा. मधु आंधीवाल

दामिनी पार्क  की बैंच पर आज इन नवयुवक युवतियों की टोलियों को देख रही थी । उनकी बातों से पता लगा कि आज ” रोज डे ” है। ये सब नये जमाने की पाश्चात्य संस्कृति में रंगी पीढ़ी है। दामिनी सोच रही थी। क्या हम  कभी जीवन की इस आयु से नहीं गुजरे । प्यार … Read more

अमरता का वरदान – पुष्पा पाण्डेय 

काॅलेज में गये अभी एक माह भी नहीं हुआ था कि खुशबू की जिन्दगी बदल गयी। अन्तर्मुखी  स्वभाव की खुशबू को अपनी पढ़ाई और माँ के कामों में हाथ बटाँने के सिवा किसी और उपकर्म में कोई रुचि नहीं थी। एक महीने में इतना बड़ा परिवर्तन…… बाल- सज्जा के नये-नये तरीके…आकर्षित और मर्यादित पहनावा…न जाने … Read more

एहसासों की तुरपाई – कमलेश राणा

ओहो.. आज फिर देर हो गई चाहे जितना जल्दी जल्दी काम करूँ फिर भी घड़ी की सुई से हार ही जाती हूँ। ऑफिस पहुँचते ही सबकी नजरें ऐसे देखती हैं मानो कोई चोरी पकड़ ली हो… निधि लगभग दौड़ती हुई बस स्टैंड की ओर जा रही थी और साथ ही मन ही मन बड़बड़ा भी … Read more

लव मैरिज का भूत… –  सविता गोयल 

” हाय… देख न सोनिया , कितना हैंडसम लड़का है । काश ये मेरा ब्वाॅयफैंड होता ।,, माॅल के सामने बाईक लेकर खड़े एक हैंडसम लड़के को देखकर नुपुर के पेट में तितलियां उड़ने लगीं । ”   चुप कर पागल, तूं इस तरह उसे घूरेगी तो वो क्या सोचेगा । पता नहीं तुझे ये … Read more

घाटी की कहानी  – कृष्णा विवेक

अमावस्या की रात थी विपुल अपनी ही कार से हिमाचल किसी बिजनेस के सिलसिले में गया था। घाटी की यातायात संसाधन से तो सभी वाकिफ हैं कौन जाने कब क्या हो जाए,  ऊपर से समय पर वाहन मिलना भी मुश्किल है इसी के चलते विपुल ने अपनी अपनी कार मैं जाना सेफ समझा ।  कहा … Read more

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